Sachin Pilot Dharna: पायलट का धरना, वसुंधरा के नाम पर गहलोत के खिलाफ
कांग्रेस के विधायक न 2020 में सचिन पायलट के साथ थे, न आज हैं। इतने विधायक भी साथ नहीं हैं कि गहलोत सरकार गिरा सकें या अपनी खुद की पार्टी बना सकें।

Sachin Pilot Dharna: राजस्थान की सियासत का पारा चढ़ने लगा है| भाजपा में वसुंधरा राजे को लेकर पर्दे के पीछे से धूप-छाँव का खेल चल रहा है, लेकिन कांग्रेस में तलवारें म्यानों से बाहर आ गई हैं| पार्टी को 48 घंटे का नोटिस देकर सचिन पायलट धरने पर बैठ गए हैं| कुछ दिन पहले तक माना जा रहा था कि उन्होंने हालात से समझौता कर लिया है| फैसला आलाकमान पर छोड़ दिया है| लेकिन उनके मन में कुछ और चल रहा था|

जो उन्होंने कुछ दिन पहले यह कह कर प्रकट किया था कि 25 सितंबर को जिन कांग्रेसी विधायकों ने आलाकमान की बुलाई बैठक के समानांतर बैठक बुलाई थी, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए| तो यह गुस्सा अशोक गहलोत के खिलाफ नहीं था, बल्कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ था| यह एक चेतावनी भी थी कि वह कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में जा सकते हैं| मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने उनकी चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया|
अब अचानक सचिन ने तीन धारी तलवार चला दी, तलवार दोधारी ही होती है, लेकिन राजनीति में कुछ भी संभव है| उन्होंने एक ही तीर से कई निशाने साध लिए| उन्होंने यह कहते हुए एक दिन के धरने पर बैठने का एलान किया था कि साढ़े चार साल बीत गए, लेकिन अशोक गहलोत ने पिछली वसुंधरा सरकार के घोटालों की जांच नहीं करवाई| सचिन पायलट के इस फैसले से राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सुखजिंदर सिंह रंधावा की सिट्टी पिट्टी गुल हो गई|
कांग्रेस ने सचिन के इस हमले से निपटने के दो तरीके अपनाए| दिल्ली में जयराम रमेश ने अशोक गहलोत की तारीफों के पुल बांधे और पंजाब में बैठे रंधावा ने सचिन पायलट के खिलाफ बयान दिया| उन्होंने कहा कि सचिन पायलट से उनकी बीस मीटिंगे हुई , लेकिन उन्होने किसी भी मुलाक़ात में यह मुद्दा तो कभी उठाया ही नहीं था| कोई बात थी तो मिल बैठ कर हल निकालना चाहिए था, उन्होंने अशोक गहलोत की ओर से भाजपा के कुछ नेताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई का हवाला भी दिया| कुल मिला कर उनकी लाईन भी गहलोत समर्थक थी| लेकिन पर्दे के पीछे सचिन पायलट को मनाने की कोशिश की गई कि वह धरने पर न बैठें|
पायलट ने अनशन से एक दिन पहले ट्वीट करके धरना रद्द करने की कोशिशों पर पानी फेर दिया| पायलट ने ट्विट में लिखा -" मन में खुशी, चेहरे पर मुस्कान, हर दिल में बसता यहां, राजस्थान का स्वाभिमान|" इस तरह उन्होंने अपने धरने को राजस्थान के स्वाभिमान से जोड़ दिया, जबकि मामला उनके खुद के राजनीतिक स्वार्थ का है| क्योंकि वह बिना विधायकों के समर्थन के मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं| विधायकों का समर्थन न पहले उनके साथ था, न अब है| इसलिए अपने समर्थक विधायकों को उन्होंने धरने से दूर रहने को कहा है| क्योंकि अगर उनके समर्थक विधायक आए, तो फिर गिनती होगी और उनकी हवा निकल जाएगी| सिर्फ इतना ही नही, क्योंकि पार्टी ने उनके धरने को पार्टी विरोधी गतिविधि करार दे दिया है, इसलिए जिनकी सदस्यता 2020 में बच गई थी, वह अब चली जाएगी|
सचिन पायलट के इस कदम से कुछ चीजें साफ़ दिखाई दे रही हैं, कुछ चीजों को डिकोड करना पड़ता है| राजनीति और कूटनीती में कही गई हर बात के कई अर्थ होते हैं| किसी नेता या डिप्लोमेट के हाव भाव और उसकी कही बात का जो हम मतलब निकाल रहे होते हैं, कई बार उसका वह मतलब होता ही नहीं, जो हम समझ रहे होते हैं, उससे कहीं गहरे मतलब होते हैं| इसलिए डिकोड करना पड़ता है कि क्या क्या नतीजे हो सकते हैं| वैसे हर कोई हैरान है कि अचानक सचिन पायलट को क्या हुआ| धरना अशोक गहलोत के खिलाफ भी है, वसुंधरा के खिलाफ भी है|
