Opposition Alliance: पर्दे के पीछे विपक्षी गठबंधन में चल रही रस्साकसी

Opposition Alliance: राजनीति के गलियारों में यह सवाल तैर रहा है कि दिल्ली सेवा बिल का पहला सेमीफाइनल हारने के बाद विपक्ष के "इंडिया" गठबंधन की सेहत बिगड़ी है, या एक दूसरे के प्रति विश्वास बढ़ा है| सेमीफाइनल हारने और बेंगलुरु बैठक के बाद गठबंधन की सेहत बिगाड़ने वाली दो तीन बड़ी घटनाएं हुई हैं| एक घटना बंगाल की है, जहां तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दलों में खुली जंग शुरू हो गई है|

लालू प्रसाद यादव ने बेंगलुरु बैठक में इस मुद्दे को उठाया था, उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी अक्सर ममता बनर्जी के खिलाफ बोलते रहते हैं, यह गठबंधन की सेहत के लिए अच्छा नहीं है| लालू यादव ने बैठक में मौजूद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव सीता राम येचुरी की तरफ इशारा करते हुए वामपंथियों को भी ममता बनर्जी के खिलाफ बयानबाजी बंद करने की सलाह दी थी| लेकिन इस बैठक के बाद वामपंथी बंगाल में ज्यादा सक्रिय हो गए हैं। कई जगहों पर वामपंथी और तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों में हिंसक टकराव की खबरें भी आई हैं|

parties politics behind Opposition Alliance over elections

माकपा के सीताराम येचुरी ने दो टूक कह दिया है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के साथ उनका चुनावी गठबंधन नहीं होगा| हालांकि उन्होंने केरल के बारे में कुछ नहीं कहा है, लेकिन उनके बयान से साफ़ संकेत मिलता है कि वे न तो बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से कोई गठबंधन करना चाहते हैं, न केरल में कांग्रेस से| उन्होंने कहा कि 2004 के पेटर्न पर चुनाव होने में कोई हर्ज नहीं, जब वामपंथी दलों ने 61 लोकसभा सीटें जीती थीं, उनमें से 57 कांग्रेस उम्मीदवारों को हराकर जीती थीं। इसके बावजूद वामपंथी दलों ने ही केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनवाई थी| उन्होंने याद दिलाया कि यूपीए बनवाने में माकपा के उस समय के महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत की अहम भूमिका थी| ठीक उसी तरह इस बार होगा, यानि पश्चिम बंगाल और केरल में विपक्षी गठबंधन की सेहत बिगड़ी हुई है|

दूसरी घटना यह हुई है कि एनसीपी टूटने के बाद महाराष्ट्र में पहले से चल रहे महा विकास आघाड़ी गठबंधन की सेहत बिगड़ी है, जो इंडिया गठबंधन का हिस्सा है| शरद पवार और अजीत पवार की पुणे में हुई मीटिंग पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने सवाल उठाया है| जिस पर शरद पवार ने जवाब भी दिया कि अजीत पवार उनके परिवार के वरिष्ठ सदस्य है, इसलिए पारिवारिक मुलाकातों पर एतराज नहीं होना चाहिए| इसके जवाब में नाना पटोले ने कहा कि अगर ये पारिवारिक मुलाकातें हैं तो किसी प्राईवेट जगह पर गुपचुप ढंग से मुलाकातें क्यों हो रही हैं|

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कांग्रेस आलाकमान के साथ नाना पटोले की क्या बात हुई है, यह तो सामने नहीं आया, लेकिन इस घटनाक्रम के बाद नाना पटोले और उद्धव ठाकरे की आपस में मीटिंग हुई है| उन दोनों का मानना है कि शरद पवार डबल गेम कर रहे हैं, इसलिए अब इन दोनों दलों ने शरद पवार को किनारे कर चुनावी तैयारियों की कवायद शुरू करने का फैसला किया है| जिस तरह पंजाब, दिल्ली और हरियाणा कांग्रेस की प्रदेश इकाइयां सभी लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही हैं, वैसे ही महाराष्ट्र कांग्रेस ने सिर्फ उद्धव ठाकरे के साथ गठबंधन करके लोकसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है|

इन खबरों से कांग्रेस परेशान है कि अजीत पवार ने शरद पवार और सुप्रिया सुले, दोनों को केंद्र में मंत्री बनवाने की पेशकश की है| हालांकि सुप्रिया सुले ने ऐसी खबरों को सिरे से खारिज किया है कि उन्हें केंद्र में मंत्री बनाने की पेशकश की गई है| महाराष्ट्र में खबर तो यहां तक चल रही है कि नरेंद्र मोदी ने अजीत पवार से कहा है कि वह मुख्यमंत्री तो तभी बन पाएंगे, जब शरद पवार को साथ ले आएंगे। इसलिए अजीत पवार पिछले एक महीने में शरद पवार से चार मुलाकातें कर चुके हैं, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली| पुणे बैठक के बाद तो शरद पवार ने खुद ही कह दिया कि वह भाजपा के साथ कभी नहीं मिलेंगे|

