Pakistan Electricity Bills: चांद पर भारत, सड़क पर पाकिस्तान
Pakistan Electricity Bills: ऐसे समय में जब पूरी दुनिया में भारत की चर्चा चांद पर पहुंचने के कारण हो रही है ठीक उसी समय में पाकिस्तान किसी और ही कारण से चर्चा में है। पाकिस्तान की जनता इस समय सड़कों पर है। 51 रूपये प्रति यूनिट की दर से भारी भरकम बिजली बिल चुकाने की क्षमता पाकिस्तान के लोगों में नहीं है। वो समझ नहीं पा रहे हैं कि बिजली बिल चुकाने के लिए किडनी बेचें या वतन छोड़ कर चले जाएं?
पाकिस्तान की केयरटेकर गवर्नमेन्ट इस बारे में राहत का भरोसा तो दे रही है लेकिन सच्चाई यह है कि राहत देने का कोई अधिकार उसके पास नहीं है। बिजली की बढ़ी दरों में अगर कोई राहत दे सकता है तो वह है आईएमएफ क्योंकि उसने कड़ी शर्तों के साथ ऋण देना मंजूर किया है। मजबूरी का आलम देखिए कि बिजली के बिलों को बढ़ाने का फैसला करने वाली सरकारों में शामिल रहे सभी राजनीतिक दल भी इस समय जनता के बिजली बिल विरोधी प्रदर्शन का समर्थन कर रहे हैं।

पाकिस्तान के सियालकोट, मुल्तान, मुजफ्फरगढ़, मंडी बहाउद्दीन, गुजरावालां, हैदराबाद, गुजरात, ओकारा, शाहकोट और अबोटाबाद में इन दिनों महंगी बिजली के खिलाफ जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन चल रहा है। पाकिस्तान में इस समय बिजली की दर 51 रुपये प्रति यूनिट है, जो नागरिकों के लिए बहुत ज्यादा है। एक कमरे के मकान में भी 12 हजार रूपये का बिल आ रहा है।
गरीब पाकिस्तानियों के लिए यह तय करना मुश्किल है कि वह एक कमरे के मकान के लिए 12 हजार रुपये का बिजली बिल दे, या कि 180 रुपये प्रति किलो आटा खरीदे, महंगी गैस लें या अपने बच्चों के लिए दवा और स्कूल के खर्च उठाएं। 600 रुपये की दिहाड़ी कमाने वाला ये खर्चे भला कैसे पूरा कर पायेगा? एक तरफ तो आम आदमी से बिजली बिल के साथ 9 टैक्स भी मांगे जा रहे हैं और दूसरी तरफ पाकिस्तान में ही वहां के बड़े अधिकारी, मंत्री और जजों को मुफ्त की बिजली दी जा रही है।
पाकिस्तान में हर चीज की महंगाई पिछले पांच सालों से बेतहाशा बढ़ी है। मुद्रास्फीति की दर 28 प्रतिशत है। यह मुल्क आंतरिक और बाहरी दोनों तरह के कर्जों में वर्षाें से उलझा पड़ा है। उसे हर साल अपने खर्चों को पूरा करने के लिए सउदी अरब, चीन और आईएमएफ से कर्ज की जरूरत पड़ती है। मुल्क का यह हाल है कि 1950 से ही यह आईएमएफ के प्रोग्राम में है और लगभग 25 बार यह आईएमएफ से कर्जा ले चुका है।
अभी 30 जून को तीन अरब डॉलर का ताजा कर्ज स्टैंड बाई अरेंजमेंट के रूप में लिया है। आईएमएफ ने कर्ज तो दिया लेकिन उसकी अदायगी को सुनिश्चित करने के लिए वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढाने की शर्त भी लाद दी। मौजूदा केयरटेकर सरकार के लिए यह संभव नहीं है कि वह आईएमएफ की शर्तों का उल्लंघन कर जनता को बिजली बिल में कोई राहत प्रदान करे। अवाम की बगावत के बावजूद सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। कार्यवाहक सरकार कॉस्मेटिक चेंज कर जनता को फिलहाल समझाने की कोशिश में लगी है।
पाकिस्तान में बिजली महंगी होने के एक नहीं कई कारण हैं। लेकिन फिलहाल सबसे बड़ा कारण पाकिस्तनी करेंसी का अवमूल्यन है। इस समय एक डॉलर का भाव 300 पाकिस्तानी रुपये से अधिक है और आने वाले दिनों में इसके कम होने के आसार नहीं है। डॉलर महंगा होने का असर सीधा बिजली बिल की दर पर आता है, क्योंकि पाकिस्तान को कर्ज और ब्याज का पेमेंट डॉलर में ही करना है, जिसके लिए पाकिस्तान के आम नागरिक को अर्थ दंड भरना पड़ता है।
