Internet Down: इंटरनेट हमेशा के लिए बंद हो जाए तो हम क्‍या करेंगे?

Internet Down: मंगलवार को दुनिया भर के नेटीजन एक बार फिर सकते और सदमे में आ गए। वजह थी, एक घंटे के लिए कथि‍त रूप से 'किन्‍हीं तकनीकी कारणों के चलते' मेटा के स्‍वामित्‍व वाले फेसबुक और इंस्‍टाग्राम का डाउन हो जाना।

न यूजर कोई मैसेज भेज पा रहे थे, न अपनी पोस्‍ट रिफ्रेश कर पा रहे थे। कुछ लॉग-इन नहीं कर पा रहे थे और कुछ खुद ब खुद लॉगआउट हो गए। इस दौरान कई लोगों ने एप्‍प डिलीट कर रिइंस्‍टाल करने तक बहुत सारे टोटके आजमाए, लेकिन इन दोनों प्‍लेटफॉर्मों का इस्तेमाल कर पाने में नाकाम रहे।

Internet Down

सिर्फ एक घंटे के भीतर फेसबुक को यूजर्स की 5.5 लाख से ज्‍यादा शिकायतें मिलीं और इंस्‍टाग्राम को करीब 92 हजार। सोशल मीडिया के एडिक्‍टों के लिए तो संभवत: यह एक ऑनलाइन कयामत आ जाने जैसा ही रहा होगा। इन प्‍लेटफॉर्मों के नए यूजर्स के लिए बेशक यह पहला ही मौका होगा, लेकिन पुराने यूजर्स पिछले साल जून और जुलाई में इसी तरह की स्थिति का सामना कर चुके हैं।

पहले वाली घटना में फेसबुक, इंस्‍टाग्राम और व्‍हाट्सएप्‍प शिकार बने थे, जो कई घंटे तक बंद रहे। तब वजह मेटा के इंटरनल सिस्‍टम में एक तकनीकी गड़बड़ी बताई गई थी। एक ही महीने बाद घटना की पुनरावृत्ति हुई और फेसबुक व इंस्‍टा के लाखों यूजर्स एक घंटे तक इनका इस्‍तेमाल नहीं कर पाए। इस बार मेटा की ओर से ऑफिशियली कोई वजह पेश नहीं की गई, लेकिन इसे इंटरनल कन्‍फिगरेशन में बदलाव से जोड़कर देखा गया था।

ऐसा ही एक बड़ा वाकया दिसंबर 2020 में भी हुआ था, जब गूगल की विभिन्‍न सेवाओं के उपयोगकर्ताओं को करीब 45 मिनट तक इनसे वंचित रहना पड़ा। छटपटाते हुए वे तीन अरब यूजर 'इंटरनेट गॉड तो नहीं, लेकिन गॉड से कम भी नहीं...' का अहसास कर रहे थे, जब वे गूगल डॉक्यूमेंट्स, गूगल मैप्स, गूगल कैलेंडर, गूगल स्लाइड्स, ब्लॉगर, जीमेल और यूट्यूब जैसी कई सेवाओं और एप्लिकेशंस का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे।

जब भी लोग गूगल की कोई सर्विस एक्सेस करने की कोशिश करते, हर बार एक एरर कोड के साथ '... दिस इज ऑल वाट वी कैन टैल' मैसेज उनकी स्‍क्रीन पर आ जाता। इससे इनकी बेचैनी और भी बढ़ जाती और उन्हें यकीन होने लगता कि जरूर यह कोइ ऐसा हादसा है, जिसने उन्हें ही नहीं, बल्कि सर्वशक्तिमान गूगल को भी विवश करके रख दिया है। यह ऐसा ही था, जैसे आपकी ट्रेन रास्‍ते में कहीं लंबे समय तक के लिए ठहरी हो और कोई बताने वाला न हो कि आखिर हुआ क्‍या है।

कुछ घंटों के लिए इंटरनेट या सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल न कर पाने पर इस कदर बौखला जाने वाली हमारी यह प्रवृत्ति हैरान भी करती है और चिंतित भी। यह सिर्फ मेटा या फेसबुक या इंस्‍टाग्राम की नहीं, बल्कि पूरे समाज की समस्‍या है। पिछले तीन-चार सालों में सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल और दखल बेइंतहा बढ़ा है। इतना ज्‍यादा कि आज हम इसके बिना जीवन की कल्‍पना तक नहीं कर पा रहे हैं।

इस संदर्भ में हम लोगों का जो व्‍यवहार है, उसे देखते हुए लगता है कि जैसे हवा, पानी और भोजन की तरह इंटरनेट भी हमारे जीवन की मूलभूत आवश्‍यकता बन चुकी है। सिर्फ गूगल या फेसबुक या इंस्‍टा इस्‍तेमाल न कर पाने की वजह से ही हम अधमरी अवस्‍था में पहुँच जाते हैं, सोचिए कि क्‍या हो अगर इंटरनेट ही ठप्‍प हो जाए?

