बल्लभगढ़ की घटना पर समाज को दिशा देने वाले लोगों व राजनेताओं की संवेदना व्यक्त करने पर चुप्पी समझ से परे!
अपने क्षणिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए,
ये कैसा दौर चल रहा ऐ दुनिया वालों,
समाज को दिशा देने वालों लोगों के भी,
सत्य बोलने में अब हाथ कांपते हैं यारों।।

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हरियाणा के बल्लभगढ़ में घटित घटना पर मुझे अपनी ये पंक्तियां बरबस याद आ गयी, पिछले कुछ वर्षों से हमारे देश में जघन्य आपराधिक घटनाओं पर भी कुछ राजनेताओं, कुछ समाजसेवी व चंद बुद्धिजीवी लोगों की कृपा से आयेदिन ओछी राजनीति की जाती है। वोट बैंक के लिए समाज को बाट़ने वाली राजनीति करने वाले चंद राजनेता व अन्य तथाकथित बुद्धिजीवी लोग हमारे समाज को बेहद चालाकी के साथ हिंदू, मुस्लिम, अगड़े-पिछड़े, शहर-गांव, अमीर-गरीब में विभाजित करके, अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए बेहद ज्वंलत मुद्दों पर भी समाज को बांटने का कार्य कर रहे हैं। अफसोस व चिंताजनक बात यह है कि हमारे देश की नौकरशाही में बैठे बहुत सारे लोग भी उसी उपरोक्त आधार पर कार्य करके लोगों से भेदभाव करते हैं और आम लोगों के अधिकारों का हनन करते हैं। इस तरह की कार्यशैली से हमारा सिस्टम व व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो जाती है और किसी भी क्षेत्र में आशानुरूप सफलता प्राप्त नहीं हो पाती है। जिन लोगों, बुद्धिजीवियों राजनेताओं व नौकरशाहों पर 'सबका साथ सबका विकास' करने की जिम्मेदारी है उसमें से अधिकतर अपनी सीमित सोच के चलते, भेदभाव वाले रवैये के चलते वोट बैंक के अनुसार कार्य करने में विश्वास रखते हैं, जो स्थिति देश व समाज हित में बिल्कुल भी ठीक नहीं है। देश में इस तरह की यह हालात हमारे सभ्य समाज के अस्तित्व के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन रही है, इस सोच के चलते देश में अपराध व भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया है। इंसान का तेजी से पतन हो रहा है, इंसानियत व मानवीय संवेदनाओं की आयेदिन सरेआम सड़कों पर हत्या हो रही है।

जिस तरह से देश की राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के जनपद फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में 26 अक्तूबर सोमवार की शाम को बीकॉम फाइनल ईयर की एक छात्रा की सरफिरे नव युवक तौसीफ ने गोली मारकर हत्या कर दी थी, वह समाज को भयभीत करने वाला अक्षम्य अपराध है। पुलिस सूत्रों के अनुसार यह घटना एकतरफा प्यार के चक्कर में घटित हुई है। जिस तरह से सरेआम दिनदहाड़े बल्लभगढ़ के अग्रवाल कॉलेज से परीक्षा देकर अपनी सहेली के साथ निकली छात्रा को कॉलेज के पास ही एक आई-20 कार में सवार एक दुस्साहसी नव युवक ने अपने साथी के साथ जबरदस्ती खींचकर जबरन गाड़ी में बैठाने की कोशिश की थी, वह देश में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति को दर्शाती है, लेकिन छात्रा को कार में बैठाने से नाकाम रहने पर नाराज होकर तौसीफ नामक युवक ने उसे गोली मार दी थी और अपराधी घटना को अंजाम देकर तमाशबीन बनी कायर भीड़ के चलते बेखौफ होकर घटनास्थल से अपने साथी रेहान के साथ कार लेकर मौके से फरार हो गया था। इसके बाद छात्रा को तुरंत इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। जिसके बाद से क्षेत्र में बेहद तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। हालांकि फरीदाबाद के पुलिस-प्रशासन के लिए राहत की बहुत बड़ी बात यह रही कि पूरी घटना स्पष्ट रूप से घटनास्थल के पास में लगे एक सीसीटीवी के कैमरे में कैद हो गई थी, जिसके आधार पर ही पुलिस ने तत्काल बेहद तत्परता दिखाते हुए हत्यारोपी तौसीफ व उसके सहयोगी रेहान को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया और बाद में हत्यारोपी तौसीफ को अवैध हथियार उपलब्ध करवाने वाले बदमाश अजरु को भी गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। जिसके बाद अब हालात सामान्य हैं और प्रशासन के नियंत्रण में हैं।

