Team India: नजर न लगे टीम इंडिया को
इंडिया.. इंडिया का शोर... स्टेडियम में जश्न मनाते 65,000 क्रिकेट फैंस और उड़ान भरती टीम इंडिया। कोलकाता के ऐतिहासिक ईडेन गार्डन्स पर रविवार को ऐसी तस्वीरों को दुनिया भर में लोगों ने देखा। आखिर ऐसा होता भी क्यों ना? दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज बचते भी तो किस-किस गेंदबाज़ से? उनकी मुश्किल ये रही कि अगर वे जसप्रीत बुमराह की बुलेट की रफ्तार से आती गेंदों से बचे तो मोहम्मद सिराज की स्विंग करती गेंदें और मोहम्मद शमी की आंधी उन्हें उड़ा ले गई।
वहीं जो अफ्रीकी बल्लेबाज भारतीय रफ्तार के सौदागरों से बच गए, उनका फिरकी के फनकारों रवीन्द्र जडेजा और कुलदीप यादव ने काम तमाम कर दिया। भारतीय गेंदबाज़ी आक्रमण के इसी अंदाज की वजह से दुनिया अब सवाल पूछने लगी है कि क्या ये अब तक का सबसे घातक भारतीय गेंदबाज़ी अटैक है?

दुनिया भर के क्रिकेट के जानकारों और अफ्रीकी टीम के फैन्स के लिए इस बात को हजम करना थोड़ा मुश्किल है कि ये वही टीम है जिसने भारत के खिलाफ मुकाबले से पहले खेले अपने 7 मैचों में से 4 मैचों में हर बार 350 रनों से ज्यादा का स्कोर बनाया।
लोगों को यकीन नहीं हो रहा था कि ईडेन गार्डन्स के जिस विकेट पर कुछ देर पहले विराट कोहली ने शतक जड़कर सचिन तेंदुलकर के 49 वनडे शतकों की बराबरी की, उसी पर अफ्रीकी बल्लेबाज सरेंडर कर देंगे। अफ्रीकी टीम ने 27 ओवर और एक गेंद पर कुल 83 रनों के स्कोर पर घुटने टेक दिए। टेम्बा बवुमा और उनके सारे साथी उतने रन भी नहीं जोड़ पाए, जितने कि भारतीय टीम ने पहले पावर प्ले में बनाए थे। पहले पावरप्ले यानी पहले दस ओवरों में भारतीय टीम ने स्कोर बोर्ड पर 91 रन जोड़े।
भारतीय गेंदबाज़ों के आक्रमक तेवरों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टूर्नामेंट में अब तक खेले आठ मैचों में कोई भी टीम, भारत के खिलाफ 300 रन के स्कोर तक नहीं पहुंच सकी है।
भारत ने विश्व कप टूर्नामेंट में जो पांच गेंदबाज टीम में शामिल किए, उनमें से हर गेंदबाज विश्वस्तरीय है। इन गेंदबाज़ों की अपनी-अपनी खूबी उन्हें खास बनाती है। हालांकि इस विश्व कप में जो खास बात देखने को मिली वो ये कि मैदान पर अलग-अलग गेंदबाज़ों का चेहरा नहीं बल्कि एक गेंदबाज़ी यूनिट दिखाई दे रही है।
वैसे स्पिनरों को हमेशा से ही भारतीय गेंदबाज़ी की ताकत आंका जाता रहा है। घरेलू मैदानों पर उनकी ताकत और अहमियत और भी बढ़ जाती है। लेकिन जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और मोहम्मद शमी की तेज गेंदबाज़ों की तिकड़ी ने विश्व कप टूर्नामेंट में भारतीय गेंदबाज़ी की नई परिभाषा लिखी। उनका अंदाज़ ऐसा दिख रहा है, मानों वे भारतीय विकेटों पर नहीं बल्कि तेज़ गेंदबाज़ों के मददगार माने जाने वाले इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया के तेज और उछाल भरे विकेटों पर गेंदबाज़ी कर रहे हों।
टूर्नामेंट में अब तक खेले गए मुकाबलों में टीम इंडिया के तीनों तेज़ गेंदबाज़ एक दूसरे का बखूबी साथ निभाते दिखे हैं। मिसाल के तौर पर दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच को ही लीजिए। जसप्रीत बुमराह ने पहले ओवर से ही जिस तरह से दबाव बनाकर धारदार गेंदबाज़ी की नींव रखी उस पर मोहम्मद सिराज और मोहम्मद शमी ने विकेट हासिल कर जीत की इमारत खड़ी करने में ज़रा भी देर नहीं लगाई। मैच में बुमराह के खाते में भले ही कोई विकेट नहीं आया लेकिन शमी ने दो और सिराज ने एक विकेट हासिल कर एक बार फिर कामयाबी की कहानी लिख दी।
हालांकि अफ्रीका के खिलाफ सबसे कामयाब तो अपनी फिरकी का जादू दिखाने वाले रवींद्र जडेजा रहे, जिन्हें कप्तान रोहित शर्मा ने पहले पावर प्ले में नई गेंद सौंपी थी। अपने कप्तान के इस भरोसे को जडेजा ने पांच विकेट हासिल कर कायम रखा।
वैसे भारतीय गेंदबाज़ों के पैनेपन का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुमराह, शमी और जडेजा टूर्नामेंट के टॉप टेन गेंदबाज़ों में शामिल हैं। अगर तेज गेंदबाज़ों की तिकड़ी की बात करे तो तीनों मिलकर आठ मैचों में कुल 41 विकेट ले चुके हैं। बुमराह के नाम 15, शमी के नाम 16 और सिराज के नाम 10 विकेट दर्ज हैं। मोहम्मद शमी के नाम तो अब विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड भी दर्ज हो चुका है। शमी के नाम अब विश्व कप के 15 मैचों में 47 विकेट का रिकॉर्ड है। दो मैचों में तो उन्होंने पांच-पांच विकेट चटकाए हैं।