एक मिनट के लिए भी इंटरनेट बंद हो जाए तो क्‍या होगा, यह समझने के लिए पिछले साल सबसे ज्‍यादा इस्‍तेमाल होने वाले प्‍लेटफॉर्मों पर बिताए गए वक्‍त में से सिर्फ एक मिनट में हुई गतिविधियों पर नजर डालते हैं।

वर्ष 2023 में हर मिनट फेसबुक पर 2.2 लाख मैसेज शेयर किए गए व 1.8 लाख फोटो अपलोड हुए, यूट्यूब पर 600 घंटे के वीडियो अपलोड किए गए, इंस्टाग्राम पर 4.5 लाख स्टोरीज पोस्ट की गईं, रेडिट पर 6.3 लाख लोग एंगेज रहे, जूम पर 2.7 लाख मीटिंग होस्ट की गईं, नेटफ्लिक्स पर 5.4 लाख घंटे की स्ट्रीमिंग हुई, व्हाट्सएप्प पर 55.5 लाख मैसेज शेयर किए गए और 1.85 लाख वीडियो/वॉयस कॉल की गईं, ट्विटर पर 420 नए यूजर्स जुड़े, 3.6 हजार लोगों ने टिकटॉक इंस्टॉल किया, 92 हजार लिंक्‍डइन यूजर्स ने जॉब के लिए अप्लाई किया, एप्‍स पर 4.95 लाख डॉलर और ऑनलाइन खरीदारी में 13 लाख डॉलर खर्च किए गए। अगर एक मिनट के लिए भी इंटरनेट बंद हो जाए तो इतना सब नहीं हो पाएगा।

1995 में दुनिया में इंटरनेट यूजर्स की तादाद महज एक फीसदी थी, जो आज पच्चीस सालों में बढ़कर लगभग 52.4 फीसदी हो चुकी है। एक दशक पहले यानी वर्ष 2014 के तीन अरब इंटरनेट यूजर्स की तुलना में आज करीब ढाई गुना ज्‍यादा, यानी लगभग साढ़़े सात अरब लोग इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं। मान लीजिए कि इनमें आधे यूजर्स ही ऐसे हैं, जो अपने जरूरी कामों के लिए इंटरनेट पर आश्रित हैं तो भी इसका यह अर्थ होगा कि दुनिया की एक तिहाई से ज्यादा आबादी इंटरनेट के न रहने पर अपंग हो जाएगी।

संचार, सुरक्षा, एडमिनिस्ट्रेशन, ई-गवर्नेंस, स्पेस मिशन, परिवहन, ई-कॉमर्स, तकनीक, उद्योग-व्यापार जैसे अनगिनत क्षेत्रों पर तो इसका जो प्रत्‍यक्ष असर पड़ेगा, वह तो है ही, यह भी हो सकता है कि इसका परोक्ष असर विश्व की तीन चौथाई से ज्यादा जनसंख्‍या को अपनी चपेट में ले ले। जैसा कि अनुमान लगाया गया है, अगले एक दशक में दुनिया की शत-प्रतिशत आबादी पढ़ाई, कामकाज, मनोरंजन, रिश्‍तों जैसी जरूरतों के लिए इंटरनेट पर निर्भर हो चुकी होगी। अगर किसी वजह से इंटरनेट की सभी सेवाएं हमेशा के लिए ठप्‍प पड़ जाएं तो हम क्‍या करेंगे?

