गोल्ड मेल्डलिस्ट मनु भाकर क्यों मांगे माफी, खेल मंत्री अनिल विज क्यों नहीं?

नई दिल्ली। अनिल विज हरियाणा के खेल मंत्री हैं। महिला खिलाड़ी के साथ उनका सलूक चर्चा में है। उस महिला खिलाड़ी ने महज ट्वीट कर खेल मंत्री को उनके वादे की याद दिलायी थी, जिसके जवाब में अनिल विज ने एक के बाद एक ट्वीट की फायरिंग ही कर डाली।

मनु भाकर क्यों मांगे माफी, मंत्री अनिल विज क्यों नहीं?

विज की भाषा में तिरस्कार, दुर्व्यवहार, अहंकार

निशानेबाज खिलाड़ी खेलमंत्री के ट्वीट्स के निशाने से घायल है। वजह है अनिल विज का व्यवहार और खिलाड़ी के प्रति नफ़रत का व्यवहार। यह खेल और खिलाड़ी दोनों का तिरस्कार भी और एक महिला खिलाड़ी से दुर्व्यवहार भी। बेवजह का अहंकार भी अनिल विज की भाषा में दिख रहा है।

विज ने राहुल को बताया था ‘निपाह वायरस’

विज ने राहुल को बताया था ‘निपाह वायरस’

खुद अनिल विज विवादों से पुराना नाता रहा है। इसके बजाए यह कहना सही होगा कि विवादों के वे जन्मदाता रहे हैं। एक के बाद एक विवाद सिर्फ अपने बयान से वे पैदा करते रहते हैं। कभी महात्मा गांधी का अपमान, कभी ताजमहल के बहाने अल्पसंख्यकों का; कभी राजनीतिक विरोधियों का नाम लेकर, तो कभी बिना नाम लिए ही अपमान; और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को तो उन्होंने निपाह वायरस ही बता डाला था।

युवा खिलाड़ी ने वादा याद दिलाया तो चिढ़ गये विज

युवा खिलाड़ी ने वादा याद दिलाया तो चिढ़ गये विज

मगर, इस बार अनिल विज ने एक युवा महिला खिलाड़ी को लताड़ा है। उस खिलाड़ी को, जो अभी वोट देने के लायक भी नहीं हुई है। वह महज अनिल विज को उनका वादा याद दिला रही थी। बिल्कुल, आपका अंदाजा सही है। यूथ ओलम्पिक की गोल्ड मेडलिस्ट मनु भाकर की ही चर्चा हो रही है।

विज ने पहले भी दिए हैं चौंकाने वाले बयान

विज ने पहले भी दिए हैं चौंकाने वाले बयान

हरियाणा के खेल मंत्री ने इस युवा आइकॉन को जिस तरह से अपमानित किया है, वह संवेदनशील समाज को चौंकाती है। मगर, जब आप अनिल विज से परिचित हो जाते हैं तो बात चौंकाने वाली नहीं रह जाती है। पिछले दो साल में अनिल विज के हम पांच ऐसे बयानों की आपको याद दिला रहे हैं जिसे विवादास्पद माना गया है-

• 14 जनवरी 2017 : महात्मा गांधी की वजह से नोटों का अवमूल्यन हुआ है। अब धीरे-धीरे नोटों पर से भी हटेंगे गांधी।

• 14 जनवरी 2017 : मोदी ज्यादा बड़े ब्रांड नेम हैं। उनके नाम से खादी की बिक्री में 14% का इजाफा हुआ है।

• 20 अक्टूबर 2017 : ताजमहल एक खूबसूरत कब्रिस्तान है।

• 5 नवंबर 2017 : 100 कुत्ते मिलकर भी एक शेर का मुकाबला नहीं कर सकते। गुजरात चुनाव में भाजपा जीतेगी।

• 30 मई 2018 : राहुल गांधी निपाह वायरस की तरह हैं जो पार्टी को तबाह कर देंगे और जो भी उनके संपर्क में आएगा, उसे नष्ट कर देंगे।'

विज ने कभी गलतबयानी पर माफी नहीं मांगी

विज ने कभी गलतबयानी पर माफी नहीं मांगी

अनिल विज ने कभी अपने बयानों के लिए माफी नहीं मांगी। मगर, एक युवा, प्रतिभावान, यूथ ओलम्पिक विजेता महिला खिलाड़ी से माफी मांगने के लिए कह रहे हैं। जानते हैं क्यों? क्योंकि मनु भाकर ने अनिल विज को उनके ही ट्वीट की इमेज लगाकर ट्वीट कर दिया! याद दिलाया कि हरियाणा के मंत्री के तौर पर अक्टूबर 2018 में उन्होंने तब 2 करोड़ रुपये देने की घोषणा मनु भाकर के लिए की थी। आपको मनु भाकर की ओर से अंग्रेजी में लिखे ट्वीट के हिन्दी अनुवाद से रू-ब-रू कराते हैं-

"सर, प्लीज कंफर्म करें, अगर ये सही है तो....या फिर सिर्फ जुमला है।"

‘जुमला’ शब्द से चिढ़ गये विज?

