Coaching Centres in Delhi: आग की लपटों में घिरा उम्मीदों से भरा सपना

Coaching Centres in Delhi:उत्तर भारत के नौजवानों का एक दरिया बहकर दिल्ली पहुंचता है और यहां की मुखर्जी नगर जैसी कई बस्तियों में जमा हो जाता है, जहां कोचिंग का कारोबार चलता है। इन नौजवानों में से किसी के मन में देश की नौकरशाही का हिस्सा बनने का सपना होता है तो कोई इंजिनियर, डॉक्टर, सीए बनने की उधेड़बुन में लगा होता है। लेकिन 15 जून की दोपहर इन सपनों के समंदर में मानो आग लग गयी।

Negligence over fire safety plan at Coaching Centres in Delhi

छात्र मुखर्जी नगर की जिन इमारतों के समंदर में खो जाते हैं उन्हीं में से एक भवन में आग लग गयी। सैकड़ों छात्रों की जान संकट में फंस गयी। छात्रों से तैयारी के नाम पर लाखों रुपए की फीस इकट्ठी करने वाले कोचिंग सेंटर ने मानो उन्हें एक भट्ठी में मरने के लिए छोड़ दिया था। जहां आग की चपेट में आई इमारत के हर एक तल पर धुंआ ही धुंआ था। पहले तो वहां भगद़ड़ मची। फिर बड़ी ही सूझबूझ के साथ छात्रों ने एक दूसरे का साथ दिया। एक एक करके बाहर आए। यदि छात्रों ने उस दिन संयम से काम नहीं लिया होता तो वहां कुछ भी अनहोनी हो सकती थी। अब जब आग ठंडी हो गई है तब मौत के मुंह से निकल कर आए छात्र बहुत निराश हैं। छात्रों को लग रहा है कि इस संघर्ष में वे अकेले हैं।

नहीं मिला साथ

अवध ओझा, विकास दिव्यकीर्ति को पहचान ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने दिलवाई। अधिक समय नहीं हुआ जब एक राष्ट्रीय पत्रिका ने इन सभी गुरुजनों की तस्वीर को कवर पर प्रकाशित करके लिखा था- माट सा'ब 2.0। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा शायद ही कोई ऐसा छात्र हो, जिसने इनका नाम नहीं सुना हो। पांच दिन हो गए, इन्होंने कोचिंग सेंटर की इस लापरवाही और छात्रों के पक्ष में संवेदना के दो शब्द तक नहीं कहे। वो राहुल गांधी भी कुछ नहीं बोले जो अभी दो महीना पहले अपने भांजे रेहान वाड्रा के साथ यहां आये थे।

कोचिंग इन्स्टीट्यूट में लगी आग के बाद मुखर्जी नगर में डर और आक्रोश का माहौल है। डर इस बात का कि पीछे किसी छात्र की दम घुटने से मौत तो नहीं हुई। आक्रोश उस लापरवाही के लिए जिसकी वजह से इतने छात्रों की जान दांव पर लग गई थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार घटना के बाद जब आग पर काबू पा लिया गया था, कोचिंग सेंटर के तीन कमरों में ताले लगा दिए गए। उनमें किसी को जाने नहीं दिया गया। सवाल है कि कोचिंग सेंटर वाले दुर्घटना के बाद ताला लगाकर क्या छुपाना चाह रहे थे?

आसान नहीं है प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

अपने सपनों को पूरा करने के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के छोटे कस्बों से छात्र कोटा, दिल्ली जैसे शहरों में आते हैं। यहां का जीवन आसान नहीं है। दिल्ली में ऐसे लाखों छात्र हैं, जो पच्चीस-पच्चीस गज के कमरों में दो-तीन की संख्या में रहकर तैयारी करते हैं। यहां सवाल है कि दिल्ली आकर औसत छात्र जो निवेश कर रहा है, कोचिंग सेंटर से उसे उसके मुताबिक सेवाएं मिल रहीं हैं या नहीं?

