सामुदायिक भागीदारी दिल्ली सरकार के स्कूलों में ला रही है बदलाव
'शिक्षा' मानवता का आधार है। एक व्यक्ति का व्यक्तित्व बनाने के साथ शिक्षा उसके परिवार, समाज और वैश्विक पहचान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। दिल्ली की 'आम आदमी पार्टी' की सरकार ने माननीय मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री श्री मनीष सिसोदिया के बेहतर मार्गदर्शन में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है। आप सरकार ने जमीनी स्तर पर स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (एसएमसी) को मजबूत बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई है और अपने लगातार प्रयासों से सभी एसएमसी मेंबर अपने संबंधित इलाकों में दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था के मशाल वाहक बन गए हैं। राइट टू फ्री एंड कंपल्सरी चिल्ड्रेंस एजुकेशन ऐक्ट बिल, 2009 (आरटीई 2009) के तहत दूसरे राज्यों में भी यह कमेटी गठित की गई है। 2010 में इस बिल के सेक्शन 21 के तहत, भारत के सभी राज्यों में एसएमसी के गठन की शुरुआत सामुदायिक भागीदारी और स्वामित्व बढ़ाने के लिए की गई थी। लेकिन, दिल्ली में इस कमेटी का काम और कामयाबी जिस स्तर की दिखती है, वह सारी सीमाओं से परे है और कहीं भी नहीं देखी गई है। यह कमेटी एक 'स्वैच्छिक संगठन' के तौर पर स्थापित की गई थी और एसएमसी के सभी मेंबर कमेटी के कार्यों को अपनी ड्यूटी समझकर करते हैं, बिना कोई फायदे के।

दिल्ली सरकार अपने सिद्धांत 'स्वराज और विकेंद्रीकरण' को लेकर प्रतिबद्ध है। लोकतंत्र में लोक कल्याण की सभी योजनाओं में जनता की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए और इसके साथ ही परिणाम को लेकर एक उत्तरदायित्व का भाव भी होना चाहिए। एसएमसी को इसी से गति मिली है, जिसके चलते स्कूलों और दिल्ली की पूरी शिक्षा प्रणाली की स्थिति में व्यापक बदलाव देखा जा रहा है। आप नेता और विधायक सुश्री आतिशी सिंह के निरंतर और पूरजोर कोशिशों के कारण एसएमसी का सुदृढ़ीकरण और पुनर्गठन संभव हो पाया है।
राज्य सरकार ने शिक्षा की बेहतरी के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया है। बेहतर शिक्षा प्रणाली की संभावनाओं को लेकर देश और देश के बाहर के शिक्षण संस्थानों के साथ चर्चा की जाती है और उसके बाद इसे पूरी तरह लागू करने में कमेटी अपना सहयोग देती है। कमेटी दिल्ली में जमीनी स्तर पर काम कर रही है। यह करीब 1500 से ज्यादा स्कूलों के स्कूल प्रशासन, बच्चे और उनके माता-पिता के साथ तालमेल कर रही है, जिसके बहुत ही अच्छे नतीजे दिख रहे हैं। स्कूल में स्टूडेंट की उपस्थिति को लेकर कमेटी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य किया है और उनकी गैरहाजिरी को भी कम कर रहे हैं। कमेटी के सदस्य अनुपस्थित रहने वाले स्टूडेंट के घर जाकर माता-पिता और बच्चों के साथ बातचीत कर रहे हैं और अनुपस्थिति को कम करने में सफल हुए है। इससे स्टूडेंट की गैरहाजिरी दर भी गिरी है। स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ाने में भी कमेटी बहुत सक्रिय है। इसके लिए सदस्य लगातार जन संपर्क करते रहते हैं और समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाते हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि साल 2015 में जहां 15 लाख स्टूडेंट थे, 2022 में उनकी संख्या कहीं ज्यादा बढ़कर लगभग 18.5 लाख हो गई है। ये भी देखा गया है कि 2015 के बाद से माता-पिता से एसएमसी के लगातार संवाद के चलते मेगा पीटीएम में वो काफी बड़ी तादाद में पहुंच रहे हैं, जो कि अक्सर शिक्षा निदेशालय (डीओई) द्वारा आयोजित किया जाता है। कमेटी की ओर से स्कूलों में स्वच्छता को लेकर लगातार निगरानी और सार्थिक कोशिशें की जा रही हैं। चाहे लंच हो या सलामती, सुरक्षा की बात या आत्मरक्षा के लिए छात्राओं की ट्रेनिंग- कमेटी इन सभी