‘जुमला’ शब्द से चिढ़ गये विज?

इसमें एक शब्द जरूर चुभने वाली नज़र आती है। शायद इसी शब्द ने अनिल विज का मूड खराब कर दिया हो। यह शब्द है ‘जुमला'। भारतीय राजनीति में यह ‘हॉट केक' की तरह बाज़ार में बिक रहा है जिस पर बीजेपी के नेताओं को आपत्ति रहा करती है। मगर, ऐसा कभी नहीं देखा गया कि बीजेपी के किसी नेता ने ‘जुमला' शब्द का इस्तेमाल करने पर किसी का अपमान किया हो।अनिल विज ने खुलकर अपनी राय भी रखी और खिलाड़ियों से अपेक्षा भी,

"खिलाड़ियों में एक तरह का अनुशासन होना चाहिए। भाकर को इस विवाद को पैदा करने के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने अभी बहुत आगे जाना है, उन्हें अपने खेल पर फोकस करना चाहिए।"

- अनुशासन क्या एक खिलाड़ी में ही होना चाहिए? क्या खुद अनिल विज में नहीं होना चाहिए जिन्होंने मंत्री बनने के बाद अनुशासन तोड़ने का भी रिकॉर्ड बना डाला है?

- भाकर को माफी मांगनी चाहिए- क्यों? क्या खेल मंत्री को उनका वादा याद दिलाना गलत है? क्या अपने लिए राज्य सरकार की ओर से घोषित इनाम नहीं मिलने पर उसकी खोज-ख़बर लेना गलत है?

- भाकर को अभी बहुत आगे जाना है। क्या इसके लिए शर्त है चुप रहना? ईमान की बात दबा देना क्या इसके लिए जरूरी है?

खेल पर फोकस भाकर करती रही हैं। इसी वजह से वह यूथ ओलम्पिक की गोल्ड मेडलिस्ट बन पायी। इसके लिए घर वालों ने, कोच ने और दूसरे मददगारों ने पर्याप्त ध्यान दिया है। वे हैं खेल पर फोकस देखने के लिए। क्या खेलमंत्री अपने काम पर, अपनी घोषणा या वादे पर फोकस करेंगे?

विज ने कुछ और बातें भी लिखीं,

" मनु भाकर को पब्लिक के सामने ये बात रखने से पहले स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट से कंफर्म करना चाहिए था। जो सरकार देश में सबसे ज्यादा ईनाम देती है उस राज्य सरकार की इस तरह आलोचना करना बहुत ही खराब बात है। जो मैंने 2 करोड़ की बात की थी भाकर को वो पैसे मिल जाएंगे।"

पीयूष, सुषमा या फिर मोदी ने भी कभी किसी को ट्वीट से नहीं रोका

पीयूष, सुषमा या फिर मोदी ने भी कभी किसी को ट्वीट से नहीं रोका

ट्विटर के जमाने में चलती ट्रेन से भी ट्वीट कर रेलमंत्री से मदद मांगी जाती है और वे मदद करते हैं। कभी रेलमंत्री की ओर से यह हिदायत रेल यात्रियों को भी नहीं दी गयी कि वे उन तक बात पहुंचाने से पहले रेलमंत्रालय में बात करें।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तो उदाहरण हैं जिन्होंने किसी के एक ट्वीट पर, एक फोन पर देश से बाहर फंसे भारतीयों को मदद पहुंचायी है। उन्होंने कभी नहीं ये कहा है कि पहले विदेश मंत्रालय में सम्पर्क करना चाहिए था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर लोगों की राय लेते रहते हैं। उन्हें मन की बात में भी जगह देते हैं। ऐसे में एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जिस पर देश को गर्व है, उसने अपने प्रदेश के मंत्री से सीधे कुछ पूछ लिया, तो वह गुनाह हो गया?

मनु भाकर ने अक्टूबर, 2018 में अर्जेंटीना में यूथ ओलंपिक के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में गोल्ड जीता था। वह शूटिंग में सबसे कम उम्र में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। उनसे ट्वीट करने का अधिकार भी खेल मंत्री छीन लेना चाहते हैं?

खुद विज ने पुरस्कार राशि पर भी की थी सियासत

खुद विज ने पुरस्कार राशि पर भी की थी सियासत

अनिल विज ने जब 2 करोड़ ईनाम की राशि देने का वादा किया था, तब उन्होंने इसका श्रेय लूटने की भी कोशिश की थी। उन्होंने कहा था, "पुरानी सरकारें सिर्फ 10 लाख रुपये दिया करती थीं।" आप मनु भाकर के नाम इनाम की घोषणा कर पुरानी सरकार को कोसें, तो वह अनुशासन है। जब उसी बात की याद दिलाए मनु भाकर, तो वह अनुशासनहीनता है! आप खेलमंत्री होकर खेल की उपलब्धि पर राजनीति कर सकते हैं, मगर उपलब्धि हासिल करने वाली महिला खिलाड़ी अपने लिए आवाज़ भी नहीं उठा सकती?

(ये लेखक के निजी विचार हैं।)

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