North East Politics: अन्नाद्रमुक के बाद एनडीए का एक और विकेट गिरेगा?
पिछले दिनों तमिलनाडु प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अन्नामलाई की बयानबाजी से खफा होकर अन्नाद्रमुक ने एनडीए छोड़ दिया था। भारतीय जनता पार्टी ने पूर्वोत्तर में अलग से एनडीए बनाया हुआ है, जिसका नाम है नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस। इसके अध्यक्ष असम के भाजपाई मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा हैं। उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले ही उन्हीं की मेहनत से यह एलायंस बना था। लेकिन अपने जन्म से ही यह टूटता जुड़ता रहा है।
मेघालय के मुख्यमंत्री और एनपीपी पार्टी के अध्यक्ष कॉनराड संगमा एनईडीए से अलग हो गए थे, लेकिन चुनावों में उन्हें स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, तो वह वापस गठबंधन में आ गए और भाजपा के समर्थन से दुबारा सरकार बना ली। मुख्यमंत्री बनने के बाद हेमंत बिस्व सरमा वैसे तो सारे देश में घूम रहे हैं, लेकिन उन्होंने एनईडीए की कोई मीटिंग नहीं बुलाई। पूर्वोतर के आदिवासी बेहद खफा हैं कि मणिपुर पर न एनडीए की मीटिंग हुई, न एनईडीए की, और न ही संसद में मणिपुर पर चर्चा करवाई गई।

भाजपा विरोधी इंडी एलायंस ने मणिपुर में जोरदार हंगामा करने और संसद परिसर में धरना देने के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाकर पूर्वोत्तर के आदिवासियों के मन में अपनी जगह बना ली है। इसलिए एनईडीए से जुडी रही कुछ आदिवासी पार्टियां इस बात से नाराज़ हैं कि मणिपुर में मई में हुई हिंसा के बाद एनईडीए की कोई बैठक नहीं बुलाई गई। इसलिए अब वे वैकल्पिक क्षेत्रीय राजनीतिक मंच की संभावना टटोल रही हैं।
आदिवासियों के लिए एक अलग ग्रेटर टिपरालैंड राज्य की मांग करने वाली त्रिपुरा की टिपरा मौथा पार्टी के अध्यक्ष प्रद्योत किशोर मानिक्य देबबर्मा और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा में लंबी बातचीत हुई है। लोकसभा के पूर्व स्पीकर पीए संगमा के बेटे कॉनराड संगमा की पार्टी एनपीपी की मेघालय के अलावा अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर में भी मौजूदगी है।

पी.ए. संगमा ने जब 2013 में शरद पवार की एनसीपी छोड़कर एनपीपी बनाई थी, तो चार राज्यों में विधायकों और छह प्रतिशत से ज्यादा वोटों के चलते एनपीपी को राष्ट्रीय दल की मान्यता मिल गई थी। एनपीपी को आज भी राष्ट्रीय दल की मान्यता है और उसका एक सांसद लोकसभा में और एक राज्यसभा में है। संगमा का इरादा अपनी पार्टी एनपीपी का पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के अलावा आदिवासी आबादी वाले झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में विस्तार का भी है। राजस्थान में उसकी पहले भी उपस्थिति रही है।
पी.ए. संगमा एनसीपी में शामिल होने से पहले लंबा समय कांग्रेस में रहे थे, इसी तरह त्रिपुरा के राजवंश के वारिस प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा भी टिपरा मोथा पार्टी का गठन करने से पहले त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष थे। प्रद्योत के परिवार का कांग्रेस से पुराना नाता रहा है। उनकी मां "राजमाता" विभु कुमारी देवी 1988-93 के दौरान राज्य की कांग्रेस-त्रिपुरा उपज जुबा समिति (टीयूजेएस) गठबंधन सरकार में कांग्रेस सांसद और मंत्री थीं।
प्रद्योत के पिता किरीट बिक्रम किशोर माणिक्य देबबर्मा भी कांग्रेस सांसद थे। किरीट बिक्रम किशोर माणिक्य देबबर्मा की पहली पत्नी वसुंधरा राजे की बड़ी बहन और केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्या सिंधिया की बड़ी बुआ पद्मावती राजे बर्मन थी, जिनका 1964 में देहांत हो गया था।
प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा 370 के मुद्दे पर कांग्रेस में मतभेद के चलते कांग्रेस छोड़ गए थे, लेकिन वह भाजपा में शामिल नहीं हुए। प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा को हाल ही में कांग्रेस ने दुबारा कांग्रेस में शामिल होने और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद को संभालने की पेशकश की है।
