Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Naini Lake: टल गया नैनी झील पर आया संकट

नैनीताल ने राहत की सांस ली है। सूखा ताल नामक झील को सौंदर्यीकरण के बहाने कंक्रीट से पाट देने की योजना के कारण नैनी झील पर जो संकट उत्पन्न हुआ था, फिलहाल उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले के कारण वह टल गया है।

sukhatal

प्रकृति पूरक की तरह काम करती है। एक से लेती है तो दूसरे को दे देती है। प्रकृति का यही पूरक स्वरूप नैनीताल में दिखता है। जिस नैनी ताल या नैनी झील को देखने के लिए देश दुनिया के पर्यटक यहां पहुंचते हैं, उसका अस्तित्व सूखा ताल पर निर्भर है। एक और ताल जो ऊंचाई पर है, वह अपना सारा पानी नैनी झील में उड़ेल देता है और खुद सूखा रहकर नैनी झील को सालभर जल से भरकर रखता है।

नैनी झील पर मंडराता संकट टला !

लेकिन मनुष्य की सीमित बुद्धि प्रकृति जैसी उदार व्यवस्था कहां अपना पाती है? इसलिए नैनी झील को पानी से भरने वाले सूखा ताल के सुन्दरीकरण की एक ऐसी योजना तैयार की गयी कि सूखा ताल से नैनी झील का संपर्क ही कट जाता। हालांकि कुछ सतर्क नागरिकों और उत्तराखंड हाईकोर्ट की सक्रियता से नैनी झील पर आया यह संकट फिलहाल टल गया है।

बरसात के बाद सूखी रहती है झील

नैनी ताल के जलग्रहण क्षेत्र में स्थित सूखा ताल का जलग्रहण क्षेत्र करीब 23 हजार वर्ग मीटर में फैला है और यह करीब एक किलोमीटर दूर स्थित नैनीताल में जल-भरण का मुख्य जरिया रहा है। इसका नाम सूखा ताल पड़ने का कारण ही यही है कि इसमें आया पूरा पानी नैनी ताल में चला जाता है, बरसात के बाद पूरे साल यह झील सूखी रहती है।

sukhatal

पर्यावरणविदों की चिंता गहराई

पिछले साल मई महीने में सरकार ने सूखा ताल के सौंदर्यीकरण की योजना पर काम शुरु किया। इसके लिए आईआईटी, रुड़की से प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कराई गई थी। परियोजना पर 25.51 करोड़ खर्च होने थे। इसके अंतर्गत अन्य कार्यों के अलावा झील के चारों ओर बाड़ लगाई जानी थी और पैदल टहलने के लिए रास्ता बनना था। इसके साथ ही झील के तल में कंक्रीट की ढलाई भी होनी थी ताकि झील में पूरे वर्ष पानी टिक सके, रिसकर कहीं जा न सके। इससे पर्यावरणविद चिंतित हो गए। उन्हें लगा कि कंक्रीट का तट बनने से झील में पानी की आवक कम हो जाएगी और नैनी झील में पानी जाना भी बंद हो जाएगा।

आजीविका पर भी असर पड़ेगा

चिंतित नागरिकों व पर्यावरण प्रेमियों ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। नागरिकों ने परियोजना को गैरजरूरी ठहराया था। उन्होंने कहा कि यह अवैज्ञानिक तो है ही, इससे नैनी झील की पारिस्थितिकी नष्ट होगी और नैनीताल निवासियों की आजीविका पर भी असर पड़ेगा।

Recommended Video

    Uttarakhand Rain: भारी बारिश से Haridwar की सड़कें हुईं जलमग्न | वनइंडिया हिंदी | *Shorts

    हाईकोर्ट ने परियोजना पर रोक लगाई

    अदालत ने 104 नागरिकों के हस्ताक्षर वाले पत्र को याचिका मानकर 2022 के मार्च महीने में जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी। वरिष्ठ अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता को अदालत की सहायता करने के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया। पूरी सुनवाई के बाद इसे 'विकास के नाम पर विध्वंस' ठहराते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विपिन सांघी ने 22 नवंबर को पूरी परियोजना पर रोक लगा दी।

