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FTX fall and Cryptocurrency: क्या क्रिप्टो करंसी का बुलबुला फूट गया है?

FTX fall and Cryptocurrency: क्रिप्टो करंसी की दुनिया में FTX क्रिप्टो एक्सचेंज का दिवालिया होना एक बड़ा धमाका है। एक समय शिखर पर रहने वाला एफटीएक्स आज दिवालिया होने की कगार पर खड़ा है।

FTX fall and cryptocurrency bubble bursting

बीते दिनों एफटीएक्स कंपनी ने अमेरिका में दिवालिया संरक्षण कानून के तहत आवेदन दिया है, जिसके बाद खबरें आ रही हैं कि कंपनी की देनदारी के मुकाबले उसकी सम्पत्तियां काफी कम है। दिवालिया के आवेदन के बाद कंपनी के संस्थापक और सीईओ सैम बैंकमैन फ्राइड ने भी इस्तीफा दे दिया है।

एफटीएक्स के दिवालिया आवेदन के बाद बिटकॉइन समेत दूसरी क्रिप्टो करंसी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली हैं। कंपनी के नए CEO जॉन रे तृतीय ने घोषणा की है कि एफटीएक्स अपने ग्राहकों को प्लेटफॉर्म पर क्रिप्टोकरेंसी ट्रेडिंग या फंड निकासी की सुविधा बंद कर रहा है। साथ ही आश्वस्त करने की कोशिश की कि ग्राहकों की असेट्स को सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि यह कहना मुश्किल है कि एफटीएक्स के खातों तक अनधिकृत पहुंच होने से कितनी राशि खतरे में आई है लेकिन विश्लेषक मानते हैं कि राशि बड़ी हो सकती है।

FTX की घटना क्रिप्टो करेंसी की दुनिया में बड़े बदलाव लेकर आयेगी और इसकी दशा और दिशा भी बदलेगी। लोकप्रियता और तकनीकि की सुरक्षा के अलावा ना तो इसके पास कोई आधारभूत संपत्ति है और ना दिवालिया होने पर सरकार की कोई गारंटी, इसलिये दुनिया भर के क्रिप्टो एक्सचेंज के माध्यम से निवेश किये हुए निवेशकों के मन में इस घटना के बाद डर बैठ गया है।

हालांकि भारत सरकार और रिजर्व बैंक इस मसले को लेकर सतर्क हैं। इसमें रिजर्व बैंक का एकदम स्पष्ट रूख है कि इसे मान्यता नहीं दी जी सकती।

सरकार का जो रूख है वह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से आधिकारिक डिजिटल मुद्रा का सुविधाजनक ढांचा तैयार करना चाहती है।

सरकार ने भारत में निजी क्रिप्टो करंसी को प्रतिबंधित कर कुछ अंतर्निहित अपवादों के साथ इसके उपयोग को मान्यता देने पर विचार करने के संकेत दिये हैं ताकि प्रचलित तकनीकि का इस्तेमाल किया जा सके।

सरकार और रिजर्व बैंक का यह सही कदम है। क्योंकि जिसका सिक्का उसकी सरकार और यदि सिक्का ही अपना नहीं होगा तो संप्रभु राष्ट्र और उसकी सत्ता कैसे कायम होगी? क्रिप्टो करंसी तो राष्ट्र की बंदिशों को तोड़ने वाला है इसलिए जब तक सीमा की अवधारणा अस्तित्व में है, क्रिप्टो करंसी के मौजूदा स्वरुप को लीगल मान्यता देना मुश्किल है। इसे अपने फॉर्मेट में कुछ ऐसे बदलाव करने पड़ेंगे ताकि राष्ट्र की अवधारणा को चुनौती ना प्राप्त हो।

भले ही क्रिप्टो करंसी कितना ही सुरक्षित हो लेकिन इसके मूल्यांकन को लेकर आप आश्वस्त नहीं हो सकते। इसने करंसी शब्द का इस्तेमाल कर छद्म लाभ लेने की कोशिश की है। करंसी के दो मूलभूत गुण इसमें नहीं है। पहला किसी भी करंसी का समय के किसी भी पड़ाव पर मूल्य समान रहता है जैसे 100 रूपये का नोट जो आज 2021 में 100 रूपये का है वह 2031 में भी 100 रूपये का ही होगा। ना तो 90 का होगा और ना 110 का होगा। क्रिप्टोकरेंसी में ऐसा नहीं है। समय के भिन्न भिन्न पड़ाव पर उसका मूल्य अलग अलग हो सकता है, उसके मूल्यों में उतार चढ़ाव हो सकता है।