प्रद्योत के संगमा परिवार के साथ मधुर संबंध रहे हैं। कॉनराड संगमा के तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर और उनके बेटे और मंत्री के.टी. रामाराव से भी अच्छे संबंध है। केसीआर की बीआरएस एनडीए या इंडी एलायंस में से किसी का हिस्सा नहीं है। कॉनराड संगमा और प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा की मुलाक़ात से नार्थ ईस्ट में नए गठबंधन की संभावना बन रही है।
नार्थ ईस्ट के बाहर भी विस्तार की संभावना बन सकती है, क्योंकि कॉनराड संगमा देशभर के आदिवासी इलाकों में अपनी पार्टी का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं, वे देश के अन्य हिस्सों की आदिवासी पार्टियों से गठबंधन भी कर सकते हैं। अगर यह मुलाक़ात नए गठबंधन की तरफ बढती है, तो स्वाभाविक है कि यह नार्थ ईस्ट में भाजपा के एनईडीए के खिलाफ गठबंधन होगा, जिसका फिर राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के इंडी गठबंधन के साथ गठबंधन हो सकता है, या तीसरा गठबंधन भी बन सकता है।
प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा और कॉनराड संगमा मिलकर टिपरा मौथा पार्टी शासित त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद के मुख्यालय खुमुलवंग में 14 अक्टूबर को एक मेगा रैली कर रहे हैं। एक ऑडियो संदेश में प्रद्योत ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर सभी से रैली में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा, "पहली बार, किसी राज्य का मुख्यमंत्री हमारे साथ एकजुटता दिखाने के लिए अपने कैबिनेट मंत्रियों के साथ त्रिपुरा क्षेत्रीय पार्टी की रैली में शामिल होगा।"
प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा ने कांग्रेस छोड़ने के बाद 2021 में ग्रेटर टिपरालैंड राज्य की मांग को लेकर आदिवासियों की नई पार्टी बना ली थी। पार्टी के गठन के दो महीनों बाद ही टिपरा मौथा ने त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद का चुनाव जीत लिया था। 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा और अमित शाह में कई दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन आदिवासी ग्रेटर टिपरालैंड की मांग पर सहमति नहीं होने के चलते बात नहीं बनी। त्रिपुरा विधानसभा के चुनाव में एक तरफ भाजपा और उसके सहयोगी दल थे, तो दूसरी तरह कांग्रेस और सीपीएम का गठबंधन था। टिपरा मौथा ने अलग चुनाव लड़ा और 13 सीटें जीत कर प्रमुख विपक्षी पार्टी बनी। चुनाव के बाद भी प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा को एनडीए में लाने की कोशिश की गई, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के बाद टिपरा मोथा पार्टी ने अपनी ग्रेटर टिपरालैंड की मांग को लेकर केंद्र सरकार से बातचीत शुरू की। उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, गृह मंत्रालय के पूर्वोत्तर सलाहकार ए के मिश्रा और असम के मुख्यमंत्री और एनईडीए के अध्यक्ष हिमंत बिस्वा सरमा के साथ कई बैठकें हुई, लेकिन केंद्र के साथ कोई बात नहीं बनी।
टिपरा मोथा ने कई बार आरोप लगाया है कि आदिवासी परिषद आर्थिक तंगी से जूझ रही है, लेकिन राज्य की भाजपा सरकार उसे सहयोग नहीं कर रही। इस बीच त्रिपुरा में दो सीटों पर विधानसभा के उप चुनाव हुए, भाजपा से नाराज चल रही टिपरा मोथा पार्टी ने खुद तो चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन कांग्रेस, सीपीएम के साझा उम्मीदवारों का समर्थन किया। अब मेघालय के मुख्यमंत्री और एनईडीए के प्रमुख सहयोगी दल एनपीपी के अध्यक्ष संगमा का टिपरा मौथा के साथ रैली में शामिल होना पूर्वोतर में नई राजनीति को जन्म दे सकता है।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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