उत्तराखंड में इस साल MSP पर हुई गेहूं की रिकॉर्ड खरीद, 20 हजार से अधिक किसानों ने बेची अपनी फसल
देहरादून, जून 4। दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 6 महीने से अधिक समय से चल रहे किसान आंदोलन के बीच उत्तराखंड की तीरथ सिंह रावत सरकार ने गेहूं खरीद को लेकर नई उपलब्धि हासिल की है। दरअसल, 10 सालों में पहली बार राज्य में MSP पर की गई गेहूं की खरीद 14 लाख क्विंटल को पार कर गई है। राज्य में 20594 किसानों ने सरकारी खरीद केंद्रों में गेहूं बेचा है। पिछले साल यानी 2020-21 में सरकारी कीमत पर गेहूं बेचने के लिए महज 4656 किसान पहुंचे थे।

उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में किसान अच्छी संख्या में खरीद केंद्रों पर उमड़े तो सरकारी कीमत पर गेहूं की खरीद की तस्वीर ही बदल गई। हालांकि गेहूं की खरीद चालू रबी सत्र 2021-22 के लिए निर्धारित लक्ष्य से कम रही है। इस सत्र में कुल 22 लाख क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया था। प्रदेश में गेहूं की खरीद के लिए 241 केंद्र बनाए गए थे।
गेहूं उत्पादन के लिहाज से ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जिले से ही गेहूं की सबसे ज्यादा खरीद होती है। इन दो जिलों में भी ऊधमसिंह नगर का पलड़ा बहुत ज्यादा भारी रहता है। यूं तो सरकारी कीमत पर खरीद का मकसद किसानों को मदद करना है, ताकि उन्हें इससे कम कीमत पर गेहूं बेचने को बाध्य न होना पड़े। बाजार में ज्यादा कीमत मिलने की स्थिति में सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों की आमद कम होती है। इस बार गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपये प्रति क्विंटल रहा। प्रति क्विंटल 20 रुपये बोनस भी दिया गया।












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