भाजपा को पता है कि एकनाथ शिंदे की जमीन खिसक रही है। शिंदे के डेढ़ दर्जन विधायक पाला बदलने की फिराक में हैं, ऐसे में भाजपा के लिए एनसीपी मजबूरी हो गई है, और एनसीपी की मजबूती भी जरूरी है| अगर एकनाथ शिंदे की तरह कुछ दिन बाद अजीत पवार से भी विधायक खिसकने लगे, तो महाराष्ट्र की डबल ईंजन सरकार धराशाही हो जाएगी| लेकिन दूसरी तरफ अगर शरद पवार एनडीए के साथ आ जाते हैं, तो सारे देश में ही विपक्षी गठबंधन की सेहत बिगड़ना तय है| कांग्रेस शरद पवार को शंका की नजर से देख रही है| संकेत तो यहां तक आए हैं कि कांग्रेस सुप्रिया सुले की बारामती सीट पर भी उम्मीदवार खड़ा करने की तैयारी कर रही है|

ऐसी ही स्थिति दिल्ली में भी पैदा होती दिख रही है| 16 अगस्त को कांग्रेस आलाकमान ने दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ बैठक की थी। इस बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल भी थे| प्रदेश कांग्रेस के सभी नेताओं ने केजरीवाल के साथ गठबंधन नहीं करने की राय दी। इस बैठक में कहा गया कि 2019 में केजरीवाल ने कांग्रेस को दो सीटें देने की पेशकश की थी, अब भी वह दो सीटों से आगे नहीं बढ़ेंगे, जबकि लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को आम आदमी पार्टी से ज्यादा वोट मिले थे| सभी की बात सुनने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं से कहा कि वे तैयारी तो सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की करें, लेकिन जब गठबंधन में सीट बंटवारे का फार्मूला निकलेगा, तब देखा जाएगा|

इसका अर्थ साफ़ है कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव तक केजरीवाल के साथ बने रहने पर आशंकित है| हालांकि इस फैसले पर आम आदमी पार्टी से उतनी तीखी प्रतिक्रिया नहीं आई, क्योंकि केजरीवाल ने जैसे पहले कांग्रेस की कीमत पर अपनी ताकत बढ़ाई, उसी तरह इस बार वह कांग्रेस के कंधों पर सवार हो कर दिल्ली और पंजाब से लोकसभा में जोरदार एंट्री की संभावना देख रहे हैं| हालांकि कांग्रेस की प्रवक्ता अलका लांबा ने भड़काने वाला बयान दिया था| उन्होंने कहा कि कांग्रेस सभी सातों सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ेगी। वह यहीं तक चुप नहीं रही, उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी के दो मंत्री जेल में हैं, और मुख्यमंत्री भी भ्रष्टाचार के आरोप में कभी भी जेल में जा सकते हैं|

इस पर आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने सिर्फ इतना ही कहा कि अलका लांबा छोटी नेता हैं, गठबंधन में अभी सीटों पर बातचीत शुरू नहीं हुई है| हालांकि दूसरी प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने जरुर कहा कि अगर कांग्रेस दिल्ली की सातों सीटों पर लड़ने का फैसला करती है, तो आम आदमी पार्टी मुम्बई की बैठक में नहीं जाएगी| लेकिन इससे पहले कि केजरीवाल का कोई बयान आता दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी बावरिया ने अलका लांबा के बयान को खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश कांग्रेस को सातों सीटों पर तैयारी करने को कहा गया, लेकिन इस का मतलब यह नहीं है कि सातों सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया गया है| गठबंधन को बचाए रखने के लिए बावरिया ने अपनी प्रवक्ता अलका लांबा को अपरिपक्व तक कह डाला|

लेकिन सवाल यह है कि क्या अरविन्द केजरीवाल के साथ पंजाब हरियाणा और दिल्ली की सीटों का बंटवारा हो पाएगा| पंजाब प्रदेश कांग्रेस ने पटना बैठक के बाद ही खुल कर कह दिया था कि वे प्रदेश की सभी 13 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे| कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में चल रहे बवाल को थामने के लिए नीतीश कुमार ने दिल्ली आकर मल्लिकार्जुन खड़गे और केजरीवाल से मुलाक़ात की है। नीतीश कुमार को पूरी उम्मीद है कि मुम्बई बैठक में उन्हें गठबंधन का संयोजक बना दिया जाएगा| इसलिए वह इस कोशिश में हैं कि शरद पवार, ममता बनर्जी और केजरीवाल के कारण मुम्बई की बैठक टलनी नहीं चाहिए|

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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