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Chhattisgarh BJP Leaders: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के निशाने पर भाजपा नेता, हो रहे हैं टार्गेट कीलिंग के शिकार

छत्तीसगढ़ में भाजपा नेताओं की नक्सलियों द्वारा टार्गेट किलिंग के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश भर की 78 विधानसभाओं में 17 फरवरी को विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम किया।

Naxalites target killing bjp leaders protest in Chhattisgarh

Chhattisgarh BJP Leaders: छत्तीसगढ़ में भाजपा की नाराजगी का मुख्य कारण उनके नेताओं की एक के बाद एक हो रही हत्या है। एक तरफ भाजपा नेता टार्गेट किलिंग के शिकार हो रहे हैं फिर भी राज्य सरकार इन हत्याओं के बाद हाथ पर हाथ धरे बैठी है। सरकार पर आरोप है कि उसने अब तक कोई एक्शन नहीं लिया है। भाजपा नेताओं की नृशंस हत्या के मामले में किसी अधिकारी को सस्पेंड तक नहीं किया गया। प्रदेश के गृह मंत्री का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। अब तक सरकार ने कोई जांच नहीं बिठाई लेकिन अब राज्य सरकार विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की बात कर रही है।

पूर्व सरपंच बुधराम हुए पहले शिकार

छत्तीसगढ में कहा जा रहा है कि नक्सली जानबूझकर भाजपा नेताओं को निशाना बना रहे हैं। नक्सलियों द्वारा टार्गेट कीलिंग का जो सिलसिला बस्तर में प्रारंभ हुआ उसके पहले शिकार भाजपा नेता पूर्व सरपंच बुधराम करताम किलेपाल थे। उनका शव 16 जनवरी को घर से दो किमी दूर सड़क किनारे पड़ा हुआ मिला।

करताम जगदलपुर में भाजपा के जिलामंत्री थे। भाजपा के अनुसार उनकी हत्या एक राजनीतिक षडयंत्र है, जिसे नक्सलियों ने अंजाम दिया। छत्तीसगढ़ पुलिस के अनुसार, उनकी मृत्यु एक दुर्घटना थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शव के सिर पर चोट के निशान थे। सड़क पर उनके जूते पड़े मिले। उससे आधा किमी दूरी पर उनका शव था। यह सब देखकर हत्या की आशंका जताई गई थी। जिसे हादसे का रूप देने का प्रयास किया गया।

पहले दिया अल्टीमेटम फिर कर दी हत्या

अभी छत्तीसगढ़ भाजपा अपने नेता बुधराम करताम के शोक से बाहर भी नहीं आई थी कि पांच फरवरी को बस्तर अन्तर्गत बीजापुर जिले के उसूर मंडल अध्यक्ष नीलकंठ कक्केम की हत्या नक्सलियों ने कर दी। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी नक्सलियों ने कक्केम को अल्टीमेटम दिया था लेकिन 05 फरवरी को अपनी साली के शादी समारोह में शामिल होने वे आवापल्ली थाना क्षेत्र के अपने पैतृक गांव पेंकरम आये तो मौके पर ही पहुंचकर नक्सलियों ने परिवार के सामने चाकू और कुल्हाड़ी से वार कर उनकी हत्या कर दी।

जिला उपाध्यक्ष की हत्या

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के बस्तर प्रवास के एक दिन पूर्व 10 फरवरी की रात आठ बजे नक्सलियों ने नारायणपुर जिले के छोटेडोंगर में जिला भाजपा उपाध्यक्ष सागर साहू को उनके घर में घुसकर गोली मार दी। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने नारायणपुर (बस्तर) पहुंचकर 13 फरवरी को सागर साहू को श्रद्धांजलि दी। साहू के परिजनों से मुलाकात कर विश्वास दिलाया कि पीड़ित परिवार के साथ पूरी बीजेपी खड़ी है। इस दौरान उन्होंने सागर साहू के पार्थिव शव पर बीजेपी का झंडा ओढ़ाया।

