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Bada Mangal 2023: ज्येष्ठ माह का पहला बड़ा मंगलवार आज, कीजिए इन मंत्रों का जाप

Bada Mangal 2023: ज्येष्ठ माह के मंगल को बड़ा मंगल कहते हैं। इस दिन बजरंगबली की पूजा करने से इंसान को यश की प्राप्ति होती है,आज के दिनहनुमान जी को रोट का भोग लगता है।

Bada Mangal 2023

Bada Mangal 2023: ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। आज इस माह का पहला बड़ा मंगल है। इस महीने में चार मंगल पड़ेंगे। दूसरा मंगल 16 मई को, तीसरा मंगल 23 मई को और चौथ मंगल 30 मई को है। आज के दिन जो भी हनुमान जी की पूजा सच्चे मन से करता है, उसके सारे कष्टों का अंत होता है।

हनुमान जी की पूजा विशेष मंत्रों से करें

आज के दिन हनुमान जी की पूजा विशेष मंत्रों के साथ करनी चाहिए, ऐसे करने से घर में सुख-शांति का वास होता है तो वहीं आज के दिन अगर कोई हनुमानाष्टक का पाठ करता है तो उसकी सारी मुसीबतें खत्म हो जाती है और उसकी हर इच्छा पूरी होती है।

ज्येष्ठ माह में कितने मंगल

  • ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्वाहा।
  • 'ॐ नमो भगवते हनुमते नम:
  • ' दुर्गम काज जगत के जेते
  • ' और मनोरथ जो कोई लावै
  • 'ॐ हं हनुमते नम:
  • 'ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकायं हुं फट्
  • 'ॐ हं पवननन्दनाय स्वाहा
  • 'ॐ नमो हरि मर्कट मर्कटाय स्वाहा

॥ हनुमानाष्टक ॥

बाल समय रवि भक्षी लियो तब,
तीनहुं लोक भयो अंधियारों।
ताहि सों त्रास भयो जग को,
यह संकट काहु सों जात न टारो।
देवन आनि करी बिनती तब,
छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो।
को नहीं जानत है जग में कपि,
संकटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥
बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महामुनि साप दियो तब,
चाहिए कौन बिचार बिचारो।
कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
सो तुम दास के सोक निवारो ॥ २ ॥
अंगद के संग लेन गए सिय,
खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु,
बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो।
हेरी थके तट सिन्धु सबे तब,
लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥ ३ ॥
रावण त्रास दई सिय को सब,
राक्षसी सों कही सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
जाए महा रजनीचर मरो।
चाहत सीय असोक सों आगि सु,
दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥
बान लाग्यो उर लछिमन के तब,
प्राण तजे सूत रावन मारो।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।
आनि सजीवन हाथ दिए तब,
लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥ ५ ॥
रावन जुध अजान कियो तब,
नाग कि फाँस सबै सिर डारो।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
मोह भयो यह संकट भारो I
आनि खगेस तबै हनुमान जु,
बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥ ६ ॥
बंधू समेत जबै अहिरावन,
लै रघुनाथ पताल सिधारो।
देबिन्हीं पूजि भलि विधि सों बलि,
देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो।
जाये सहाए भयो तब ही,
अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥ ७ ॥
काज किये बड़ देवन के तुम,
बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को,
जो तुमसे नहिं जात है टारो।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
जो कछु संकट होए हमारो ॥ ८ ॥

॥ दोहा ॥

लाल देह लाली लसे,
अरु धरि लाल लंगूर।
वज्र देह दानव दलन,
जय जय जय कपि सूर ॥

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