प्रधानमंत्री की सुरक्षा चूक मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी

हमारे देश की राजनीति चंद राजनेताओं की कृपा से कब क्या छोटा-बड़ा तमाशा किसके साथ करवा दे यह कहना बहुत ही मुश्किल है। वैसे तो धरातल पर स्थिति यह है कि देश में ओछी राजनीति का शिकार कोई ना कोई आम व्यक्ति या खास व्यक्ति भूलचूक से या इरादतन आयेदिन ही होता रहता है। परंतु कभी-कभी इसकी जद में देश के बड़े पदों पर आसीन बड़े लोग भी जाने-अंजाने में आ जाते हैं। लेकिन अब तो देश में राजनीति के स्तर में गिरावट की हद ही हो गयी है, देश के नीतिनिर्माता व सर्वोच्च पदों में से एक पद प्रधानमंत्री की सुरक्षा चूक के नाम पर राजनीति के चलते जमकर उठापटक जारी है, हालांकि यह स्थिति वीवीआईपी की सुरक्षा व देश की सुरक्षा के दृष्टिकोण से बिल्कुल भी उचित नहीं है। पंजाब में देश के प्रधानमंत्री के साथ हुई सुरक्षा चूक की 5 जनवरी की घटना के बाद से देश की सुरक्षा एजेंसियों के माथे पर चिंता के बल हैं, वहीं कुछ लोगों व चंद राजनेताओं की कृपा से देश के विभिन्न भागों में प्रधानमंत्री की सुरक्षा चूक के मसले पर भी ओछी राजनीतिक जुमलेबाजी जारी है। वैसे तो हमारे देश में बेहद स्तरहीन हो चुकी राजनीति में ओछी राजनीति के शर्मनाक हथकंडे धरातल पर आयेदिन देखने को मिलते रहते हैं, लेकिन क्षणिक राजनीतिक स्वार्थ के लिए कुछ लोगों के द्वारा देश के प्रधानमंत्री की ही सुरक्षा को जबरदस्त ढंग से खतरे में डाल देना समझ से परे है, यह घटनाक्रम कुछ राजनेताओं व सिस्टम की मंशा पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाने का कार्य करता है। चंद लोगों की 5 जनवरी को की गयी ओछी स्तरहीन राजनीति के चलते पंजाब की वीर भूमि से भारतीय राजनीति में एक काला अध्याय जुड़ गया है, पीएम नरेंद्र मोदी 5 जनवरी को जब पंजाब के दौरे पर पहुंचे, तो वहां पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने पीएम के सडक मार्ग के द्वारा हुसैनीवाला जाते वक्त उनका रास्ता रोककर रखने का दुस्साहस किया था, इस स्थल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला लगभग 15 से 20 मिनट तक रुका रहा था। पूरी दुनिया भारत में घटित अपने ही प्रधानमंत्री के साथ इस घटनाक्रम पर आश्चर्यचकित है, देश-दुनिया के सुरक्षा विशेषज्ञ इसको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में भारी चूक व लापरवाही मान रहे हैं। सबसे बड़ी शर्मनाक बात यह है कि पीएम के साथ घटित इस घटनाक्रम के बाद देश में बिना किसी जांच पड़ताल के ही पक्ष विपक्ष में एक-दूसरे के ऊपर आरोप-प्रत्यारोप लगाने की ओछी राजनीति शुरू हो गयी है, कोई भी पक्ष यह विचार करने के लिए तैयार नहीं है कि आखिरकार एसपीजी कवर प्राप्त प्रधानमंत्री के साथ ऐसी घटना क्यों और कैसे घटित हो गयी।