लेकिन इस घटना के बाद हम सभी लोगों के लिए निष्पक्ष रूप से और शांतचित्त मन से विचारणीय बात यह है कि हाल ही में महिलाओं के खिलाफ अलग-अलग प्रदेशों में घटित अपराध की घटनाओं पर देश में जमकर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति हुई थी। उत्तर प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ की हाल ही में घटित महिलाओं के प्रति घटनाओं पर देश के कुछ दिग्गज पत्रकारों, कुछ बुद्धिजीवियों, कुछ समाजसेवियों व बहुत सारे राजनेताओं ने जमकर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति की थी, कई दिनों तक न्यूज चैनल, समाचारपत्र, सोशलमीडिया व सड़कों पर जमकर हंगामा बरपाया था। लेकिन राजनीति करने वाले इन सभी लोगों के साथ पक्ष व विपक्ष के अधिकांश राजनेताओं की अचानक बल्लभगढ़ की घटना पर बोलती क्यों बंद हो गयी है। हर मुद्दे का राजनीतिकरण करके राजनीति करने के शौकीन हमारे देश के बहुत सारे लोग व राजनेता इस घटना से बिल्कुल अंजान बनने का नाटक आखिर क्यों कर रहे हैं। स्थिति को देखकर लगता है कि इन सभी लोगों के लिए इंसान की जान व इंसानियत की रक्षा से ज्यादा अपने आकाओं के दिशानिर्देश, वोट बैंक व अपनी राज्य सरकार की छवि बेहद महत्वपूर्ण है। जिसके चलते यह सभी लोग, पक्ष व विपक्ष के अधिकांश राजनेता बल्लभगढ़ की घटना पर आँख बंद करके चुपचाप बैठ गये हैं। हाथरस कांड व राजस्थान कांड पर आयेदिन जमकर बवाल करने वाले राजनेताओं के द्वारा बल्लभगढ़ की घटना में शामिल अपराधियों को सख्त सजा देने की मुहिम सोशलमीडिया में चलाने व पीड़ित परिवार के लिए संवेदना तक व्यक्त करने के लिए एक ट्वीट करने तक समय नहीं है। स्थिति देखकर लगता है कि वोट बैंक व किसी अज्ञात भय में उन लोगों के हाथ एक ट्वीट तक करने में कांप रहे है।

वैसे तो किसी भी हाल में देश में अपराधिक घटनाओं पर राजनीति बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए, बल्कि पुलिस के द्वारा बिना किसी जोर दवाब के समय रहते सख्त व निष्पक्ष कार्यवाही होनी चाहिए, जिससे बिना किसी भेदभाव व हंगामे के पीड़ित पक्ष को वास्तव में जल्द से जल्द न्याय मिल सकें। लेकिन अफसोस हमारे देश में पुलिस की कार्यप्रणाली व जाति-धर्म की ओछी राजनीति के चलते हर आपराधिक घटना में कार्यवाही करने का मापदंड ना जाने क्यों अलग-अलग हो जाता है। हर आपराधिक घटना पर कार्यवाही करने के लिए घटना को जाति-धर्म के चश्मे से देखने वाले हमारे सिस्टम में बैठे चंद लोगों, तथाकथित बुद्धिजीवियों व कोई इन चंद ताकतवर राजनेताओं को अब तो समझाओं की अपराध व अपराधी का कोई जाति-धर्म नहीं होता, वो तो केवल इंसान, इंसानियत व समाज का सबसे बड़ा दुश्मन होता है और केवल सजा प्राप्त करने के योग्य अपराधी होता है। वैसे भी सभ्य समाज में आपराधिक घटना पर किसी जाति या धर्म विशेष के आधार पर बुद्धिजीवी वर्ग व राजनेताओं का चुप्पी साध लेना भी पीड़ित पक्ष के साथ बहुत बड़ा अन्याय होता है। जाति-धर्म के आधार पर अपराध में कार्यवाही होना भी सरासर गलत है और बहुत बड़ा अन्याय है। देश के कर्ताधर्ताओं व सिस्टम में बैठे लोगों को देश व समाज हित में जल्द से जल्द अपनी यह सोच बदलनी होगी, तब ही देश में अपराध व अपराधियों पर नकेल कसी जा सकती है।
वैसे देश में महिलाओं के प्रति घटित इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए परिवार व समाज में संस्कारों के बहुत तेजी होते क्षरण और लोगों की मानसिक व वैचारिक विकृति सबसे बड़ा कारण है, जिसके लिए हम स्वंय सबसे बड़े दोषी हैं। आज हमारे सामने सबसे बड़ी सोचने वाली बात यह है कि हम लोग अपने स्वंय के बच्चों को किस तरह का संस्कार व परिवेश दे रहे हैं। हमारे समाज को भी यह विचार करना होगा की वो बढ़ते अपराध और अपराधियों के प्रति कितना सजग है, क्योंकि बिना समाज की सजगता के अकेले पुलिस के बलबूते कोई भी अपराध रोका नही जा सकता है, क्योंकि पुलिस के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है, जिसे घुमाओं और अपराध का खात्मा करवाओं यह संभव नहीं है। देश से अपराध का खात्मा करने के लिए राजनीतिक दलों व समाज का सहयोग बेहद जरूरी है और इनके द्वारा अपराधियों का महिमामंडन ना करके बल्कि उनका पूर्ण रूप से सामाजिक तिरस्कार होना चाहिए। अपराध पर अंकुश लगाने के लिए हम लोगों को अपनी सोच में बदलाव करना होगा, जिस तरह से किसी आपराधिक घटना में शामिल आरोपी अगर हमारी जाति या धर्म का कोई व्यक्ति होता है तो हम उसके पक्ष में सड़़क पर आकर खड़े हो जाते है, उसको सुरक्षित रखने के लिए संरक्षण देते हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि हमको इस सोच को देश व समाज हित में तत्काल बदलना होगा। अपराधी को जाति-धर्म का प्रतीक बनाना बंद करना होगा, वोट बैंक की राजनीति को छोड़कर सत्य को सत्य कहना सीखना होगा, जाति-धर्म के वोट बैंक के लालच को त्याग कर अपराधी को अपराधी कहना सीखना होगा, तब ही देश में अपराधों पर अंकुश लगेगा और हमारा सभ्य समाज सुरक्षित रहेगा।
(इस लेख में व्यक्त विचार, लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में दी गई किसी भी सूचना की तथ्यात्मकता, सटीकता, संपूर्णता, अथवा सच्चाई के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)
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