इंटरनेट-मुक्‍त समाज किसी साइंस फिक्‍शन में की गई कल्‍पना नहीं है, बल्कि एक आसन्‍न खतरे का अनुमान है, जो इंटरनेट यूजर्स की लगातार बढ़ती तादाद के साथ-साथ गहराता जाएगा। बढ़ते इंटरनेट यूजर्स ही नहीं, बल्कि ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जो इस डर को वास्‍तविकता में बदल सकती हैं। कोई एस्टरायड आकर इंटरनेट प्रदान करने वाले उपग्रह से टकरा सकता है या कोई सोलर तूफान सारे कम्युनिकेशन सिस्टम को तहस-नहस कर सकता है।

यह भी हो सकता है कि कोई खुराफाती हैकिंग ग्रुप सेंध लगाए और सारे सर्वरों को नष्ट करके अज्ञातवास में चला जाए। इंटरनेट प्रोवाइड कराने वाले गूगल के गुब्बारों की हवा निकल सकती है, कोई सुनामी या शार्कों की फौज महासागरों की तलहटी में बिछे 574 सबमैरीन कम्युनिकेशन केबल सिस्टमों को डैमेज कर सकती है, जिनके माध्यम से 99 प्रतिशत डाटा प्रवाहित होता है। कुछ भी हो सकता है, क्योंकि दुर्घटनाओं को कारण की नहीं, बल्कि अवसर की जरूरत होती है।

अब सवाल यह है कि ऐसी इंटरनेट विहीन दुनिया में क्‍या हम सब कुछ फिर से नए सिरे से शुरू कर पाएंगे, या सब कुछ खत्‍म होते हुए देखने के लिए विवश होंगे? वर्ष 2023 में प्रति व्‍यक्ति औसतन 6 घंटे 40 मिनट इंटरनेट पर बिताये गए। मान लेते हैं कि आप भी उन औसत यूजर में से एक हैं। कल्‍पना कीजिए कि आज वह दिन आ पहुँचा है, जब इंटरनेट ने हमेशा-हमेशा के लिए काम करना बंद कर दिया है। अब सोचना शुरू करते हैं कि आपके साथ आज क्‍या-क्‍या होने वाला है।

संभावित मंजर कुछ ऐसा होगा- व्हाट्सएप्प और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया एप्प पर न आप अपनी खबर अपने कॉन्टेक्ट्स तक पहुँचा पा रहे हैं और न उनकी खबर पा रहे हैं। आपको अपने बिल पे करने हैं, लेकिन क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, ई-वैलेट सब काम करना बंद कर चुके हैं और आप समझ नहीं पा रहे हैं कि इनका भुगतान करने के लिए कहाँ जाएं? आप खाने-पीने की चीजों से लेकर ग्रॉसरी तक कुछ भी मंगा नहीं पा रहे हैं, ओटीटी पर अपनी पसंद के गाने सुनने या वेब सीरीज देखने की इच्‍छा पूरी नहीं कर पा रहे हैं, इंटरनेट ऑफ थिंग्स के अंतर्गत खरीदे गए आपके सारे गैजेट्स और मशीनें काम करना बंद कर चुके हैं।

कहीं जाना था, लेकिन अब एड्रेस या लोकेशन नहीं खोज पा रहे हैं, कुछ जरूरी ईमेल भेजनी थीं, जो अब नहीं जा पा रही हैं, आपने जो भी जरूरी डॉक्यूमेंट्स क्लाउड में अपलोड कर रखे थे वे सब आपकी पहुँच के दायरे से बाहर हो चुके हैं.. यह सूची बहुत लंबी हो सकती है, लेकिन, इतना भी एक सामान्‍य व्‍यक्ति को पैनिक करने के लिए कम नहीं है।

शुक्र मनाएं कि अभी भी करीब आधी दुनिया बाकी है, जो ऑफलाइन चल रही है। इसका मतलब यह है कि आपकी आधी से ज्यादा जरूरतें खुद घर से बाहर निकलते ही पूरी हो सकती हैं। लेकिन हम इसकी आदत छोड़ चुके हैं और अपनी हर जरूरत, हर शौक, हर काम के लिए इंटरनेट पर अपनी निर्भरता बढ़ाते जा रहे हैं। बस, अधिक से अधिक चीजों को डिजिटल बनाते जा रहे हैं और उनकी भौतिक उपस्थिति को खत्‍म करते जा रहे हैं।

हालांकि इसकी संभावना न के बराबर है, फिर भी अगर मान लें कि किसी दिन इंटरनेट हमारा साथ छोड़ देगा तो इंटरनेट के न रहने पर जो हालात सामने आ सकते हैं, क्या उसके लिए हमने कोई तैयारी कर रखी है? इन तैयारियों के बिना, क्या आप एक इंटरनेट विहीन संसार में जीने की कल्पना कर सकते हैं? अगर नहीं, तो यह चेतने का समय है।

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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