Fair investigation necessary in pm narendra modi security lapse case in punjab

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के प्रारंभिक अध्ययन के पश्चात यह स्पष्ट नज़र आता है कि यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में एक बहुत बड़ी चूक थी, जिसके चलते पीएम की सुरक्षा में लगी केंद्र व राज्य की सुरक्षा एजेंसियों, पंजाब पुलिस व पंजाब की सरकार के रवैये पर बहुत बड़े सवाल खडे हो रहे हैं। हालांकि राजनीति के चलते केंद्र व राज्य दोनों एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपने-अपने दायित्व से बचने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन देश के आम जनमानस के बीच बहस शुरू हो गयी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे के दौरान उनकी सुरक्षा व्यवस्था के साथ जिस तरह से खिलवाड़ हुआ है वह एक साधारण चूक, लापरवाही, ओछी राजनीति या कोई साजिश जो भी है उसका जल्द से जल्द खुलासा होना चाहिए। हालांकि यह तो जांच का विषय है कि ऐसा क्यों हुआ, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि देश के सर्वोच्च पद की सुरक्षा से जुड़ी जांच भी क्या सर्वोच्च न्यायालय के दखल के बाद ही सही ढंग से होगी, वैसे यह तो आने वाला समय ही बतायेगा कि जांच कछुए की चाल से होगी या खरगोश की तेज रफ्तार से होगी। लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि जांच राजनीति के चलते अपने आकाओं से मिलने वाले इशारों से प्रभावित होगी या पूर्ण रूप से निष्पक्ष होगी, यह आने वाला समय ही तय कर पायेगा।

वैसे अब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय तक चला गया है, प्रधानमंत्री की सुरक्षा से खिलवाड़ के इस गंभीर मामले को लेकर एनजीओ लॉयर्स वॉयस संगठन ने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर दी है। जिस पर 7 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की तीन सदस्यीय बेंच ने सुनवाई की थी। जिसमें सीजेआई एनवी रमन्ना ने पीएम की इस यात्रा का समस्त रिकॉर्ड और अभी तक जांच एजेंसियों को मिले तथ्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किये हैं, साथ ही शीर्ष अदालत ने पंजाब पुलिस के अधिकारियों, एसपीजी और अन्य सभी एजेंसियों को जांच में सहयोग करने और पूरे रिकॉर्ड को सील करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा है। इस बेहद गंभीर मामले कि सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह रेयरस्ट ऑफ द रेयर मामला है, इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी हुई है, प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि पीएम की सुरक्षा में चूक जिसमें राज्य शासन और पुलिस प्रशासन दोनों पर जिम्मेदारी थी, उसकी जांच स्वयं राज्य सरकार नहीं कर सकती, जांच में एनआईए अधिकारियों की भी उपस्थिति जरूरी है। मेहता ने कहा कि पंजाब के गृह सचिव खुद जांच और शक के दायरे में हैं तो ऐसे में वह कैसे जांच टीम का हिस्सा हो सकते हैं?

वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने बहस के दौरान अदालत के सामने इसे गंभीर मामला बताते हुए इसकी जांच कराने की मांग की थी। मनिंदर सिंह ने शीर्ष अदालत के सामने दलील दी कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है, न कि किसी राज्य विशेष में कानून-व्यवस्था का मुद्दा। प्रदर्शनकारियों के बीच प्रधानमंत्री 20 मिनट तक फंसे रहे। इसलिए मामले की जांच होनी चाहिए, लेकिन यह जांच पंजाब सरकार नहीं कर सकती। सड़क जाम करना प्रधानमंत्री की सुरक्षा का सबसे बड़े उल्लंघन का उदाहरण है। यह एक चुनावी राज्य में हुआ है। इसलिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हो। इस मामले में पंजाब सरकार को घटना की जांच के लिए एक पैनल नियुक्त करने का कोई विशेष अधिकार नहीं है। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार के पैनलों को इस मामले में सोमवार तक कार्यवाही न करने का निर्देश दिया है। सीजेआई रमन्ना ने कहा कि हमें चूक, लापरवाही के कारणों की जांच करने की जरूरत है, उन्होंने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि हम केवल चूक में जा रहे हैं, न कि यह किसने किया आदि मुद्दों पर।