कई कोचिंग सेंटर मुखर्जी नगर में ऐसे हैं, जिनकी सीढ़ियां चढ़ते हुए मोबाइल की रोशनी की जरूरत पड़ती है। वहां घुप्प अंधेरा होता है। सीढ़ियां इतनी संकरी कि उन पर एक साथ दो लोग चढ़ नहीं सकते। आमने-सामने से दो छात्र आ जाएं तो एक दूसरे से बचकर निकलना पड़ता है। एक कक्षा में कितने छात्र बैठेंगे, इसका आम तौर पर कोई हिसाब नहीं होता। दृष्टि आईएएस वाले विकास दिव्यकिर्ति की क्लास को देखकर लगता है मानों वो किसी क्लास को नहीं बल्कि रैली को संबोधित कर रहे हैं। दिल्ली में गिनती के कोचिंग सेंटर होंगे जो छात्रों के कॅरियर को लेकर गंभीर हैं। अधिकांश कोचिंग सेंटर वालों के लिए सेंटर का मतलब ही नोट छापने की मशीन है। उन्हें छात्रों के कॅरियर से क्या लेना देना?

सुरक्षा मानकों की हुई अनदेखी

मुखर्जी नगर में लगी आग के बाद हुई एफआईआर में पता चला है कि बिल्डिंग में आग बुझाने के उपकरण नहीं थे और छत पर बने टैंक में पानी भी नहीं था। इमारत में अग्निशमन हाइड्रेंट पुराने लगे थे, जो काम करने की स्थिति में नहीं थे। अग्निशमन हाइड्रेंट ना होने की वजह से अग्निशामक दल को पानी की आपूर्ति में बाधा आई। आग से सुरक्षा के लिए बिल्डिंग में अग्निशमन हाइड्रेंट होने चाहिए थे। बिल्डिंग में स्मोक डिटेक्टर भी नहीं लगे हुए हैं। बिल्डिंग के पहले फ्लोर पर भारती कंसेप्ट मैथमेटिक कोचिंग सेंटर का ऑफिस है। दूसरे फ्लोर पर स्टूडेंट्स के लिए लाइब्रेरी है। यहां वो बैठकर पढ़ाई करते हैं। तीसरे और चौथे फ्लोर पर संस्कृति आईएएस कोचिंग सेंटर का ऑफिस/क्लासरूम है। आग के बाद धुंआ सभी फ्लोर पर था।

इस घटना के बाद घनी आबादी वाले इस इलाके की इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर चिंता बढ़ गई है, जहां लगभग हर नुक्कड़ और कोने में कोचिंग सेंटर हैं। जस्टिस जसमीत सिंह और जस्टिस विकास महाजन की वेकेशन बेंच ने आदेश में कहा कि हमने अखबारों में छपी घटना से जुड़ी खबर और वॉट्सएप पर सर्कुलेट हो रहे संदेश पढ़े। अखबारों की रिपोर्ट के मुताबिक, मुखर्जी नगर में चार मंजिला बिल्डिंग में चल रहे एक कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाले 500 बच्चे बाल-बाल बचे हैं।

फिर दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली पुलिस और एमसीडी को नोटिस जारी किया और उनसे दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इतना ही नहीं, अदालत ने दिल्ली अग्निशमन सेवा को अग्नि सुरक्षा ऑडिट करने और अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र जारी किए गए या नहीं, इसकी जांच करने के भी निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने अथॉरिटी को अपने-अपने जवाब देने के लिए दो हफ्तों का वक्त दिया और कहा कि मामले को आगे के निर्देशों के लिए मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट में 3 जुलाई को सुनवाई के लिए लगाया जाए।

बंद होंगे नियमों की अनदेखी करने वाले कोचिंग सेंटर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उत्तरी दिल्ली में ज्यादातर कोचिंग सेंटर, मुखर्जी नगर, विजय नगर, क्रिश्चियन कॉलोनी, और दक्षिण दिल्ली में बेर सराय, कालू सराय, जीया सराय, मुनिरका और जेएनयू के आसपास के कुछ इलाकों में हैं। पूर्वी दिल्ली में लक्ष्मी नगर प्राइवेट कोचिंग सेंटर का नया हब बनकर उभरा है। सेंट्रल दिल्ली में करोल बाग और राजेंद्र नगर में कई कोचिंग सेंटर हैं। बात नियमों की करें तो जहां सड़क की चौड़ाई 18 मीटर से कम है, वहां निजी कोचिंग सेंटर खोलने की अनुमति नहीं है। ऐसे ही कच्ची कॉलोनियों व ग्रामीण इलाकों में जहां रोड़ की चौड़ाई 09 मीटर है, वहीं कोचिंग सेंटर खोले जा सकते हैं।