जिस भारतीय बल्लेबाज़ी को दुनिया भर में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, उसे अगर विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में मैदान पर बेहतरीन और आग उगलते गेंदबाज़ों का साथ मिले तो ये सोने पे सुहागा है। क्विंटन डि कॉक, एडेन मारक्रम और डेविड मिलर जैसे धुरंधर बल्लेबाज़ों से लैस अफ्रीका टीम को धराशाई कर विश्व कप के ही नहीं बल्कि भारत के खिलाफ वनडे क्रिकेट के न्यूनतम स्कोर पर रोकना इन गेंदबाज़ों की काबिलियत की कहानी बयां करता है। वैसे भारत के खिलाफ 243 रन की ये हार साउथ अफ्रीका की वनडे मैचों में सबसे बड़ी हार भी है। पहली बार साउथ अफ्रीका को वनडे में 200 या इससे ज्यादा रनों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। अफ्रीकी टीम के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ नहीं हो सकता।
भारतीय टीम बुलंदी पर हो और पाकिस्तान को मिर्ची न लगे, ऐसा भला कहां हो सकता है? पाकिस्तान के कई पूर्व क्रिकेटरों ने टीम इंडिया के गेंदबाज़ों को मिल रही कामयाबी में भी खोट ढूंढ लिया है। उन्हें तो इसमें भी साज़िश नज़र आ रही है। विश्व कप टूर्नामेंट में भारतीय पेसरों की खौफनाक गेंदबाज़ी देखकर पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर हसन रजा आरोप लगा रहे हैं कि आईसीसी और बीसीसीआई सांठ-गांठ कर भारतीय गेंदबाज़ों को दूसरी टीमों से अलग ऐसी गेंद दे रहे हैं जिससे ज्यादा स्विंग मिलती है। हसन रजा की दलील है कि जिस पिच पर भारतीय पेसर गेंद को दोनों तरफ मूव करा रहे हैं, उसी पर बाकी टीमों के गेंदबाज़ों की गेंदें सीधी निकल रही हैं। हसन रजा जैसे पूर्व क्रिकेटर के मुंह से ऐसी बातें बेतुकी और बचकानी लगती हैं लेकिन ये बताता है कि कैसे पाकिस्तान में भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों का खौफ चल रहा है।
इस खौफ की वजह भी है। भारत ने मौजूदा टूर्नामेंट में अब तक खेले आठ में से पांच मैचों में बाद में बल्लेबाज़ी कर जीत हासिल की जबकि बाकी तीन मुकाबलों में पहले बल्लेबाजी कर जीत मिली। भारत को इंग्लैंड के खिलाफ 100 रनों से, श्रीलंका के खिलाफ 302 रनों से और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 243 रनों से मिली जीत में भारतीय तेज़ गेंदबाज़ों का दमखम साफ तौर पर दिख रहा है।
वैसे हसन रजा शायद ये भूल गए कि मेहनत, लगन और विजन नाम की भी चीजें होती है, जो हर नामुमिकन को मुमकिन बना देता है। भारतीय तेज़ गेंदबाज़ हों या फिर स्पिनर, विश्व कप मुकाबलों में उन्हें मैदान पर मिल रही कामयाबी एक दिन की नहीं बल्कि पिछले डेढ़-दो साल की कड़ी मेहनत और बेहतरीन प्लानिंग का नतीजा है। वो शायद ये बात भूल गए कि भारतीय कोच राहुल द्रविड़ और बाकी सपोर्ट स्टाफ ने कैसे हर खिलाड़ी के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में पसीना बहाया है, हर खिलाड़ी को उसका रोल समझाया है, उसे भरोसा दिलाया है कि वो टीम इंडिया के लिए मैच विनर है। खिलाड़ी चाहे प्लेइंग इलवेन का हिस्सा हो या फिर वो बेंच पर बैठा हो, उसके अंदर की असुरक्षा की भावना को बाहर निकालकर टीम की जीत के लक्ष्य का मंत्र उसके अंदर भरा गया है। इसका असर मैदान पर देखने को मिलता है।
मैदान पर गेंदबाज़ कोई भी उतरें, वो एक दूसरे की हौसला अफजाई करते, बेहतर लेंथ के साथ गेंदबाज़ी के लिए मनोबल बढ़ाते और कप्तान के भरोसे पर खरे उतरने की सीख देते दिखते हैं। नतीजा अब दुनिया के सामने है।
टीम इंडिया अब सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है। विश्व विजेता बनने के लिए बस दो कदमों का फासला तय करना है। भारतीय टीम को चैंपियन बनाने के हर लक्षण गेंदबाज़ों और बल्लेबाज़ों में नज़र आ रहे हैं। हालांकि कहा जाता है कि अनिश्चितताओं से भरे क्रिकेट के खेल में भविष्यवाणी करने से बचना बेहतर है। दक्षिण अफ्रीका से जीत के बाद ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा भी कहते दिखे कि- 'जो रिकॉर्ड बन रहे हैं, वे हमारे लिए अच्छे हैं, तो ऐसे ही रहने दीजिए। नज़र मत लगाना किसी को।' क्रिकेट फैन भी दुआ कर रहे हैं कि टीम इंडिया को किसी की नज़र न लगे और 12 साल बाद वनडे का विश्व कप फिर हमारा हो।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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