Bihar: पूर्णिया अररिया कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य आचार्य गंगानाथ झा का दिल्ली में हुआ निधन
Acharya Ganganath Jha passes away: बिहार के पूर्णिया स्थित अररिया कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य आचार्य श्री गंगानाथ झा ने दिल्ली में अपनी अंतिम सांस ली । आचार्य गंगानाथ झा ने न केवल अररिया महाविद्यालय की संस्थापक प्राचार्य के रुप में अपना योगदान दिया, बल्कि संस्कृत तथा भारतीय संस्कृति के उन्नयन में अपनी अग्रणी भूमिका निभाई उनके इसी यश के लिए उनका पैतृक ग्राम सिरसिया कला ही नहीं, अपितु आस-पास का क्षेत्र भी उनकी पहचान के नाम का पर्याय बन गया।
आधुनिक और पाश्चात्य विद्या अध्ययन पद्धति से पारंगत वरिष्ठ शिक्षाविद् आचार्य झा के निधन पर जेएनयू के फैकेल्टी क्लब में एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। प्रार्थना सभा में एक भक्तिमय कीर्तन का भी आयोजन किया गया जिस शोकमय वातावरण में बहुचर्चित मैथिली कवि विद्यापति के हृदयग्राही गायन की भी प्रस्तुति की गयी।

प्रार्थना सभा में दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय , केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय , जामिया मिल्लिया इस्लामिया ( विश्वविद्यालय) ,वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग (सीएसटीटी) , भारत सरकार तथा अमेटी विश्वविद्यालय तथा केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली , दिल्ली आदि के संकाय सदस्यों तथा आकादमिक प्रशासक के अलावा स्थानीय गणमान्य लोगों तथा बुद्धिजीवियों के साथ साथ अनेक संस्कृत अनुरागियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। आचार्य झा की संतति परम्परा में इसके अतिरिक्त उनकी सुपुत्री, संमान्या मीरा , पुत्रवधु - ऋतु, बंदना तथा रश्मि और नाती -पोते आदि भी इस प्रार्थना सभा में समुपस्थित रहें ।
ध्यान देने वाली बात है कि आचार्य प्रो गंगानाथ झा ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय ,दरभंगा के अररिया कॉलेज में 18 वर्षों तक संस्थापक प्राचार्य के रूप में गौरवमयी सेवा प्रदान की है । वे भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, बिहार से सेवा निवृत्त हुए ।
गंगानाथ झा ने कहां से की थी पढ़ाई?
प्रो गंगानाथ झा न केवल पारंपरिक अध्ययन कर आचार्य - संस्कृत व्याकरण ( एम. ए.) की उपाधि प्राप्त की , बल्कि अपने समय के भारत का ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के रूप में नामचीन पटना विश्वविद्यालय, बिहार से संस्कृत में ही एम. ए . की उपाधि भी प्राप्त की । साथ ही साथ इसी लब्धप्रतिष्ठ विश्वविद्यालय से ही संस्कृत साहित्य की विधा में पीएच.डी की उपाधि से भी अलंकृत किये गये ।
झा के द्वारा लिखित चर्चित पुस्तक
प्रो झा के द्वारा लिखित चर्चित पुस्तक " प्राचीन संस्कृत का काव्य संसार " विद्या निधि प्रकाशन , दिल्ली ,2015) भी संस्कृत विद्वानों तथा अनुरागियों के लिए इसलिए भी पर्याप्त प्रतिष्ठा पायी है कि प्रो झा ने इसमें सुभाषित वचनों विशेष कर अज्ञात तथा सर्वथा ओझल लेकिन महत्त्वपूर्ण कवियों की रचनाओं का संकलन कर उनका बहुत ही सरल सरस तथा मन भावन हिन्दी अनुवाद भी प्रस्तुत किया है।
