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महाराष्ट्र की राजनीति में देवेंद्र फड़नवीस की पदावनति और अमित शाह की नाराजगी

बीजेपी की सियासत में जो सबसे ताजा सवाल तैर रहा है, वह सिर्फ यही है कि क्या बीजेपी में सपने देखना मना है। अगर ऐसा नहीं होता, तो देवेंद्र फडणवीस आज जो है, वह क्यों हैं। क्या वे उप मुख्यमंत्री जैसे दोयम दर्जे वाले पद के ही हकदार थे? जो नेता पहले दो बार देश के सबसे दुधारू प्रदेश का दमदार मुख्यमंत्री रहा हो, बीजेपी की अगली पीढ़ी के सबसे ताकतवर नेताओं की पहली पांत का परचम लहरा रहा हो, और अपेक्षाकृत तेजतर्रार व स्वस्थ होने के साथ प्रशासनिक पकड़ के मामले में भी जगविख्यात हो, उसे मुख्यमंत्री बनते बनते अचानक उप मुख्यमंत्री बना दिया जाए, तो यह सवाल तो बनता है कि आखिर बीजेपी में सपनों पर पहरा क्यों है?

Devendra Fadnavis demotion and Amit Shah displeasure in Maharashtra politics

क्या बीजेपी में प्रादेशिक नेतृत्व में भी वही सर्वोच्च पद पर पहुंचेगा, जो अपनी क्षमता के प्रदर्शन की उतावली नहीं दिखाएगा, क्या नेतृत्व को केवल वे ही लोग पसंद है जिनकी चाल वक्त की चाल से कुछ ज्यादा ही धीमी है, क्या राज्यों के ताकतवर नेतृत्व को केंद्रीय नेतृत्व अनजाने में ही अपने लिए चुनौती मान बैठा है? सवाल सैकड़ों है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक होनहार व ताकतवर तेवर वाला राजनेता आखिर तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने से वंचित क्यों कर दिया गया। खासकर, महाराष्ट्र में हर कोई यह सवाल पूछ रहा है, पर जवाब किसी के पास नहीं है।

देवेंद्र की प्रतिभा से प्रदेश वाकिफ है, उनकी राजनीतिक ताकत देश जानता है, और उनके सामर्थ्य से राजनीति के जानकार वाकिफ हैं, लेकिन नेतृत्व की आंखों में वे आखिर चुभ क्यों रहे हैं, इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए पौने तीन साल पीछे जाना होगा, जब देश के गृह मंत्री और बीजेपी के चाणक्य कहे जानेवाले अमित शाह ने आधी रात को महाराष्ट्र से राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश दिया था और नींद में सोते राज्यपाल को जगाकर 23 नवंबर 2019 को तड़के पांच बजे महाराष्ट्र के राजभवन में देवेद्र फडणवीस को दूसरी बार महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनाने का इंतजाम किया था।

फडणवीस ने शपथ ली, लेकिन बहुमत न जुटा पाने की वजह से केवल 80 घंटों में ही 26 नवंबर की शाम उनके दूसरी बार के मुख्यमंत्री का दौर थम गया और इस्तीफा देना पड़ा। बाद में तो खैर, उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने और जो अजित पवार देवेंद्र के साथ राजभवन में तड़के शपथ लेकर उप मुख्यमंत्री बने थे, वे ही उद्धव के साथ भी उनके उप मुख्यमंत्री बने। और उद्धव का तख्ता पलटने के साथ ही 30 जून 2022 को शिवसेना के एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बने और फडणवीस उनके उप मुख्यमंत्री।

राजनीति के जानकारों की राय में फडणवीस आज उप मुख्यमंत्री पद का दंश झेल रहे हैं, तो इसके पीछे अमित शाह की वह नाराजगी ही अब तक का सबसे बड़ा कारण है, क्योंकि तड़के शपथ दिलाने में सबसे अहम भूमिका उन्हीं की थी और मामला बिगड़ गया, तो सबसे ज्यादा राजनीतिक नुकसान भी फडणवीस की बजाय बीजेपी नेतृत्व में शीर्ष पर बैठे मोदी और शाह का ही हुआ।

जिन मोदी और शाह के फैसलों पर देश चलता है और बीजेपी का परिवार फलता है, उनका फैसला महाराष्ट्र में सरकार बनाने के मामले में गलत साबित हो गया। भले ही उसकी जड़ में फडणवीस का सत्ता पाने के लिए एनसीपी के अजित पवार पर अटूट विश्वास रहा। मगर, इस पूरे घटनाक्रम में छवि टूटी, तो वह अमित शाह की। जिन अमित शाह को भारतीय राजनीति का वर्तमान चाणक्य माना जाता है, उनके निर्णय को आघात पहुंचा।

इससे भी पहले की जो एक बात, जिसे अमित शाह गांठ बांध कर बैठे हैं, वह यह है कि महाराष्ट्र के पिछले विधानसभा चुनाव से पहले फडणवीस ने कहीं यह कहा था कि 2029 में देश का प्रधानमंत्री महाराष्ट्र से होगा और इसके साथ ही नरेंद्र के बाद देवेंद्र का नारा भी कई जगह प्रकाशित भी हुआ।

हालांकि, इस तथ्य में किसी को कोई संदेह नहीं है कि देश की राजनीति में आज अमित शाह सबसे ताकतवर राजनेता के रूप में स्थापित हैं, और यह भी सब जानते ही हैं कि वे ही मोदी की ढाल भी हैं। क्योंकि देश ने देखा है कि मोदी पर तीर कोई भी चले, अमित शाह उसे अपने पर झेल लेते हैं।

सो, महाराष्ट्र के उस मामले में भी ऐसा ही हुआ था कि भले ही देवेंद्र दिल्ली में मोदी के करीबी हों और मोदी की मर्जी से ही राजभवन में तड़के की शपथ बाद में राजनीतिक नौटंकी साबित हुई। लेकिन उस मामले को भी शाह ने अपने ऊपर ओढ़कर मोदी को उस राष्ट्रीय राजनीतिक शर्म से बचा लिया। लेकिन देश जानता है कि अमित शाह किसी को नहीं बख्शते। फडणवीस आज इसीलिए मुख्यमंत्री पद से न केवल वंचित है, बल्कि यह उनकी ऐतिहासिक पदावनती भी है।

कहते हैं कि राजनीति में किसी क्षमतावान नेता को उसके सामर्थ्य के अनुरूप पद देने के बजाय पदावनत किए जाने से क्रूर अत्याचार उस पर कोई और नहीं होता। लेकिन हमारे देश की राजनीति में किसी को बख्शने और सजा देने के इस तरह के अनेक किस्से और कहानियां हैं, जिनमें पार्टी में उच्च पदों पर बैठे नेताओं के अहम पर किसी संभावनाशील नेता के सपनों को मार डालने की मुसीबतों का पाप बहुत भारी साबित हुआ हैं।

फिर, यह भी सर्वविदित तथ्य है कि सियासत तो सदा सदा से अनंत संभावनाओं का खेल रही है, इसलिए कौन, कब, कहां, कैसे, किस रास्ते से आगे निकल जाए, कोई नहीं जानता। लेकिन इस समय का सत्य यही है कि महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के दावेदार देवेंद्र फडणवीस का पता अब उप मुख्यमंत्री निवास है।

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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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