Chhattisgarh: क्षत्रप विहीन छत्तीसगढ़ में मोदी-शाह संभालेंगे चुनाव की कमान

Chhattisgarh: भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अपना फोकस अब इसी साल अक्टूबर नवंबर में होने जा रहे पांच राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, और मिजोरम पर फोकस कर दिया है। लगातार इन राज्यों में केन्द्रीय नेताओं के दौरों के साथ संगठन की बैठकें आयोजित होने लगी हैं। भाजपा हाईकमान को इन पांच राज्यों में एक समय भाजपा की सबसे मजबूत कड़ी रही छत्तीसगढ़ इस समय सबसे कमजोर कड़ी नजर आ रहा है। इस कारण मोदी और शाह ने छत्तीसगढ़ पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है।

भाजपा हाईकमान के पास छत्तीसगढ़ से जो खबर आ रही है उसके अनुसार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लोकप्रियता में बढ़त बनाए हुए हैं और उनके नेतृत्व में कांग्रेस की लगातार दूसरी बार छत्तीसगढ़ में सरकार बनने की पूरी संभावना है। भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस को मिल रही बढ़त और छत्तीसगढ़ भाजपा में नेताओं के बीच जारी मतभेद को लगाम लगाने के लिए गृह मंत्री और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खुद संगठन की बैठक लेने 5 जुलाई की शाम को छत्तीसढ़ पहुंच रहे हैं।

Modi-Shah will lead the election campaign in Chhattisgarh without Kshatrapa

जून महीने में भी अमित शाह छत्तीसगढ़ आए थे, तब शाह ने 22 जून को दुर्ग में जनसभा को संबोधित किया था। एक जुलाई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का भी बिलासपुर में दौरा हो चुका है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि शाह के निर्देश पर 175 कार्यकर्ताओं की विशेष टीम पिछले महीने से छत्तीसगढ़ में डेरा डाले हुए है और पूरे छत्तीसगढ़ का दौरा कर अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा की स्थिति का जमीनी रिपोर्ट तैयार कर अमित शाह को सौंपा है। अपने ताजा दौरे के दौरान अमित शाह इसी रिपोर्ट को वरिष्ठ नेताओं से साझा करेंगे और जरूरी दिशा निर्देश देंगे। इसी के आधार पर प्रदेश के नेताओं को रणनीति बनाने की जिम्मेदारी सौपेंगे।

एक नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ के गठन के बाद उसे 90 विधानसभा सीटें मिली। इसमें से 39 सीटें आरक्षित है। इन सीटों में से 29 सीटें अनुसूचित जनजाति और 10 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। 51 सीटें सामान्य वर्ग से हैं लेकिन इन सामान्य सीटों में भी करीब एक दर्जन सीटों पर अनुसूचित जाति वर्ग का खास प्रभाव है। प्रदेश के मैदानी इलाकों की ज्यादातर विधानसभा सीटों पर अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की भी भारी संख्या है। छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी करीब 47 प्रतिशत है। मैदानी इलाकों से करीब एक चौथाई विधायक इसी वर्ग से विधानसभा मे चुनकर आते हैं। 2003 के विधानसभा चुनाव से पिछड़े वर्ग की सीटों पर भाजपा का दबदबा था लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में एससी के लिए आरक्षित 10 सीटों में से 6 सीटें जीत ली और एसटी के लिए आरक्षित 29 सीटों में से 25 सीटे जीत ली थी।

एससी, एसटी और आदिवासी वोटरों के सहारे लगातार 15 साल छत्तीसगढ़ में राज करने वाली भाजपा एक बार फिर पिछड़ों के वोट के सहारे छत्तीसगढ़ में सत्ता पाना चाहती है। इसके लिए अपने संगठन को चुस्त दुरूस्त करने के लिए भाजपा ने प्रदेश में कई बदलाव किए थे। तीन बार के विधायक नारायण चंदेल को नेता प्रतिपक्ष और बिलासपुर से सांसद अरुण साव को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता ओम माथुर को छत्तीसगढ़ के संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। ओम माथुर लगातार छत्तीसगढ़ में कैम्प कर संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।

हालांकि छत्तीसगढ में भाजपा का कमजोर पक्ष यह भी रहा है कि भाजपा भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ कोई मूवमेंट खड़ा नहीं कर सकी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती भूपेश बघेल के सामने चेहरे के अभाव की है। 15 साल मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह को प्रदेश की राजनीति से लगभग बाहर कर दिया गया है। फिलहाल भाजपा के पास ऐसा कोई चेहरा नहीं है जो लोकप्रिय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चुनौती दे सके। इसलिए चेहरे की बजाय संगठन के बल पर भाजपा भूपेश बघेल को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। ऐसे में तय है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी।