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प्रधानमंत्री की सुरक्षा में हुई बड़ी चूक पर केन्द्रीय गृहमंत्रालय ने पंजाब सरकार से रिपोर्ट मांगी है, गृहमंत्रालय का कहना है कि पंजाब पुलिस ने ब्लू बुक का पालन सही ढंग से नहीं किया है, क्योंकि जाम खुलवाने की जिम्मेदारी पंजाब पुलिस की थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया था। वैसे पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक के लिए केवल पंजाब पुलिस को ही जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है, इसके लिए खुद एसपीजी और केंद्रीय इंटेलिजेंस ब्यूरो भी बराबर की जिम्मेदार हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में किसान आंदोलन को देखते हुए पीएम को सड़क मार्ग से 100 किलोमीटर लंबा सफर करवाना केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसियों की एक गलत सलाह थी, लेकिन अगर उन्होंने यह सलाह दी थी तो हमारी समस्त सुरक्षा एजेंसियों, एसपीजी व इंटेलिजेंस ब्यूरो को वहां के हालात के मद्देनजर और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता थी। लेकिन कही ना कही केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसियां अपने कर्तव्य का सही ढंग से निर्वहन करने में नाकाम रही। पीएम के काफिले के कई किलोमीटर आगे चल रहे पंजाब पुलिस के पायलट वाहन के द्वारा स्थल पर जाम लगने वाले हालातों की जानकारी देने की जिम्मेदारी थी, लेकिन अगर उसने जानकारी दी थी तो काफिला फ्लाईओवर तक कैसे पहुंच गया यह जांच का विषय है। लेकिन अगर पंजाब पुलिस ने जानकारी नहीं दी थी तो इस तरह की परिस्थितियों में फंसने के बाद तो तत्काल ही एसपीजी को प्रधानमंत्री की सुरक्षा के मद्देनजर काफिले को वापस मुड़वाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाने का निर्णय लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा क्यों नहीं हुआ यह भी एक जांच का विषय है।

वहीं प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मसले पर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी देश के अन्य राजनेताओं की तरह केवल सियासी जुमलेबाजी करते हुए ही नज़र आये। उन्होंने कहा कि पीएम की रैली में 70 हजार कुर्सियां लगी थी, लेकिन लोग केवल 700 आये इसलिए ध्यान भटकाने के लिए यह सब किया गया है। लेकिन वह यह भूल गये कि भारत की संघीय व्यवस्था में प्रधानमंत्री पद पर आसीन व्यक्ति राष्ट्र की अनमोल धरोहर है जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी केन्द्र व राज्य सरकार सभी की है, प्रधानमंत्री की सभा में चाहे एक आदमी मौजूद था राज्य सरकार का दायित्व था कि वह उनको उच्चस्तरीय सुरक्षा घेरा मुहैया करवाएं, क्योंकि हमारे देश ने इंदिरा गांधी व राजीव गांधी के रूप में दो प्रधानमंत्रियों को आतंकवाद का शिकार बनते देखा है, फिर भी प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में चूक हो जाना माफी योग्य अपराध नहीं है। वैसे भी मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को ध्यान देना चाहिए कि पीएम मोदी के काफिले में प्रोटोकॉल के अनुसार पंजाब के चीफ सेक्रेटरी व डीजीपी आखिर क्यों शामिल नहीं हुए तत्काल इस बात का संज्ञान लेकर कार्यवाही करनी चाहिए, वहीं फ्लाईओवर वाले घटनास्थल पर पंजाब पुलिस का हाथ पर हाथ रखकर तमाशबीन की तरह बैठकर चाय की चुस्कियां उड़ाने वाला रवैया बेहद संदेह पैदा करने वाला है, इस पर कार्यवाही जरूरी है। लेकिन भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए देशहित में यह बेहद जरूरी है कि पंजाब में पीएम की सुरक्षा में हुई चूक की जांच के बाद एक-एक परत अवश्य खुलनी चाहिए, देश की जनता को सच्चाई पता चलनी चाहिए की आखिरकार गलती किसकी है और जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए, जिससे की कोई भविष्य में प्रधानमंत्री व देश की सुरक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने का दुस्साहस ना कर सके।

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