Bihar Crime: जब नेता ही बाहुबली बन जाएं तो अपराध पर नियंत्रण कैसे होगा?
अतीक की हत्या के बाद बिहार के नेताओं का बयान आने लगा है कि बिहार में लॉ एंड आर्डर की स्थिति यूपी से अच्छी है। लेकिन क्या सचमुच ऐसा मान लेना सही होगा?

Bihar Crime: उत्तर प्रदेश में माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या के बाद बिहार के नेता अपने यहां की बेहतर कानून व्यवस्था की दुहाई देने लगे हैं। हम पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है कि "बिहार के बारे में आप लोग चाहे जो कहें लेकिन बिहार में लॉ एण्ड आर्डर उत्तर प्रदेश से बहुत अच्छा है।" उनका यह बयान अतीक और उसके भाई की अस्पताल में मेडिकल चेक अप के लिए ले जाते हुए हत्या के बाद आया है। संभवत: यूपी के हालात पर बयान देने वाले जीतन राम मांझी ने अपने राज्य में कानून व्यवस्था को ठीक से नहीं देखा। देखते तो ऐसा बयान देने से जरूर बचते।
बिहार में अपराधियों के हौसलों की बुलंदी इसी से समझी जा सकती है कि घर से निकले एनएमसीएच के एक डाक्टर का अब तक पता नहीं चला। लूट, फिरौती, रंगदारी, अपहरण और हत्या जैसे अपराध हाल के दिनों में बेतहाशा बढ़े हैं।
नीतीश कुमार अपराध की समीक्षा बैठक के बाद सिर्फ यह संकल्प दोहराते हैं कि क्राइम से कोई समझौता नहीं करेंगे। उनका यह वक्तव्य बिहार में प्रसिद्ध हो चुका है - हम न किसी को बचाते हैं और न किसी को फंसाते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि अब बिहार की कानून व्यवस्था उनके हाथों से फिसल चुकी है। राजद-जदयू से जुड़े नेता ही कई मामलों में कानून हाथ में लिए दिखाई देते हैं।
बिहार में कानून व्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से ही दिसंबर में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजविन्दर सिंह भट्टी को बिहार का नया डीजीपी बनाकर लाए। बिहार के अपराधियों में राजद और जदयू से जुड़े लोगों की ठीक-ठाक संख्या है। अपराध नियंत्रण में यही बात बिहार के नए डीजीपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है।
राजद के पूर्व विधायक पर बेटे की हत्या का आरोप
औरंगाबाद में लालू यादव के करीबी और राजद के पूर्व विधायक रविंद्र सिंह कुशवाहा के 35 वर्षीय पुत्र कुमार गौरव उर्फ दिवाकर की अपराधियों ने 14 अप्रैल की रात गोली मारकर हत्या कर दी। घटना रात करीब 9ः30 बजे की है। अपराधियों ने दाउदनगर थाना क्षेत्र के हिच्छन बिगहा स्थित उनके घर से थोड़ी दूरी पर दिवाकर को चार गोली मारी है। इस हत्या का आरोप पूर्व विधायक पिता पर ही लग रहा है।
मंत्रीजी की बनारस में दबंगई
बिहार सरकार के मंत्री तेज प्रताप यादव पिछले दिनों बनारस होटल विवाद में उलझे हुए थे। उन्होंने बिहार के पैटर्न पर ही होटल में दबंगई की और बिना बिल चुकाये वापस चले गये। तेज प्रताप यादव बिहार में राष्ट्रीय जनता दल कोटे से मंत्री हैं और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बेटे हैं। वे बनारस में जो भी कर रहे हैं, उनके लिए नया नहीं है। उन्होंने बचपन से बिहार में यही सब देखा है।
जदयू विधायक के रिश्तेदारों ने नशे में धुत्त होकर पुलिस से की मारपीट
भागलपुर में देर रात नशे की हालत में पुलिस से मारपीट करने के आरोप में पूर्णिया के रुपौली विधानसभा सीट से जदयू विधायक बीमा भारती के रिश्तेदार समेत छह लोगों को जोगसर पुलिस ने गिरफ्तार किया। ये सभी आरोपी जदयू विधायक की गाड़ी पर सवार थे।
बताया जा रहा है कि आरोपितों में जदयू विधायक का भतीजा संजय मंडल और प्रशांत कुमार भी शामिल था। 10 अप्रैल की देर रात जोगसर पुलिस की गश्ती दल ने अनियंत्रित हालत में लग्जरी कार को आते देखा। गश्ती दल के पुलिसकर्मियों ने उसे रुकने का इशारा किया, तो तेज गति में लग्जरी गाड़ी ने पुलिस की गश्ती गाड़ी को ही रौंदने का प्रयास किया। किसी तरह पुलिस की गश्ती गाड़ी ने अपना बचाव किया।
चूंकि गाड़ी जदयू विधायक की थी और बिहार में शासन जदयू का है। लग्जरी गाड़ी पर विधानसभा का प्रवेश पास, जदयू का लोगो वाला झंडा, मोनोग्राम भी लगा हुआ था। मतलब गाड़ी में पावरफुल लोग बैठे थे। युवकों ने गाड़ी रोकी और पुलिस के साथ ही हाथापाई करने लगे। बिहार पुलिस के जवानों को अपशब्द कहा और उनका मोबाइल भी तोड़ दिया। विधायकजी की गाड़ी में बैठे ये सभी लोग नशे में धुत्त थे।
राजद विधायक पर पटना में फायरिंग का आरोप
राजधानी पटना में 21 मार्च को सुगौली के राजद विधायक शशि भूषण सिंह अपने 30-40 समर्थकों के साथ एक जमीन पर कब्जा करने पहुंचे। जहां कई राउंड गोली भी चली। अब रूपसपुर थाना क्षेत्र के महुआ बाग में हुई इस घटना को लेकर आरजेडी विधायक समेत 40 लोगों पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। राजद विधायक की तरफ से हुई मारपीट और गोलीबारी में दूसरे पक्ष के दो लोग जितेंद्र कुमार और राजेश कुमार जख्मी हुए।
जदयू विधायक हैं या भू माफिया?
