15th Jaipur Literature Festival: तीसरा दिन, इंदिरा नूयी और डेविड मिशेल के विचारशील संवाद
15th Jaipur Literature Festival: तीसरा दिन, इंदिरा नूरी और डेविड मिशेल के विचारशील संवाद
नई दिल्ली। 15वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आगाज 5 मार्च, शनिवार को हो गया। वर्चुअल प्लेटफॉर्म के जरिए जयपुर लिटरेचल फेस्टिवल की शुरुआत हुई, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े वक्ता, लेखक, उफन्यासकार, साहित्यकार अपनी विचारधाराओं को रखते हैं। 10 दिन तक चलने वाले इस साहित्व उत्सव मेंवक्ता अपने विचारों को रखते हैं, संवाद करते हैं।

पेप्सीको की पूर्व सीईओ, इंदिरा नूयी अपने संस्मरण, माई लाइफ इन फुल ( My Life in Full) के जरिए अपने जीवन से सफर, अपने धैर्य, दृढ़ संकल्प की चर्चा की। उन्होंने अपने उस सफर की बात की, जिसमें उन्होंने तमाम रूढ़िवादी विचारधाराओं को तोड़कर , लिंग और नस्ल की बाधाओं को पार कर ग्लोबल बिजनेस लीडर का खिताब हासिल किया। नूयी ने अपने संस्मरण में एक कामकाजी मां की भूमिका के साथ-साथ 21वीं सदी की समृद्धि के लिए अपने प्रयासों की झलक प्रस्तुत की है। उन्होंने इस किताब में अपनी शानदार कॉर्पोरेट यात्रा को भी दिखाया हो। लेखक अपर्णा राजे के साथ बात करते हुए नूयी ने अपने सफर की, अपनी विचारधारा की बात की। 15वां जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल: दूसरे दिन रूपर्ट एवरेट, जियोर्जियो के होंगे महत्वपूर्ण सेशन
डेविड मिशेल, एक ब्रिटिश-आइरिश उपन्यासकार के साथ-साथ टीवी राइटर और स्क्रीनराइटर हैं। शमी बसु के साथ बात करते हुए डेविड ने अपनी नई किताब उतोपिया एवेन्यू ( Utopia Avenue) के बारे में बात की। इस किताब में 1960 के ब्रिटिश रॉक बैंड उतोपिया के बारे में बात की है। अपनी लेखनी के जरिए डेविड इस किताब के रीडर्स को साइकेडेलिक युग में ले जाते है। इस किताब में उन्होंने संगीत के ताकत की बात की है।
इन महान कथाकारों, उपन्यासकारों के अलावा यहां दर्शकों को ऐसे कई स्पीकर्स, लेखकों को सुनने का मौका मिलेगा, जिन्होंने भारत-बंग्लादेश के बीच रिश्तों, सामाजिक-राजनीतिक, सभ्यता, आर्थिक प्रगति, दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने का काम किया है। इन लेखकों, कथाकारों, उपन्यासकारों ने दोनों देशों के बीच की विविधता के साथ-साथ बंग्लादेश के मुक्ति संग्राम के 50 सालों को दर्शाया है।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 15वें संस्करण के अन्य सत्र में नोबेल पुरस्कार विजेता डैनियल कन्नमैन, न्यूयॉर्क टाइम्स बेस्ट सेलिंग लेखक और एकेडमिक प्रोफेसर ओलिवियर सिबोनी और लीगल स्कॉलर कैस आर सनस्टीन से जुड़ेंगे और बताएंगे कि कैसे और क्यों मनुष्य निर्णय लेते वक्त अतिसंवेदनशील हो जाता है और ऐसे वक्त में हमें क्य़ा करना चाहिए। इस विस्तृत सत्र में हमारे मानसिक स्वास्थ्य के साथ महामारी की लगातार विकसित और इसके प्रकृति की जांच को लेकर चर्चा की जाएगी।
Day 2 राउंडअप
वहीं दूसरे दिन बेस्ट सेलिंग किताबों के लेखकों ने अपनी विचारधारा को रखा। Our Bodies, Their Battlefield: What War Does to Women और I am Malala के अलावा क्रीसीना लैम्ब के साथ Looking for the Enemy: Mullah Omar and the Unknown Taliban के लेखक बेटर डैम ने वॉर जोन के बारे में दर्शकों को बताया। इस सेशन में लेखकों ने युद्ध और युद्धग्रस्त देश के नागरिकों की स्थिति के बारे में बात की। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, डेलरिम्पल ने कहा, बेट्टी डैम और क्रिस्टीना लैम्ब दोनों ने बहुत बहादुरी से अफगानिस्तान में संघर्ष की पूरी कहानी को कवर किया । लैम्ब ने यूक्रेन और अफगानिस्तान में NATO की असफलता को दर्शाया । उन्होंने बताया कि यूक्रेन में कई महिला फाइटर्स हथियार के साथ दिखें, जो अफगानिस्तान में देखने को नहीं मिला। वहीं हार्वर्ड में मनोविज्ञान के प्रोफेसर स्टीवन पिंकर ने अपनी नई किताब राशनलिटी: व्हाट इट इज़, व्हाई इट सीम्स स्कार्स, व्हाई इट मैटर्स पर चर्चा की।
इसके अलावा इतालवी भौतिक विज्ञानी प्रोफेसर जियोर्जियो पेरिस ने अपनी नवीनतम पुस्तक 'इन फ्लाइट ऑफ स्टार्लिंग्स: द वंडर्स ऑफ कॉम्प्लेक्स सिस्टम्स' के बारे में बात की। इस पुस्तक मौलिक प्रश्न पूछती है आखिर कैसे विचार कैसे पैदा होते हैं और समाज में विज्ञान का क्या अर्थ है? वहीं कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कार्नेगी मेलन, मिलन वैष्णव के साथ अपनी लेटेस्ट किताब '10 फ्लैशप्वाइंट' के बारे में बात की। जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल वेबसाइट












Click it and Unblock the Notifications