जानिए, भारत में सेहरी और इफ्तार का समय। यहां देखिए अगले 30 दिनों के दौरान भारत के सभी प्रमुख शहरों में रमजान 2026 का टाइम टेबल, सेहरी और रोजा इफ्तार का समय।
रामदान 2026: पाक महीने का प्रारंभ, जानें सहरी और इफ्तार का सही समय
रमजान का पावन महीना शुरू होने जा पहा है। इस्लाम में रमजान को सबसे पवित्र महीना माना गया है, इस पूरे महीने में सभी मुसलमान रोजे रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि 610 ईसवी में पैगंबर मोहम्मद साहब पर लेयलत-उल-कद्र के मौके पर पवित्र कुरान शरीफ नाजिल हुई थी। तब से रमजान माह को इस्लाम में पाक माह के रूप में मनाया जाने लगा।हिजरी कैलेंडर के अनुसार, नौवां महीना रमजान का होता है। इस बार ये पाक महीना 12 अप्रैल से शुरू हो रहा है और 12 मई को खत्म होगा।
रमजान के महीने में, मुसलमान सुबह से सूर्यास्त तक रोजे रखते हैं। रोजे की शुरुआत से पहले 'सहरी' की जाती है, जो कि सूर्योदय से पहले होता है, जिसमें हर दिन सुबह तय समय पर भोजन किया जाता है। इसके बाद पूरे दिन कुछ भी नहीं खाया जाता और ना ही पानी पिया जाता है। 'सहरी' करने को 'सुन्नत' कहा जाता है। वहीं जब शाम के समय सूरज डूब जाता है तब रोजेदार रोजा खोलते हैं जिसे 'इफ्तार' कहा जाता है। एक महीने तक रोजे रखना का मतलब खुदा में यकीन रखना ,उसकी इबादत करना, खुद को संयमित और अनुशासन में रखना होता है।
आखिर रमजान कैसे शुरू होगा ?
अप्रैल माह से रमजान का पवित्र माह शुरू होने वाला है। सऊदी अरब की मक्का की चांद देखने वाली कमेटी इसको लेकर जल्द ही आधिकारिक ऐलान करेगी। भारत में, कर्नाटक और केरल राज्यों में चंद्रमा को देखा गया था। इसे पहली बार केरल के कोझिकोड में कप्पड और उसके बाद कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में देखा गया था।
रमजान में रोजा के नियम
हर दिन सुबह से रात तक पांच बार नमाज अदा करनी होती है। इसे फजिर, दुहर, असर, मगरिब और इशा की नमाज कहते हैं। रोजे की शुरुआत सूरज निकलने से पहले शुरू होता है, इस समय मुस्लिम लोग हल्का खाना खाते हैं जिसे 'सहरी' कहते हैं, जहां पूरे दिन व्रत रखने का संकल्प लिया जाता है। 'सहरी' के बाद रोजे की शुरुआत होती है और शाम को व्रत खोलने को 'इफ्तार' कहते हैं। 'सहरी' और 'इफ्तार' का निश्चित समय होता है। और लिस्ट के अनुसार ही 'सहरी' और 'इफ्तार कर सकते हैं हालांकि इस साल रमजान का जश्न कोरोना की वजह से हर बार की तुलना में अलग होगा।
क्या महत्व है ?
लोगों के सामने पहली बार पवित्र कुरान पवित्र रात 'लायलत अल कदर' के दिन आई थी। शास्त्रों के अनुसार इस पूरे महीने शैतान दोजख में बेड़ियों से बंधा रहता है, पवित्र माह के दौरान कोई भी आपके और अल्लाह के बीच नहीं आ सकता है। रोजा रखने का अर्थ है अपने ईमान को बनाए रखना। मन में आ रहे बुरे विचारों का त्याग करना। रोजे का अर्थ है अपने गुनाहों से तौबा करना। केवल अल्लाह की इबादत में समर्पित हो जाता है और ये आपका खुदा की शक्ति में भरोसा बढ़ाता है।