जदयू से विधायक नरेंद्र कुमार नीरज उर्फ गोपाल मंडल का यह बयान मीडिया में प्रकाशित हुआ है। जिसमें वे कहते हैं कि हम तो पुलिस को कहकर जाते हैं कि वहां गए तो गोली चलाएंगे। इसलिए मामला पहले ही निपटा लीजिए। हमारे समर्थकों और कार्यकर्ताओं को कोई परेशान करेगा तो हम उसे छोड़ेंगे नहीं। बयान देने वाले विधायक के बेटे आशीष मंडल उर्फ टिंकू पर पिछले साल 12 दिसम्बर को चार लोगों को गोली मारने का आरोप है।
जीरो माइल में हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के 19 कट्ठा जमीन पर कब्जा करने को लेकर विधायक और उनके बेटे आशीष पर केस दर्ज हुआ है। हालांकि, विधायक गोपाल मंडल खुद को निर्दोष बता रहे हैं लेकिन उनका यह वक्तव्य भी मीडिया में आया है कि अगर वे वहां गए होते तो एक भी आदमी बच नहीं पाता। हम जमीन पर कब्जा दिलाने का काम करते हैं। जरूरत पड़ने पर गोली चलाने से भी पीछे नहीं हटते। ऑन द स्पॉट फैसला करते हैं और कोई व्यक्ति अगर जबरदस्ती दखल करता है तो उसे भगाते भी हैं।
गोपाल मंडल जैसे नगीने राजद-जदयू की सरकार में भरे हुए हैं। गोपाल मंडल का एक बयान इसी महीने आया है, जिसमें वे कह रहे हैं कि ''मेरे सामने कोई नीतीश कुमार का विरोध नहीं कर सकता है। यदि मेरे सामने किसी ने उनका विरोध किया तो मैं उसका गला काट दूंगा।'' गोपाल मंडल जदयू के वही विधायक हैं जो दो साल पहले तेजस एक्सप्रेस में अंडरवियर और बनियान पहन कर टहलते हुए काफी चर्चा बटोर चुके हैं।
दलित नेता की हत्या
अब तो अपराधियों के निशाने पर पब्लिक ही नहीं, नेता भी आ गए हैं। वैशाली जिले के लालगंज थाना क्षेत्र में अपराधियों द्वारा रालोजपा के नेता और दलित सेना के राष्ट्रीय सचिव राकेश पासवान की हत्या कर दी गई। हत्या के बाद जो बवाल हुआ, उसे पुलिस रोकने में नाकाम रही। इसके पहले भी बिहार में कई नेताओं की हत्या हो चुकी है।
राजद के 17 में से 15 मंत्री हैं दागी
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के मुताबिक, बिहार की नई सरकार में 33 मंत्रियों में 72 फीसदी यानी 23 ने अपने ऊपर आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है। इतना ही नहीं इनमें से 53 फीसदी यानी 17 पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। जदयू कोटे से मंत्री बने अशोक चौधरी ने अपना एफिडेविट दाखिल नहीं किया है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आरजेडी के 17 (तेजस्वी यादव को मिलाकर) में से 15 यानी 88 प्रतिशत मंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। जदयू के 11 में 04 यानी 36 फीसदी मंत्री दागी हैं। गंभीर आपराधिक मामलों की बात करें तो आरजेडी के 17 में से 11 मंत्रियों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
ऐसे में सवाल फिर यही है कि जब पार्टी के अंदर इतने अपराधी पहले से हैं फिर अपराध मुक्त बिहार का सपना राजद-जदयू की सरकार बिहार वालों को दिखाए भी तो कैसे दिखाए?
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(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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