    सरकार की सफाई खारिज

    हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि परियोजना के अंतर्गत झील के तल पर कंक्रीट नहीं डाला जाना है। केवल तटों पर जियोसिंथेटिक की बाड़ लगाई जानी है। फैक्टरी में बने हाइड्रोलिक बैरियर भी लगाए जायेंगे जो सतह को पूरी तरह अवरुद्ध नहीं करेंगे। लेकिन अदालत ने सरकार की ओर से आई सफाई को नहीं माना।

    झील के तल में कंक्रीट की ढलाई

    जिला स्तरीय विकास प्राधिकारण के सचिव पंकज कुमार उपाध्याय ने संवाददाताओं से कहा कि आरंभिक योजना में झील के एक हिस्से के तल में कंक्रीट की ढलाई करना शामिल था, पर स्थानीय नागरिकों के साथ बैठक के बाद इसे नहीं करने का फैसला हुआ। बैठक के बाद हमने एक बार फिर आईआईटी रुड़की से संपर्क किया और उनकी सलाह पर योजना में आवश्यक फेरबदल किया गया। इसके अनुसार कंक्रीट के बजाए जियोसिंथेटिक क्ले लगाया जाना था। यह आरंभ हुआ तब तक अदालत का फैसला आ गया और पूरा काम रुक गया।

    झील के साथ छेड़छाड़ बहुत खतरनाक

    अदालत में सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कहा कि झील के तल में अभेद्य सामग्री लगाना अनुचित है। वैज्ञानिक संस्थाओं ने इसे करने से मना किया है। नैनीताल के रिटायर्ड प्रोफेसर चारु चंद्र पंत जो कुमाऊं यूनिवर्सिटी में भूगर्भशास्त्र के प्रोफेसर रहे हैं। उनका भी कहना है कि यह पूरा इलाका पारिस्थितिकी के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। इसके साथ छेड़छाड़ बहुत खतरनाक हो सकती है। सूखाताल ऊंची जगह पर स्थित है, इसलिए नैनी झील के लिए जल-भरण का काम करती है।

    sukhatal

    हर प्रकार के अतिक्रमण को हटाने आदेश

    बरसात के अलावा बाकी महीनों में सूखा रहने से पिछले तीन-चार दशक से स्थानीय लोगों ने इसमें कचरा फेंकना शुरु कर दिया है। यह असली समस्या है जिसे रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। हाईकोर्ट ने जरूर झील के क्षेत्र से हर प्रकार के अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया है। इनमें निर्माण सामग्री का कचरा फेंका जाना भी शामिल है।

    संकट में नैनीताल की पारिस्थितिकी

    नैनीताल की पारिस्थितिकी बेहद क्षणभंगुर है। किसी छेड़छाड का पारिस्थितिकी पर खराब असर पड़ सकता है। विशाल सिंह की अगुवाई में वर्ष 2014 में शोधकर्ताओं की एक टीम ने इलाके का अध्ययन किया था और सूखाताल को नैनी ताल में जल-भरण का प्रमुख स्रोत के रूप में चिन्हित किया था। इस समय उन्होंने कहा था कि इसमें कोई भी हस्तक्षेप केवल तभी किया जाना चाहिए जब बहुत आवश्यक हो गया हो। मगर सरकार ने सौंदर्यीकरण की ऐसी योजना तैयार कराई जिससे नैनीताल की पारिस्थितिकी नष्ट हो सकती है।

    नैनीताल में पर्यटकों की ओवरलोडिंग से बचना जरूरी

    प्रशासन सूखाताल को सजावटी जलाशय में बदल देना चाहता है जिससे पर्यटक आकर्षित हो सके। परन्तु नैनीताल आने वाले पर्यटक इस बनावटी जलाशय से आकर्षित होंगे, यह कोरी कल्पना है। वैसे ही नैनीताल पर्यटकों को संभालने में परेशान रहता है, उसे और अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने की जरूरत नहीं है।

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+