नड्डा ने बस्तर प्रवास के दौरान जनसभा में भी कार्यकर्ताओं की हो रही टारगेट कीलिंग का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मैं भाजपा के शहीद वीर सिपाहियों के परिजनों से कहूंगा कि आपका बेटा इस लड़ाई में अकेला नहीं है, पूरी 18 करोड़ सदस्यों की पार्टी आपके साथ खड़ी है। उन्होंने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार आने के बाद नक्सली हमले बढ़े हैं।

दंतेवाड़ा में हुई कुल्हाड़ी मारकर रामधर की हत्या

राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के बस्तर से लौटते ही नक्सलियों ने दंतेवाड़ा के हितामेटा गांव के पूर्व सरपंच व भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता रामधर अलामी की हत्या कर दी। अलामी 10 फरवरी को कुछ काम से तुलथूली गांव गए थे। दूसरे दिन शनिवार, 11 फरवरी को वे जब अपने गांव लौट रहे थे, तब नक्सलियों ने कुल्हाड़ी मारकर उनकी हत्या कर दी।

क्या जानबूझकर बनाया जा रहा है डर का माहौल?

आदिवासी बहुल बस्तर में विधानसभा की 11 सीटें हैं। सभी सीटों पर वर्तमान में कांग्रेस का कब्जा है। भाजपा बस्तर पर फोकस कर रही है। इसीलिए आशंका जताई जा रही है कि नक्सली जिस तरह से भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं की हत्या कर रहे हैं, इससे भाजपा कमजोर होगी, जिसका लाभ कांग्रेस को मिल सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि भाजपा नेताओं की नृशंस हत्या करने वाले नक्सली कहीं 'गोदी नक्सली' तो नहीं हैं? भाजपा नेताओं की हत्या के पीछे कांग्रेस की शह होने की बात इसलिए भी स्थानीय चर्चा का विषय है क्योंकि बीजेपी नेताओं की सुरक्षा राज्य सरकार ने वापस ले ली है। बस्तर के बीजेपी नेता केदार कश्यप ने आरोप लगाया है कि बीजेपी नेताओं की निशानदेही करके हत्या की जा रही है, दूसरी तरफ राज्य सरकार ने भाजपा नेताओं की सुरक्षा भी हटा ली है।

झीरम कांड के सबूत पर विवाद

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों द्वारा टारगेट कीलिंग की बात होने पर झीरम घाटी में कांग्रेसी नेताओं के नरसंहार की बात आ ही जाती है। दस साल पुरानी बात है। वह भी विधानसभा चुनाव का साल था। प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। 200 लोगों के काफिले पर नक्सलियों ने अचानक हमला बोला था। 30 लोगों की जान गई थी, जिसमें कई कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी थे। हमले के मुख्य टारगेट बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा थे। 'सलवा जुडूम' का नेतृत्व करने की वजह से नक्सली उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते थे। नक्सलियों ने उनके शरीर पर करीब 100 गोलियां दागीं और चाकू से 50 से ज्यादा वार किए। हत्या के बाद नक्सलियों ने उनके शव पर चढ़कर डांस भी किया था।

यह बात उल्लेखनीय है कि भाजपा सलवा जुडूम के समर्थन में खड़ी थी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव ने झीरम कांड पर कहा कि, ''चुनाव से पहले भूपेश बघेल कह रहे थे, मैं झीरम कांड का सबूत जेब में लेकर घूम रहा हूं। जब सरकार बनेगी तो सबूत दिखाऊंगा। तो अब वे मुख्यमंत्री हैं। जेब से सबूत निकालकर दिखाएं।'' झीरम कांड के एक प्रत्यक्षदर्शी कवासी लखमा भूपेश सरकार में मंत्री हैं।

बहरहाल, छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक बार फिर नक्सली जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लिए यह चुनौती है कि वे कैसे इस जिन्न से निपटते हैं। नक्सलियों द्वारा की जा रही भाजपा नेताओं की टारगेट किलिंग प्रदेश सरकार के काम काज पर गंभीर सवाल उठा रही है।

यह भी पढ़ें: छत्तीसगढ़: ED के छापों पर CM भूपेश का जवाब, कांग्रेस के अधिवेशन से घबरा गई है भाजपा

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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