भारतीयशिक्षानीति -2020 में जो पहली बार भारतीय भाषाओं के अध्ययन अध्यापन पर बल दिया गया है ,उस लिहाज से यह अपनी अनुवाद धर्मिता के जरिए सृजन का एक नवोन्मेषी वितान भी रचता मालूम पड़ता है । देरिता कम से कम इस दृष्टि से तो जा़यज़ ही कहता है कि समीक्षा भी अपने आप में एक मूल रचना की तरह ही समादृत होनी चाहिए ।
प्रो गंगानाथ झा जी के इस अनूदित रचना संसार से संस्कृत पाठक समाज ओझल रचनाओं और उनके वैशिष्ट्य से रुबरु हो सकेंगे। इतना ही नहीं, उनके द्वारा लिखित " संगणक जनित संस्कृत धातु रुपावली "भी संस्कृत और कम्प्यूटर के सहकारी अनुसन्धान की दृष्टि से बहुत ही उपयोगी होगा ।
केन्द्रीयसंस्कृतविश्वविद्यालय ( सीएसयू) , दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेडी ने अपने संदेश में कहा है कि संमान्य प्राचार्य श्री गंगानाथ झा का संस्कृतमय जीवन निश्चित रुप से समाज के लिए प्रेरणास्रोत है । उनके द्वारा किये कार्य ,उच्च विचार , प्रेम तथा करुणा उच्चतर शिक्षा के क्षेत्रों में सदा प्रेरणा का कार्य करेगा
जेएनयू के संस्कृत प्राच्य विद्याअध्ययन केन्द्र के अध्यक्ष प्रो रजनीश कुमार मिश्र ने भी अपने शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि पुण्य श्लोक आचार्य झा संस्कृत और भारतीय संस्कृति के प्रबल संवाहक थे जिसकी पुष्टि उनकी वर्तमान सुसमृद्ध बौद्धिक संतति से भी होती है ।उनका जीवन हमलोगों के जीवन में सदा प्रेरणा का कार्य करेगा । इसी केन्द्र के पूर्वअध्यक्ष प्रो सुधीर कुमार ने भी अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की ।इसके अतिरिक्त अन्य लोगों ने भी अपनी श्रद्धांजलि सुमन अर्पित करते उनके यश की चर्चा करते अपनी संवेदना व्यक्त की।
ग़ौरतलब है कि आचार्य गंगानाथ झा के प्रथम सुपुत्र प्रो गिरीश नाथ झा , जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय के संस्कृत प्राच्यविद्या अध्ययन केन्द्र में वरिष्ठ आचार्य के रूप में सेवारत हैं जो इसी केन्द्र के पूर्व अध्यक्ष भी रहें हैं और वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग (सीएसटीटी), भारत सरकार के यशस्वी अध्यक्ष के कार्यभार का निर्वहन किया है।
आचार्य झा के पिता और परिवार
प्रो गिरीश नाथ झा ने अपने पिता जी आचार्य गगानाथ झा के साथ मिल कर पाणिनिव्याकरण को लेकर एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक भी लिखी है। दूसरे सुपुत्र , डा गौतम कुमार झा , जे एन यू के ही भाषा संस्थान तथा तृतीय सुपुत्र, प्रो भुवन कुमार झा , दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में कार्यरत हैं।
पैतृक निवास में संपन्न होगा अंतिम संस्कार
प्रो गिरीश नाथ झा ने बताया है कि उनके पिता का अंतिम संस्कार का क्रिया कर्म बिहार के उनके पैतृक गांव में संपन्न किया जाएगा । इसी सप्ताह रविवार को उनके पार्थिक शरीर का दिल्ली के निगम बोध घाट पर अन्तिम अन्त्योष्टि की गयी थी ।
झा के निधन पर शोक में डूबा पूर्णिया
उनके देहावसान पर उनके एक निकट संबंधी नन्दन ठाकुर ने कहा है कि उनके निधन पर उनके जनपद के लोगों में भी गहरी शोक की लहर है। सांसद प्रदीप कुमार सिंह तथा वरिष्ठ भाजपा नेता अजय झा के अलावा अनेक जन नायकों तथा समाज सेवियों ने भी उनके निधन पर शोक जताया है। साथ ही साथ केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के प्रकाशन विभाग के संयुक्त निदेशक प्रो अजय कुमार मिश्रा तथा अन्य विद्वानों तथा विदुषियों ने भी श्रद्धांजलि व्यक्त किया है ।
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