Lok sabha election 2024: आधी से ज्यादा सीटों पर चुनाव के क्या संकेत?

Matdaan pratishat: भारतीय जनता पार्टी के लिए तीसरे चरण की वोटिंग बहुत ही महत्वपूर्ण थी, क्योंकि तीसरे चरण में जिन 94 सीटों पर चुनाव हुआ उनमें से 72 पिछली बार भाजपा के पास थी। इसलिए यह तीसरा चरण तय करेगा कि भाजपा 2019 में जीती 303 सीटों का आंकड़ा बनाए रख सकती है, या उससे ज्यादा या कम सीटें हासिल करेगी।

पहले दो चरण की वोटिंग को भाजपा के लिए थोड़ा नुकसानदायक माना जा रहा था। पहले चरण की 102 में से 40 और दूसरे चरण की 89 में से 58 सीटें भाजपा के पास थी। अब तक जिन 285 लोकसभा सीटों पर चुनाव हो चुके हैं, पिछली बार इनमें से 170 सीटें भाजपा जीती थीं। इस बार भाजपा ने 230 सीटों पर खुद के उम्मीदवार खड़े किए हैं, जबकि 55 सीटों पर उसके सहयोगी चुनाव लड़ रहे थे।

lok sabha election 2024 What are the signs of elections on more than half the seats

पहले दो चरणों की वोटिंग क्योंकि 2019 के मुकाबले तीन प्रतिशत कम हुई थी, इसलिए भाजपा काडर में निराशा का माहौल था। चुनाव आयोग ने 11 दिन बाद जो अंतिम आंकड़े दिए थे, उनके मुताबिक़ पहले चरण में 66.14 प्रतिशत (2019 में 69.96 प्रतिशत) और दूसरे चरण में 66.71 प्रतिशत (2019 में 70.09 प्रतिशत) वोटिंग हुई थी। यह वोटिंग वाले दिन बताए गए आंकड़ों से काफी ज्यादा थे, इसलिए इस पर मीडिया में काफी चर्चा भी हुई, हालांकि गड़बड़ी की कोई आशंका नहीं है, क्योंकि वोटिंग के बाद हर बूथ पर उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट से वोटिंग की संख्या पर साईन करवा लिए जाते हैं, जिन्हें मतगणना के समय मैच किया जाता है।

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तीसरे चरण में उत्तर प्रदेश (10), बिहार (5), गुजरात (26) और महाराष्ट्र (11) के शाम पांच बजे के आंकड़े उत्साहवर्धक नहीं हैं। खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात से, जहां सभी 26 सीटों पर 56.23 प्रतिशत वोटिंग हुई है। इन चारों राज्यों में 53 से 56 प्रतिशत के बीच वोटिंग हुई। कर्नाटक फिर भी अच्छा रहा जहां 66.86 प्रतिशत वोटिंग हो गई। जबकि असम (75.01) और उसके पड़ोसी पश्चिम बंगाल में 74 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग हो गई। इन दोनों राज्यों की ज्यादा वोटिंग से निश्चित ही भाजपा को फायदा होने के चांस बनते हैं।

शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और गुजरात के कारण तीसरे चरण की वोटिंग में 2019 के मुकाबले ज्यादा गिरावट हुई है। चुनाव आयोग ने 60.76 प्रतिशत के आंकड़े दिए हैं, जबकि 2019 में 66.89 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, हालांकि जब एक दो दिनों में अंतिम आंकड़े आ जाएंगे तो संभावना है कि 6 प्रतिशत की मौजूदा गिरावट में कुछ कमी आएगी। संभावना है 64 प्रतिशत तक वोटिंग का आंकड़ा निकलेगा।

2014 में 66.44 और 2019 में 67.40 प्रतिशत मतदान हुआ था। अब जबकि 285 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है और सिर्फ 258 सीटों की वोटिंग बाकी बची है, तो अनुमान यही है कि 2024 की वोटिंग 2014 की वोटिंग को भी मैच नहीं कर पाएगी। लेकिन एक बात ध्यान रखनी चाहिए कि 2009 के मुकाबले 2014 के चुनाव में 8.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। 2009 में सिर्फ 58.21 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। इतनी बड़ी बढ़ोतरी बड़े बदलाव का संकेत थी, और वह हुआ भी था।

लेकिन इस बार 2019 के मुकाबले अगर ढाई से तीन प्रतिशत की गिरावट होती है तो निश्चित ही भाजपा के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। लेकिन विपक्षी दलों के लिए उत्साह का तो कोई कारण ही नहीं बनता। उत्तर प्रदेश की मैनपुरी सीट को ही लें, जहां अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव उम्मीदवार है, वहां सिर्फ 58.39 प्रतिशत वोटिंग हुई है। सिर्फ संभल ऐसी सीट है जहां साठ प्रतिशत से ज्यादा (62.40 प्रतिशत) वोटिंग हुई। बदायूं जहां अखिलेश यादव के भाई आदित्य यादव चुनाव लड़ रहे हैं, वहां सिर्फ 53.83 प्रतिशत, फिरोजाबाद जहां अखिलेश के भाई अक्षय चुनाव लड़ रहे हैं, वहां 56.69 प्रतिशत ही वोटिंग हुई है।

इसमें कोई शक नहीं कि वोटिंग कम होने से भाजपा को यथास्थिति बरकरार रखने में ही मुश्किल पेश आएगी, 370 तो बहुत दूर की बात है। पहले चरण की कम वोटिंग की खबर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में विपक्ष खासकर कांग्रेस के प्रति हमलावर रूख अपना लिया था। जिसकी शुरुआत उन्होंने 21 अप्रेल को राजस्थान की बांसवाडा सीट से की, जब उन्होंने कांग्रेस घोषणा पत्र के सम्पत्ति के बंटवारे वाले मुद्दे को कुछ इस तरह से उठाया था कि कांग्रेस उनके खिलाफ शिकायत लेकर चुनाव आयोग पहुंच गई थी।

मोदी ने कहा था कि कांग्रेस महिलाओं का मंगलसूत्र तक छीन लेगी। कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि वह सत्ता में आने पर जाति आधारित जनगणना के साथ साथ लोगों की संपत्ति का सर्वे भी करवाएगी। मोदी ने मनमोहन सिंह के भाषण को याद करते हुए कहा था कि कांग्रेस ने कहा था कि देश की संपत्ति पर पहला हक मुसलमानों का है, इसलिए कांग्रेस उनसे सोना-चांदी जमीन जायदाद छीन कर उन्हें दे देगी, जो ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं।

इससे पहले नरेंद्र मोदी ने 12 साल मुख्यमंत्री और दस साल प्रधानमंत्री रहते हुए सीधे तौर पर कभी हिन्दू-मुस्लिम नहीं किया था। आम धारणा यह बनी कि मोदी की यह भाषा वोटिंग प्रतिशत गिरने का परिणाम है। भाजपा के रणनीतिकार अमित शाह ने इशारों में ही सही राजस्थान में दो सीटें हारने का आकलन किया है, जबकि 2014 और 2019 में भाजपा सभी 25 सीटें जीती थीं। पिछले चुनाव में भाजपा ने नागौर की लोकसभा सीट अपने सहयोगी आरएलपी के हनुमान बेनीवाल के लिए छोड़ी थी, इसबार वह कांग्रेस के समर्थन से चुनाव लड़े और भाजपा सभी 25 सीटों पर चुनाव लड़ी। लेकिन अमित शाह के दो सीटें कमजोर होने के आकलन के बावजूद भाजपा चार से आठ तक सीटें हार सकती है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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