व्यावसायिक क्षेत्रों में कोचिंग सेंटर चलाने पर किसी तरह पाबंदी नहीं है लेकिन सेंटर मालिकों के पास एमसीडी, फायर डिपार्टमेंट, डीपीसीसी और पुलिस का एनओसी अवश्य होना चाहिए। एमसीडी इन नियमों को सख्ती से दिल्ली में लागू करने की तैयारी कर रही है। दक्षिणी दिल्ली में मुनिरका, कालू सराय, जीया सराय, बेर सराय और उत्तरी दिल्ली के मुखर्जी नगर में चलने वाले कई सारे कोचिंग सेंटर पर आने वाले समय में गाज गिरेगी। ऐसे कोचिंग सेंटर इसकी जद में आएंगे जो जबर्दस्त तरीके से नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।

पंजीकरण का प्रावधान लागू नहीं

दिल्ली के मुखर्जी नगर में हजारों की तादाद में छात्र यूपीएससी, एसएससी, यूपीपीएससी सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं। लेकिन कई कोचिंग सेंटर्स छात्रों की जिंदगी दांव पर लगाकर संस्थान को संचालित कर रहे हैं। डेढ़ साल पहले दिल्ली शिक्षा विभाग के तत्कालीन उप निदेशक योगेश पाल सिंह ने इन कोचिंग सेंटरों के नियमन के लिए एक आदेश जारी किया था। जारी आदेश में निजी कोचिंग सेंटरों से कहा गया था कि 20 से अधिक छात्रों के साथ कोचिंग चलाने वाले सेंटर शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराएं।

पोर्टल पर कोचिंग संस्थानों को यह बताना था कि उनके यहां संचालित होने वाले सेंटर कितनी भूमि पर चल रहे हैं? उनके संस्थान में आग से बचाव के लिए क्या बंदोबस्त हैं? एक क्लासरूम में कितने बच्चे बैठते हैं? संस्थानों का पंजीकरण छात्र और संस्थान दोनों के हित में था लेकिन शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर अपना पंजीकरण कराने के आदेश के खिलाफ कोचिंग सेंटर्स उच्च न्यायालय चले गए और इसे लागू नहीं किया जा सका। मामला अब तक न्यायालय में है।

देश भर में निजी कोचिंग सेंटर एक समानांतर शिक्षा व्यवस्था चला रहे हैं और अभी भी ये किसी भी नियमन के दायरे से बाहर हैं। जिससे छात्रों को गंभीर खतरा है। दिल्ली शिक्षा विभाग ने जो आदेश जारी किया था, उससे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों के साथ होने वाली ठगी की घटनाओं पर थोड़ी लगाम लगती। सिर्फ दिल्ली क्यों, पंजीकरण का नियम तो पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। जिससे कोचिंग सेंटरों की जिम्मेवारी तय हो सके।

पंजीकरण के कई लाभ है। इससे अवैध संस्थान बंद होंगे। धोखाधड़ी पर लगाम लग सकेगी। मनमाने तरीके से फीस की बढ़ोत्तरी पर लगाम लगेगी। बिना पंजीकरण के संस्थान चलाना गैर कानूनी होगा। अतिथि शिक्षकों को मनमाने तरीके से कोचिंग सेंटर हटा नहीं पाएंगे। कक्षा में छात्रों की संख्या तय होगी। उससे अधिक छात्रों को कोचिंग दाखिला नहीं दे पाएगा। छात्रों की सुरक्षा और नियमों का अनुशासन मानने के लिए संस्थान बाध्य होगा। देर करने की जगह, जल्द से जल्द इसे लागू किया जाना चाहिए। इसमें छात्र और ईमानदारी से कोचिंग सेंटर चलाने में विश्वास रखने वाले संचालकों का भी फायदा है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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