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Chaitra Navratri 2021: भक्ति और शक्ति के दिन हैं चैत्र नवरात्रि, श्री राम ने लिया था जन्म, जानिए खास बातें

नई दिल्ली, 13 अप्रैल। आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हुई है। एक साल में तीन बार नवरात्रि (चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि और गुप्त नवरात्रि) का पर्व आता है। हर एक का अपना महत्व है। चैत्र नवरात्रि से हिंदू नववर्ष का भी प्रारंभ होता है, इसलिए चैत्र नवरात्रि से नवशुरुआत भी माना जाता है। इस नवरात्रि का अंत राम नवमी पर होता है, जिस दिन मर्यादा पुरषोत्तम श्री राम का जन्म दिवस माना जाता है।

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    चलिए जानते हैं चैत्र नवरात्रि के बारे में कुछ खास बातें...

    चलिए जानते हैं चैत्र नवरात्रि के बारे में कुछ खास बातें...

    राम नवमी 21 अप्रैल को है, माना जाता है कि चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अभिजित मुहूर्त में, राजा दशरथ की पहली पत्नी कौशल्या के गर्भ से प्रभु श्री राम ने जन्म लिया था। लेकिन इस बार जो तिथि पड़ रही है उस तिथि को ही श्री रामचंद्र जी का राज्यअभिषेक हुआ था।

    भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव

    भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव

    • माना जाता है कि चैत्र नवरात्रि से ही ब्रह्माजी ने ब्रह्नमांड की रचना आरंभ की थी।
    • चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सम्राट विक्रमादित्य ने अपना राज्य की स्थापना की थी, जिसकी वजह से ही आज से विक्रमी संवत का पहला दिन माना जाता है।
    • यही नहीं पुराणों के मुताबिक धर्मराज युधिष्ठिर का राज्यअभिषेक भी चैत्र नवरात्रि के पहले दिन हुआ था।
    भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव आज

    भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव आज

    • आज ही सिंधी समाज भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव मनाता है।
    • तो वहीं सिख समाज द्वितीय गुरु श्री आनंद देव जी का जन्मदिन भी आज ही सेलिब्रेट करता है।
    • आर्य समाज का स्थापना दिवस भी आज के ही दिन हुई थी।
    • तो महर्षि गौतम भी आज के ही दिन दुनिया में आए थे, यानी कि उनका जन्मोत्सव आज ही है।
    भक्ति और शक्ति के दिन हैं चैत्र नवरात्र

    भक्ति और शक्ति के दिन हैं चैत्र नवरात्र

    नवरात्रि भक्ति और शक्ति का दिन कहलाते हैं। अगर मां दुर्गा ने चंड, मुंड, शुंभ, निशुंभ, चिक्षुपर, महिषासुर जैसा दानवों का वध किया था तो वहीं दूसरी ओर श्री राम ने रावण जैसे राक्षस से धरती को मुक्त किया था। राम और दुर्गा दोनों ने ही असुरों और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई थी। पुराणों में भी वर्णन किया है कि श्री राम ने भी लंका दहन से पहले शक्ति की देवी मां अंबे की पूजा की थी, इसलिए चैत्र नवरात्रि में मां शेरावाली और प्रभु राम दोनों ही पूजे जाते हैं।

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