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Guruwar Ko Na Karen ye Kaam: गुरुवार को भूलकर भी ना करें ये चार काम वरना हो जाएंगे कंगाल

Guruwar Ko Na Karen ye Kaam: गुरुवार का दिन प्रभु विष्णु भगवान को समर्पित है। माना जाता है कि विष्णु जी की पूजा करने से ज्ञान, बल, यश की प्राप्ति होती और अगर इस दिन विष्णु जी की प्राणप्रिया लक्ष्मी जी की भी अराधना की जाए तो निश्चित तौर पर इंसान को दोगुने फल की प्राप्ति होती है।

लेकिन इस दिन कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखने की जरूरत होती है।अगर ऐसा ना किया जाए तो इंसान को आर्थिक और मानसिक कष्ट झेलना पड़ सकता है। इसलिए आज हम आपको बताते हैं कि गुरुवार के दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

Guruwar Ko Na Karen ye Kaam

Guruwar Ko Na Karen ye Kaam: गुरुवार को क्या ना करें?

बाल ना धोएं मदिरापान और मांसाहारी भोजन भी ना खाएं, ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती है,किसी से ना तो पैसे लें और ना ही किसी को पैसे दें, ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से घर में गरीबी आती है। केले का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस दिन इसकी पूजा की जाती है और केले का सेवन करने से भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं। गुरु और पिता का अपमान ना करें, ऐसा करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों नाराज हो सकती हैं और दोनों के नाराज होने से इंसान को कभी कोई सुख नहीं मिलता है।

Guruwar Ko Kya Kare: गुरुवार को क्या करना चाहिए?

इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा विष्णु चालीसा से करें, ऐसा करने से इंसान की हर मनोकामना पूरी होती है और वो हमेशा धनी बना रहता है चतो तो वहीं मां लक्ष्मी को भी लड्डू का भोग लगाना चाहिए ऐसा करने से मां खुश होती हैं।

विष्णु चालीसा (Lord Vishnu Chalisa)

दोहा

  • विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
  • कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥
  • विष्णु चालीसा
  • नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
  • प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥
  • सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
  • तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥
  • शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
  • सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥
  • सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
  • सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥
  • पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
  • करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥
  • धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
  • भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥
  • आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
  • धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥
  • अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
  • देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥
  • कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
  • शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥
  • वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
  • मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥
  • असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
  • हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥
  • सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
  • तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥
  • देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
  • हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी ॥
  • तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
  • गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे ॥
  • हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
  • देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे ॥
  • चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।
  • जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ॥
  • शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
  • करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ॥
  • करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
  • सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ॥
  • दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।
  • पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ ॥
  • सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।
  • निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥

डिसक्लेमर- यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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