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Bhishma Panchak Vrat 2024: कृष्ण का प्रिय बन जाता है भीष्म पंचक व्रत करने वाला मनुष्य

Bhishma Panchak Vrat 2024: यदि किसी मनुष्य का भाग्य सोया हुआ है तो वह जीवन में चाहे कितनी भी मेहनत कर ले, उसे सफलता नहीं मिलती है। भाग्य का साथ नहीं मिलने का सबसे बड़ा कारण आपके द्वारा किए गए पुण्य कर्मों का सुप्त अवस्था में होना है।

यदि आपके पुण्य कर्मों का उदय नहीं हुआ है तो आपको कहीं भी सफलता नहीं मिलेगी। पुण्य कर्मों को जगाने का सबसे बड़ा मार्ग है भीष्म पंचक व्रत। यह व्रत करने वाला मनुष्य श्रीकृष्ण का प्रिय बन जाता है।

Bhishma Panchak Vrat 2024

प्रत्येक वर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक पांच दिन का भीष्म पंचक व्रत किया जाता है। इस बार यह व्रत 11 नवंबर 2024 से प्रारंभ होकर 25 नवंबर तक चलेगा। पांच दिन का यह व्रत स्त्री-पुरुष सभी को समान रूप से करना चाहिए। इसमें फलाहार करते हुए व्रत किया जा सकता है।

यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में प्रारंभ करवाया था। महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद जब भीष्म पितामह शरशैय्या पर लेटे हुए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे तब भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को भीष्म पितामह के पास धर्म उपदेश लेने भेजा था। श्रीकृष्ण के आदेश पर पांचों पांडवों ने कार्तिक शुक्ल एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक पितामह से धर्म उपदेश ग्रहण किया था। उन्हीं पांच दिनों की स्मृति में यह भीष्म पंचक व्रत किया जाता है।

कैसे किया जाता है भीष्म पंचम व्रत ?

भीष्म पंचक व्रत समस्त प्रकार के सुख भोग और आध्यात्मिक, आत्मिक उन्नति के लिए किया जाता है। मुख्यत: यह व्रत सोए हुए भाग्य को जगाने के लिए किया जाता है। जो लोग यह व्रत करते हैं उनके समस्त मनोरथ पूर्ण होते हैं और परिवार में आपसी सामंजस्य, सुख शांति बनी रहती है। इस दिन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र से भगवान श्रीकृष्ण का पूजन किया जाता है। पांच दिन तक अखंड जलने वाला घी का दीपक लगाया जाता है। अंतिम दिन ऊं विष्णवे नम: स्वाहा मंत्र से घी की 108 आहुतियां देते हुए हवन किया जाता है।

व्रत की कथा

महाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था। अर्जुन के बाणों से घायल भीष्म पितामह अपनी मृत्यु के लिए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा में शरशैय्या पर शयन कर रहे थे। तब भगवान श्रीकृष्ण पांचों पांडवों को साथ लेकर उनके पास गए। उपयुक्त अवसर जानकर युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से प्रार्थना की कि आप हमें राज्य, राजनीति, अर्थव्यवस्था संबंधी उपदेश देने की कृपा करें। तब भीष्म पितामह ने पांच दिनों तक राज धर्म, वर्णधर्म, मोक्षधर्म आदि पर उपदेश दिया था। इन पांचों दिन पांडव निराहार रहते हुए पांच दिन उपदेश सुनते रहे। उनका उपदेश सुनकर श्रीकृष्ण संतुष्ट हुए और बोले पितामह! आपने कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक पांच दिनों में जो धर्ममय उपदेश दिया है, उससे मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई है। मैं इसकी स्मृति में आपके नाम पर भीष्म पंचक व्रत स्थापित करता हूं। जो मनुष्य यह व्रत पांच दिनों तक करेगा उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी और उसे मेरी शरण प्राप्त होगी।

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