इसे एक तरह का निवेश मान सकते हैं जिसे आप एक्सचेंज पर करते हैं। बाकी एक्सचेंज पर किये गए निवेश के पीछे कोई आधारभूत संपत्ति होती है लेकिन इसके पीछे तो वह भी नहीं है। इसलिए इसे हवा से भरा गुब्बारा मान सकते हैं जो अनुकूल परिस्थितियों में उड़ रहा है। कब तक और कहां तक उड़ेगा इसे तकनीकी और इसकी लोकप्रियता ही तय करेगी।

करंसी का जो दूसरा मूलभूत गुण है वह यह कि करंसी रेगुलेटेड होती है। राष्ट्र की कोई संस्था इसे मान्य और रेगुलेट करती है। करंसी पर उस राष्ट्र की गारंटी होती है जिसमें लिखा होता है कि मैं धारक को अमुक रुपया अदा करने का वचन देता हूं। इस लिहाज से प्रत्येक मुद्रा उस राष्ट्र के केंद्रीय सरकार या केंद्रीय बैंक द्वारा दिया गया एक प्रतिज्ञा पत्र होता है जो तरल रूप में बाजार में चलता रहता है।

इसमें यह गारंटी होती है कि यह किसी भी परिस्थिति में अंतिम रूप में क्लेम करने पर उस देश की केंद्रीय सरकार या केंद्रीय बैंक द्वारा भुगतान किया जायेगा। ये गुण इस क्रिप्टो करंसी में है ही नहीं। ना तो उसे कोई देश रेगुलेट करता है और ना कोई देश या उसकी कोई केंद्रीय संस्था इस पर गारंटी देती है। किसी भी परिस्थिति में अंतिम रूप से क्लेम करने पर कौन भुगतान करेगा यह भी स्पष्ट नहीं है। कौन इसका अंतिम मालिक है यह भी मालूम नहीं है। इसलिए मुद्रा के दो मूलभूत गुणों की अनुपस्थिति इसे करंसी की परिभाषा से अलग करती है।

अब सवाल उठता है कि यदि यह करंसी नहीं है तो यह क्या है? यह बार्टर एक्सचेंज के एक विस्तार के रूप में एक डिजिटल क्रिप्टो एसेट है ना कि मुद्रा। इसे आप इन्वेस्टमेंट कह लीजिये या कमोडिटी कह लीजिये। वैसे भी जैसे ही आप क्रिप्टो करंसी में निवेश शब्द बोलते हैं तो तुरंत ही यह करंसी शब्द की परिभाषा से बाहर हो जाता है। क्योंकि करंसी में निवेश नहीं किया जाता है। करेंसी को धारण किया जाता है जिसका मूल्य सदैव अपरिवर्तित रहता है। इससे लाभ हानि केवल फॉरेन करेंसी एक्सचेंज में होती है। इसलिए इस क्रिप्टो एसेट के साथ करंसी शब्द जोड़ कर भ्रम फ़ैलाने जैसा प्रयास है। यही भ्रम फैलाकर रखना इसके प्लेटफॉर्म विस्तार का एक अन्तर्निहित उद्देश्य भी है। इससे भविष्य में किसी राष्ट्र की सम्प्रभुता को चुनौती, उसकी अर्थव्यवस्था को चुनौती और सबसे बड़ा खतरा किसी राष्ट्र के अस्तित्व को चुनौती के रूप में सामने आ सकता है।

अत: क्रिप्टोकरंसी को प्रतिबंधित करने की जगह इसे रेगुलेट करना चाहिए। इसे बैन करने की बजाय जनता के हित को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रावधान लाने चाहिए ताकि हम दुनिया से कदमताल कर सकें और राष्ट्र की संप्रभुता को भी सुरक्षित कर सकें। यदि इस संपत्ति के मूल्यांकन का लागत की जगह बैलेंस शीट में फेयर वैल्यू कांसेप्ट लाया जाय तो इस पर अर्जित लाभ को टैक्स के दायरे में लाया जा सकता है।

इतने सुधार के बाद भी एक प्रश्न अनुत्तरित रह जाता है कि क्रिप्टो करंसी का मालिक कौन है? सबसे अंत में इसका क्लेम कौन देगा? लगता है इसी के समाधान के लिये सरकार ने CBDC लाने की बात कही है। क्रिप्टो करंसी आज के डिजिटल वर्ल्ड की एक नई हकीकत है जो राष्ट्र की सीमाओं को तोड़कर अपनी सत्ता स्थापित करने के लिये बेचैन है, लेकिन इसके पीछे कौन है इसकी तस्वीर आज भी स्पष्ट नहीं है।

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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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