वहीं भूपेश बघेल प्रदेश में लोकप्रिय मुख्यमंत्री बन चुके हैं। मुख्यमंत्री रहते उन्होंने लगभग हर वर्ग को साधने की कोशिश किया है। कर्ज माफी से लेकर बेरोजगारी भत्ता तक कई ऐसी सरकारी योजनाएं हैं जिसका लाभ प्रदेश की जनता को मिला है। जहां तक प्रदेश में पिछड़ा वर्ग की राजनीति का बड़ा समीकरण है तो वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इसी वर्ग से आते हैं। इसलिए कांग्रेस पहले ही भूपेश बघेल के जरिए बैकवर्ड क्लास का कार्ड खेल रही है। वहीं भाजपा के आदिवासी नेता नंद कुमार साय के पार्टी छोड़कर कांग्रेस में चले जाने से भाजपा को तगड़ा झटका भी लगा है।

पार्टी को झटकों से उबारने और कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए प्रधानमंत्री मोदी छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार अभियान की शुरूआत करने 7 जुलाई को रायुपर आ रहे हैं। गौरतलब है कि पूरे भारत का भ्रमण करने वाले मोदी चार साल बाद छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। इसके पहले प्रधानमंत्री मोदी 8 फरवरी 2019 को रायपुर आए थे। 7 जुलाई को अपने रायपुर दौरे के दौरान मोदी रायपुर को 7 हजार करोड़ की योजनाओं की सौगात देंगे। मोदी 268 करोड़ रूपये से बनी रेलवे लाइन का उद्घाटन करने के साथ इंडियन ऑयल के बॉटलिंग प्लांट का उद्घाटन भी करेंगे। इसके साथ ही मोदी भारतमाला योजना और आईआईआईटी का भी भूमिपूजन करेंगे।

अगर भाजपा प्रदेश में चुनावी रूप से सक्रिय हो रही है तो कांग्रेस ने भी छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस हाईकमान ने छत्तीसगढ़ के स्वास्थ मंत्री टीएस सिंहदेव को छत्तीसगढ़ का डिप्टी सीएम बना दिया है। छत्तीसगढ़ को पहली बार उपमुख्यमंत्री का पद मिला है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की 15 साल बाद सत्ता में हुई वापसी में घोषणा समिति के अध्यक्ष रहे तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव की भूमिका महत्वपूर्ण थी। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री की दौड़ में भूपेश बघेल के अलावा टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू और चरणदास मंहत भी थे। लेकिन बाजी भूपेश बघेल के हाथ लगी। कहा गया था कि ढाई-ढाई साल का फार्मूला छत्तीसगढ में लागू होना था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। भूपेश बघेल पूरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बन गए। अब ऐसे में चुनाव के पांच महीने पहले टीएस सिंहदेव को उपमुख्यमंत्री बनाकर असंतोष को साधने की कोशिश की गई है।

प्रदेश की 90 विधानसभा सीटों में से अभी कांग्रेस के पास 71 और भाजपा के पास 14 सीटें हैं। लोकल बॉडीज इलेक्शन में कांग्रेस का दबदबा रहा है। प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों पर कांग्रेस का कब्जा है। 2018 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 43.2 प्रतिशत वोट मिले थे, वहीं भाजपा को 32.9 प्रतिशत वोट मिले थे। इससे पहले 2013 में कांग्रेस को 40.3 प्रतिशत वोट मिले थे वही भाजपा को 2013 में 41 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे। बीएसपी को यहां पर साल 2013 में 4.3 प्रतिशत वोट मिले थे। 2018 के चुनाव में बीएसपी ने अजीत जोगी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और इन चुनावों में पार्टी को 10.7 प्रतिशत वोट हासिल हुए। अब अजीत जोगी नहीं है और बसपा का भी आधार सिकुड़ गया है। ऐसे में पिछले चुनाव में जोगी और बसपा को संयुक्त रूप से मिले 10 प्रतिशत वोट पर नजर कांग्रेस और भाजपा दोनों की है। भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस और उसके बीच के 11 प्रतिशत वोट के फासले को पाटना है।

कांग्रेस जहां भूपेश बघेल की लोकप्रियता पर सवार होकर चुनाव में जाने की तैयारी कर रही है वहीं भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के संगठन कौशल पर निर्भर है। कांग्रेस हाईकमान ने छत्तीसगढ़ का पूरा चुनाव अभियान जहां प्रदेश नेतृत्व के हवाले कर दिया है वहीं भाजपा के प्रदेश नेतृत्व ने पूरा चुनाव मोदी और शाह के भरोसे छोड़ दिया है। इस कारण मोदी और शाह को छत्तीसगढ़ मे ताकत और तैयारियों का जायजा लेने आना पड़ रहा है। फिलहाल छत्तीसगढ़ की कमान शाह ने संभाल ली है। इसका संगठन में कितना असर होगा, यह आने वाले कुछ दिनों में पता चलेगा।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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