पर विशेष ध्यान देती है। कमेटी के सदस्य बच्चों की भावनाओं और सुरक्षा को लेकर बहुत ही संवेदनशील हैं, यौन उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण कानून, POCSO-2012 के प्रति जागरूकता, कमेटी के ऐक्शन प्लान का एक भाग है। कमेटी सरकारी संस्थानों जैसे कि दिल्ली कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (DCPCR)और कुछ गैर-सरकारी संगठनों जैसे कि प्रथम, साझा, सच्ची-सहेली आदि से भी समय-समय पर सहयोग लेती है। एसएमसी मेंबर टीचरों के साथ भी बातचीत करते हैं, फीडबैक देते हैं और उनकी नियमितता और क्लासों की निगरानी करते हैं, जो बच्चों के रिजल्ट में काफी मददगार साबित हुए हैं। यही वजह है कि कमेटी के काम और शिक्षा व्यवस्था पर उसके सक्रिय परिणामों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 'स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की शक्तियों में वृद्धि' सर्कुलर एफडीई 23(6) /आरटीई/2012-13/847-854 के माध्यम से कमेटी के अधिकार और भागीदारी का विस्तार किया है।
इसके मुताबकि कुछ प्रमुख बिंदु निम्न प्रकार से हैं:
कमेटी हर महीने कम से कम दो बार बैठकें करेगी। यदि एक ही स्कूल में दो शिफ्ट चल रही है तो दोनों शिफ्ट की एसएमसी की संयुक्त बैठक दो महीनों में एक बार होगी।
कमेटी के सदस्य किसी भी समय स्कूल का दौरा और स्कूल के कामकाज की निगरानी कर सकते हैं।
कमेटी के सदस्य किसी भी समय स्टूडेंट और टीचरों के समूहों को संबोधित कर सकते हैं।
कमेटी के मेंबर स्कूल के रिकॉर्ड की छानबीन कर सकते हैं और प्रिंसिपल की यह ड्यूटी होगी कि मांगे जाने पर उचित रिकॉर्ड पेश करें।
कमेटी के मेंबर स्कूल के प्रिंसिपल के द्वारा की गई खर्च की जांच कर सकते हैं।
कमेटी स्कूल के सोशल ऑडिट की मांग कर सकती है।
कमेटी अनुशानहीनता और अनियमितता के लिए संबंधित टीचर को 'कारण बताओ नोटिस' दे सकती है।
कमेटी स्टूडेंट में शैक्षणिक रुचि जगाने के इरादे से किसी भी व्यक्ति को नियुक्त कर सकती है, जिसपर आने वाली लागत की पूर्ति एसएमसी फंड से होगी।
दिल्ली सरकार शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है और योजनाओं को लागू करने के लिए नए आयामों के साथ विकेंद्रीकरण के तहत 'स्कूल मैनेजमेंट कमेटी' को और भी मजबूत कर रही है। यह शिक्षा के उद्देश्यों और परिणामों के बीच एक पुल का काम कर रही है। पिछले 6-7 वर्षों में स्कूलों के विकास के लिए कमेटी की ओर से किया गया काम काफी सराहनीय है। लेकिन,कमेटी का विश्वास है कि 'सामाजिक भागीदारी' से अभी और भी ज्यादा प्रयास होना चाहिए। इस जरूरत को महसूस करते हुए दिल्ली सरकार ने अक्टूबर 2021 में 'पेरेंट्स संवाद' नाम से एक योजना शुरू की थी। जिसके तहत 'स्कूल मित्र' और 'कमेटी मेंबर' स्कूल के हित में माता-पिता के साथ मिलकर कार्य करेंगे और एक-दूसरे से नियमित संपर्क में रहेंगे। 'पेरेंट्स संवाद योजना' के तहत सरकार का उद्देश्य है कि सामाजिक भागीदारी को और अधिक गति मिले; और लोग एक-दूसरे से अधिक जुड़ें। कमेटी के करीब 14,000 मेंबर और 22,000 'स्कूल-मित्र' 36,000 कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर 18.5 लाख स्टूडेंट और उनके माता-पिता के साथ स्कूल के विकास, अध्ययन-अध्यापन आदि पर नियमित रूप से चर्चा करते रहते हैं। ताकि, जनता शिक्षा और विकास के विभिन्न पहलुओं से अवगत रहे और इस तरह से दिल्ली की सरकारी शिक्षा प्रणाली में विकास की पूरी प्रक्रिया पर जोर दे।
यानि कमेटी की मौजूदा कार्यशैली, मेंबरों की सेवा की चिरस्थायी भावना और भविष्य की व्यवस्थित योजना निश्चित तौर पर शिक्षा और उसकी व्यवस्था को अपने लक्ष्य तक पहुंचाएगी।
(लेखक दिल्ली स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के प्रेसिडेंट और पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं।)












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