पाकिस्तान ने लगभग सभी पावर प्लांट लगाने के लिए विदेशी एजेंसियों से कर्ज लिए हैं जोे इस समय लगभग 2.5 खरब रूपये है। कुल जीडीपी का लगभग तीन प्रतिशत। आईएमएफ ने इन्हें कम करने का लक्ष्य पाकिस्तान को दिया है। यही कारण है कि जून में आईएमएफ की सलाह पर ही पाकिस्तान ने बिजली के बिल में 7 रुपये प्रति यूनिट बढ़ाने का फैसला किया था।
कुछ खास लोगों को बिजली मुफ्त देने, कुछ को बिजली सब्सिडी देने और काफी बड़ी संख्या में बिजली की चोरी में लिप्त लोगों के कारण भी पाकिस्तान का बिजली विभाग पूरी तरह से चरमरा गया है। इस समय पाकिस्तान में 10 बिजली वितरण कंपनियां हैं, जिनमें से 9 सेन्ट्रल गवर्नमेन्ट के अधीन है और एक निजी क्षेत्र की कंपनी है। ये सभी कंपनियां घाटे में हैं। 2022 में इन बिजली वितरण कंपनियों का कुल घाटा 170 अरब रूपये था।
इन घाटों की भरपाई या तो वहां थोड़े से टैक्स देने वालों से होती है,या फिर सरकारी खजाने से। अब आईएमएफ की शर्त के मुताबिक पाकिस्तानी सरकार को इन घाटों की वसूली बिजली उपभोक्ताओं से ही करनी है। इसीलिए बिजली के बिल में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यह भी कम दिलचस्प आंकड़ा नहीं है कि बिजली कंपनियों का डिस्ट्रीब्यूशन लॉस 18 प्रतिशत से अधिक है, यानी बिजली की चोरी पाकिस्तान में आम बात है।
भ्रष्टाचार पाकिस्तान में एक बहुत बड़ा मुद्दा है। हर आने वाली नई सरकार पिछली सरकारों पर भ्रष्टाचार के केस बनाती है और नेताओं को जेल भेज देती है। बिजली के क्षेत्र में भी यही स्थिति है। नवाज शरीफ पर यह आरोप लगा था कि रिश्वत लेने के चक्कर में उन्होंने दनादन नये पावर प्लांट लगवा दिए और जरूरत नहीं होने के बावजूद बिजली उत्पादन क्षमता दोगुनी कर दी। नवाज शरीफ ने अपने जमाने में 45 हजार मेगावाट क्षमता की उत्पादन इकाई लगवा दी, जबकि वितरण की क्षमता पाकिस्तान में 26 हजार मेगावाट की ही थी। अब उन नये पावर प्लांट के लिए जो कर्ज लिए गए उसकी भरपाई आम जनता को करनी पड़ रही है। पीएमएलएन के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खक्कान अब्बासी को तो एलएनजी आयात घोटाले के आरोप में जेल भी भेजा गया था।
पाकिस्तान की जनता के लिए आने वाला समय और कठिन होने वाला है। सर्दियों के आते ही पाकिस्तान में ऊर्जा संकट हर साल आता है। इस समय पाकिस्तान में कोई नियमित सरकार भी नहीं है। खजाना खाली है और डॉलर की भारी कमी है। एलएनजी और अन्य उर्जा के स्रोतों की खरीद के लिए सरकार के पास धन नहीं हैं। पिछले दो तीन सालों से रसोई गैस की भी भारी किल्लत आ रही है।
ऐसे में पाकिस्तान में बिजली के साथ साथ डीजल, पेट्रोल और गैस का संकट भी आने वाला है। अभी हाल ही में आईएमएफ की शर्त के अनुसार पेट्रोल की कीमत में एक साथ 20 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी और आने वाले दिनों में इसे और बढ़ाए जाने की आशंका है। डीजल और पेट्रोल 300 रुपये प्रति लीटर के आस पास पहुंच गए हैं।
इन सबके कारण पाकिस्तान में जिस तरह के राजनीतिक और आर्थिक हालात हैं, उसे देखकर नहीं लगता कि पाकिस्तानी अवाम को फिलहाल मंहगाई से कोई राहत मिलने वाली है। इसलिए आनेवाले दिनों में भी उसे सड़क पर उतरकर धरना प्रदर्शन ही करना पड़ेगा लेकिन पाकिस्तान के आर्थिक हालात इतने खराब हैं कि उन्हें फिलहाल कोई राहत नहीं मिलने वाली।
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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