इसका पहला मतलब यह निकलता है कि वह कह रहे हैं कि अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे मिले हुए हैं, वे एक दूसरे की रक्षा करते हैं| दूसरा मतलब यह निकलता है कि वह भाजपा में नहीं जाएंगे| इसकी पृष्ठभूमि यह है कि 2020 में जब उन्होंने बगावत की थी तो वसुंधरा राजे ने सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की कुछ भाजपा नेताओं की डील को पलीता लगा दिया था। उस समय रणनीति यह बन रही थी कि सचिन पायलट अगर पर्याप्त विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़ते है, तो भाजपा उन्हें मुख्यमंत्री बना देगी| स्वाभाविक है इसका वसुंधरा राजे के समर्थक विधायकों ने विरोध किया था|
वसुंधरा राजे की भाजपा से अपनी नाराजगी है, वह यह कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया तीन साल तक पार्टी में उनके प्रभाव को खत्म करने का काम कर रहे थे| वैसे यह काम वह ऊपर के इशारे पर ही कर रहे थे| इन तीन सालों में वसुंधरा पार्टी की गतिविधियों से दूर रही| हालांकि अपने समर्थकों से मिलती रहीं| अब आलाकमान ने सतीश पूनिया को अध्यक्ष पद से हटा कर उनकी नाराजगी दूर कर दी है| पार्टी के पोस्टरों पर उनके फोटो चमक रहे हैं, और वह पार्टी के हर कार्यक्रम में हिस्सा लेने लगी है| तो संकेत यह जा रहा है कि भाजपा आलाकमान अंतत: उन्हें मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट कर देगा|
हालांकि अंदर की बात यह है कि मजबूरी के बावजूद भाजपा आलाकमान उन्हें प्रोजेक्ट करना नहीं चाहता| तो क्या इसका सचिन पायलट के गहलोत विरोधी धरने से कोई संबंध है| क्या सचमुच उन्होंने कांग्रेस आलाकमान को यह कहने की कोशिश की है कि उनके भाजपा में जाने की अफवाहें अशोक गहलोत उड़ा रहे हैं| या भाजपा को यह बता रहे हैं कि अगर वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट किया गया तो वह भाजपा में नहीं आएँगे| क्या वह वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट न करने के लिए पर्दे के पीछे से भाजपा आलाकमान की मदद कर रहे हैं|
अगर हम इस घटना को और डिकोड करें, तो पाएंगे कि सचिन पायलट का भाजपा के वसुंधरा विरोधी गुट से संपर्क बना हुआ है| जैसे ही वसुंधरा राजे फिर से उभरना शुरू हुई, उनका विरोधी गुट ज्यादा सक्रिय हो गया है| राजस्थान में सोशल मीडिया पर एक पोस्टर वायरल हो रहा है| जिसमें वसुंधरा राजे को बीचों बीच सबसे आगे दिखाया गया है, उनके पीछे अगल बगल में मोदी और अमित शाह है, प्रदेश के बाकी सारे नेता मोदी और अमित शाह के पीछे लाईन में हैं| जिनमें लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा के चेयरमेन भी हैं| पोस्टर में वसुंधरा को मोदी और शाह से बड़ा नेता दिखाया गया है| वसुंधरा राजे ने कहा है कि यह पोस्टर उनके विरोधियों ने उनको बदनाम करने के लिए बनवाया है|
स्वाभाविक है कि वसुंधरा राजे खुद तो ऐसी गलती नहीं करेगी| तो क्या इस पोस्टर के पीछे वसुंधरा विरोधी भाजपा नेताओं का ही हाथ है या सचिन पायलट का भी कुछ लेना देना है| यह पोस्टर और सचिन पायलट का धरना चुनावों से पहले वसुंधरा राजे की छवि खराब करने के प्रयास हैं| लेकिन वसुंधरा राजे इतनी कमजोर भी नहीं है कि कोई बाहर का नेता उनका बाल भी बांका कर सके|
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प्रदेश की भाजपा के भीतर वसुंधरा का दबदबा बना हुआ है| 2015 में जब नेतृत्व परिवर्तन की कोशिश हुई थी, तो भाजपा विधायकों का बहुमत उनके साथ था, आज भी उनके साथ है| जबकि कांग्रेस के विधायक न 2020 में सचिन पायलट के साथ थे, न आज हैं| इतने विधायक भी नहीं कि गहलोत सरकार गिरा सकें या अपनी खुद की पार्टी बना सकें| कुल मिलाकर सचिन पायलट ने एक बार फिर से राजनीतिक समझ से परे हड़बड़ी में निर्णय लेने का उदाहरण पेश कर दिया है।
यह भी पढ़ें: सचिन पायलट के प्रदर्शन पर कांग्रेस ने दी कड़ी चेतावनी, कहा- यह साफ तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधि
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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