चार सौ पार नहीं, अब पूर्ण बहुमत की दरकार
BJP Seats: भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत चार सौ पार के नारे के साथ की थी। लेकिन जैसे जैसे मतदान होता जा रहा है भाजपा का लक्ष्य भी सिकुड़ता जा रहा है। चार सौ पार की जगह अब भाजपा ने तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार को अपना नारा बना लिया है।
असल में देश में चल रहे आम चुनाव में मतदान के हर चरण के बाद प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भाजपा को मिलने वाली सीटों का आंतरिक आकलन कर रहे हैं। अमित शाह हर चरण के मतदान के बाद देर रात सभी प्रदेश अध्यक्षों और संगठन महामंत्रियों से बात करते हैं और मतदान के बाद की जानकारी प्रधानमंत्री मोदी को दे रहे हैं।

अभी तक अमित शाह चार चरणों के मतदान की जानकारी मोदी के पास पहुचा चुके हैं। भाजपा हाईकमान का आकलन है कि उत्तराखंड की सभी पांच सीटें भाजपा जीत रही है। राजस्थान की 25 लोकसभा सीटों में भाजपा 3 सीटों का नुकसान मानकर चल रही है। 2014 में भाजपा ने राजस्थान की सभी 25 सीटें जीत ली थी। 2019 में भाजपा ने 24 और नागौर की एक सीट गठबंधन सहयोगी आरएलपी ने जीती थी।
दक्षिण के सबसे बड़े राज्य तमिलनाडु जहां से 29 सीटें आती है वहां भाजपा एक सीट पर जीत निश्चित मान कर चल रही है और वह सीट है प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई की सीट कोयम्बटूर। इसके अलावा अन्नामलाई ने दो और सीटें भाजपा के पक्ष में आने का भरोसा केन्द्रीय नेतृत्व को दिया है।
दक्षिण भारत के राज्य केरल में जहां की सभी 20 सीटों पर दूसरे चरण में मतदान हुआ था, वहां से भाजपा को दो सीट पर जीत की उम्मीद नजर आ रही है। दक्षिण से ही आने वाले राज्य और भाजपा का मजबूत गढ़ रहे कर्नाटक राज्य में भाजपा को भरोसा है कि उसने डैमेज कंट्रोल कर लिया है। कर्नाटक में मतदान पूरा हो चुका है और भाजपा का अनुमान है कि वह कर्नाटक की 28 सीटों में 21-22 सीटें जीत रही है। भाजपा का यहां पर जेडीएस से गठबंधन है।
उत्तर पूर्व से आने वाली 25 सीटों पर पहले दो चरणों में मतदान हो चुका है। बीजेपी को उम्मीद है कि वह यहां से 20 सीटें जीतने जा रही है। 2019 में इन 25 सीटों में से भाजपा को 15 सीटें मिली थी। नार्थ ईस्ट की जिम्मेवारी इस बार पूरी तरह से असम के सीएम हेमंत बिस्वा सरमा के कंधों पर थी।
पहले चार चरणों में मध्य प्रदेश की 29 सीटों पर हुए मतदान में बीजेपी का आकलन है कि मध्य प्रदेश में उसे 29 में से 28 सीटे मिलने जा रही है। इसका मतलब यह है कि भाजपा ने 2019 के अपने प्रदर्शन को इस राज्य में बरकरार रखा है। मध्य भारत के एक और राज्य छत्तीसगढ़ में जहां भाजपा ने कुछ माह पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया है, इस राज्य की सभी 11 लोकसभा सीटें जीतने का दावा कर रही है।
भाजपा जिन राज्यों को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम में है, उन राज्यों में महाराष्ट्र की 48, बिहार की 40, पश्चिम बंगाल की 42 सीटों के साथ हरियाणा की 10 सीटें भी शामिल है। महाराष्ट्र की 35 सीटों पर, बिहार की 19 सीटों पर, पश्चिम बंगाल की 18 सीटों पर मतदान हो चुका है। महाराष्ट्र में 20 मई को पांचवे चरण की 13 सीटों पर मतदान होने के साथ ही महाराष्ट्र में मतदान पूरा हो जाएगा।
भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र, बिहार और पश्चिम बंगाल से आने वाली 130 सीटों पर भारी नुकसान से बचने की हरसंभव कोशिश कर रही है। बंद दरवाजे के पीछे भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार इस बात को मान रहे हैं कि महाराष्ट्र में उसे नुकसान हो रहा है और उसके सहयोगी दल भी उसके नुकसान को बढा ही रहे हैं। इसी तरह इस बार बिहार में नीतीश को साथ लेना भाजपा को भारी पड़ रहा है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि 'नीतीश को साथ लेना एक भारी भूल साबित हुई। नीतीश के बिना हम ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर पाते।'
पश्चिम बंगाल में भाजपा को भरोसा था कि संदेशखाली और सीएए उसके पक्ष में भारी बढ़त लेकर आएगा लेकिन जमीनी स्तर से आ रही खबरों ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल में ममता का दुर्ग ढहाने की भाजपा की इच्छा पूरी होती नजर नहीं आ रही है। बंगाल में अभी तक चार चरणों में कुल मिलाकर 18 सीटों पर मतदान हो चुका है। ध्रुवीकरण की कोशिशों के बाद भी यहां भाजपा अपने 2019 के प्रदर्शन के आसपास ही पहुंचती दिख रही है जब उसने राज्य में 18 सीटें जीती थीं। इस बार पश्चिम बंगाल से 25 सीटें जीतने का भाजपा का सपना शायद सपना ही रह जाएगा।
उत्तर प्रदेश में चार चरणों में मिलाकर अभी तक 39 सीटों पर मतदान हो चुका है। मतलब यूपी की 80 सीटों में लगभग आधी सीटों पर मतदान हो चुका है। उत्तर प्रदेश में भाजपा को मायावती और अखिलेश के साथ न होने का फायदा मिल रहा है। भाजपा देश के सबसे बड़े राज्य से इस बार 80 में से 75 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
दिल्ली से सटे हरियाणा में 2019 में भाजपा ने सभी 10 सीटें जीती थी, लेकिन इस बार हरियाणा की राजनीतिक उठापटक के कारण उसे नुकसान हो रहा है। हरियाणा में भाजपा के टिकट वितरण ने भी भाजपा की अंदरूनी कलह को बढ़ा दिया है। ऐसे में छठे चरण में 25 मई को होने वाले हरियाणा के चुनाव में भाजपा को 3 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है।
दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के चुनाव प्रचार के लिए जमानत पर बाहर आने के बाद भी भाजपा का आकलन है कि दिल्ली की सभी सात सीटें वह जीत रही है। पंजाब से भाजपा को कोई खास उम्मीद नहीं है। 2019 में भाजपा ने दो सीटें जीती थी। अकाली दल से अलग होकर और ज्यादातर सीटों पर दूसरे दलों से आए दलबदलुओं को टिकट देकर भाजपा रेस में बने रहने की कोशिश कर रही है।
लेकिन पंजाब में आप पार्टी सब पर भारी पड़ रही है। बीजेपी पंजाब में अपनी दो सीटें बचाने से ज्यादा कांग्रेस की 2019 में जीती आठ सीटों पर हार सुनिश्चित करना चाहती है। पंजाब में कांग्रेस की बुरी हार ही भाजपा की जीत होगी। कारण स्पष्ट है अगर कांग्रेस को तीसरी बार विपक्ष का नेता बनने लायक सीटें नहीं मिलने देना है तो ऐसे में कांग्रेस की पंजाब में हार भाजपा के लिए जरूरी है।
बहरहाल, चार चरणों के मतदान के बाद भाजपा 400 पार के नारे को सार्वजनिक रूप से बोलने से बच रही है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का आकलन है कि अबकी बार 400 पार नहीं बल्कि 2014 और 2019 में जीती सीटों के बीच कहीं जाकर आंकड़ा रूक सकता है। फिर भी भाजपा किसी भी हालत में अपने प्रदर्शन को 282 से नीचे आते हुए नही देखना चाहती। यही कारण है कि चार चरण मतदान के बाद भाजपा ने 370 की जिद छोड़ दी है। अब भाजपा लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार नारे पर फोकस कर रही है। इस नारे की शुरूआत अमित शाह बिहार और बंगाल से कर चुके हैं।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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