Rahul Nyay Yatra: विपक्षी एकता के लिए मनहूस है राहुल गांधी की न्याय यात्रा
Rahul Nyay Yatra: राहुल गांधी की पहली भारत जोड़ो यात्रा ने जो प्रभाव पहले दिन से ही छोड़ा था, वैसा प्रभाव इस बार की न्याय यात्रा में एक पखवाड़े के बाद भी दिखाई नहीं दिया|
उनकी यात्रा 14 जनवरी को शुरू हुई और जनवरी में ही इंडी एलायंस को दो बड़े झटके लग गए|

पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लालू यादव पर भ्रष्टाचार और परिवारवाद का आरोप लगा कर इंडी एलायंस छोड़ दिया, फिर झारखंड में उनके प्रवेश से पहले ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार हो गए| राहुल गांधी जब बिहार में थे तो लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव से ईडी लैंड फॉर जॉब घोटाले में कड़ी पूछताछ कर रही थी| अब जब वह दुबारा बिहार में घुसेंगे, तब तक तेजस्वी और लालू यादव की गिरफ्तारी भी हो सकती है|
पहले दिन से उनकी यात्रा इंडी एलायंस के लिए मनहूस साबित हो रही है| शुरू से ही विवादों में भी घिरी रही, क्योंकि मणिपुर सरकार ने उन्हें संवेदनशील इलाकों से गुजरने की इजाजत नहीं दी| फिर असम में भी वैसा ही हुआ, जब श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के समय वह शंकरदेव के जन्म स्थान पर जाना चाहते थे|

शंकरदेव ट्रस्ट ने उन्हें सुबह के बजाए शाम को आने को कहा क्योंकि उस दिन सैकड़ों हिन्दू श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखने के लिए जमा थे| राहुल गांधी ने इसे सरकार की तरफ से उन्हें रोके जाने का आरोप लगा कर दो घंटे का धरना दे दिया|
इसके बाद राहुल गांधी ने तय रूट से अलग रूट पकड़ लिया और पुलिस के बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की| असम पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया, उस घटना ने उन्हें विवादों में लाकर खड़ा कर दिया| अगर उस दिन यह घटना न होती और असम के मुख्यमंत्री प्रेस कांफ्रेंस करके राहुल गांधी पर टिप्पणी न करते, तो उससे पहले आठ दिन तक वह अखबारों में कहीं भी सुर्ख़ियों में नहीं थे|
असम के बाद जब वह बंगाल में दाखिल हुए तो ममता बनर्जी ने उन्हें उन क्षेत्रों में यात्रा की इजाजत नहीं दी, जहां से वह गुजरना चाहते थे| कांग्रेस को उम्मीद तो यह थी कि ममता बनर्जी क्योंकि इंडी एलायंस में शामिल है, इसलिए वह उनके बंगाल में प्रवेश के समय खुद स्वागत करने के लिए मौजूद होंगी, लेकिन इसके ठीक उल्ट ममता बनर्जी ने एनडीए की मुख्यमंत्री की तरह व्यवहार किया और दो दिन तक यात्रा रूकी ही रही|
ममता बनर्जी ने राहुल गांधी के बंगाल प्रवेश से पहले ही कांग्रेस के साथ किसी तरह का चुनावी गठबंधन करने से इनकार कर दिया| ममता बनर्जी ने कांग्रेस पर हमलावर होते हुए कहा वह इंडी एलायंस का हिस्सा हैं, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें यह सूचना तक नहीं दी कि राहुल गांधी अपनी न्याय यात्रा के दौरान बंगाल में प्रवेश कर रहे हैं, उन्हें तो मीडिया से सूचना मिली|
राहुल गांधी ने 25 जनवरी को बंगाल में प्रवेश किया था| ममता विरोधी कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा को जैसे भाजपा शासित मणिपुर और असम में विरोध का सामना करना पड़ा वैसे ही बंगाल में भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है| स्थानीय प्रशासन ने उन्हें जनसभा करने की इजाजत नहीं दी थी|
मल्लिकार्जुन खरगे ने ममता बनर्जी से बात भी की, लेकिन वह टस से मस नहीं हुई| सिलीगुड़ी में प्रशासन ने बच्चों की परीक्षा का बहाना बनाकर उन्हें यात्रा और जनसभा की इजाजत नहीं दी| नतीजा यह निकला कि 26-27 को यात्रा बंद करके राहुल गांधी ने 28 जनवरी से दुबारा यात्रा शुरू की और 29 जनवरी को बिहार में प्रवेश किया|
राहुल गांधी के किशनगंज से बिहार में प्रवेश से 18 घंटे पहले नीतीश कुमार ने इंडी एलायंस की सरकार गिरा कर कांग्रेस और राजद को सरकार से बाहर निकाल दिया| राहुल गांधी के लिए यह सबसे बड़ा झटका था| सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने नीतीश कुमार के पाला बदलने से पहले उनसे बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने बात करने से ही इनकार कर दिया|
यह वही नीतीश कुमार थे, जिन्होंने इंडी एलायंस को खड़ा किया और एलायंस की पहली बैठक भी पटना में होस्ट की थी| अगर उन्हें पटना बैठक में ही इंडी एलायंस का अध्यक्ष या संयोजक बना दिया जाता, तो उनके एलायंस छोड़ कर जाने की कोई संभावना ही नहीं बचती| लेकिन कांग्रेस ने लालू यादव के दबाव में आकर उन्हें संयोजक बनाने से परहेज किया|
लालू यादव ने ममता बनर्जी के भी कान भरे कि संयोजक बनने का हक तो उनका है, क्योंकि वह भाजपा से मुकाबला करके लोकसभा की 22 सीटें जीत कर आई हैं, जबकि नीतीश कुमार भाजपा के समर्थन और मोदी के चेहरे पर 16 सीटें जीत कर आए थे|
नीतीश कुमार के कान तो 13 दिसंबर को ही खड़े हो गए थे, जब ममता बनर्जी ने मल्लिकार्जुन खरगे को इंडी एलायंस का अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने का प्रस्ताव रखा था| लेकिन उनका गुस्सा 19 जनवरी की ऑनलाईन बैठक में फूटा जब उन्हें संयोजक बनाने का प्रस्ताव पेश हुआ था और राहुल गांधी ने कहा कि वह नीतीश कुमार को संयोजक बनाने के लिए ममता बनर्जी से बात करेंगे|
नीतीश कुमार को लगा कि कांग्रेस उनका इस्तेमाल कर रही है| उनके इंडी एलायंस छोड़ने के और भी कई कारण थे, जिनका खुलासा अब वह खुद और उनकी पार्टी के लोग किस्तों में कर रहे हैं| लेकिन राहुल गांधी की ओर से अपनी यात्रा के दौरान बिहार में नीतीश कुमार के बारे में कही गई बातों ने उन्हें विवादों में लाकर खड़ा कर दिया है|
राहुल गांधी ने एक बड़ी ही अजीब बात कही कि बिहार में जाति आधारित जनगणना का सुझाव कांग्रेस ने दिया था| जिसके लिए नीतीश कुमार और भाजपा तैयार नहीं थे| उन्होंने कहा कि लालू यादव और कांग्रेस के दबाव में नीतीश कुमार ने जाति आधारित जनगणना करवाई|
जबकि सच यह है कि नीतीश कुमार जब एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री थे तब 18 फरवरी 2019 को बिहार विधानसभा ने पहली बार जाति आधारित जनगणना करवाने का प्रस्ताव पास करवाया था| 27 फरवरी 2020 को फिर प्रस्ताव पास करवा कर केंद्र सरकार से अपील की गई थी कि 2021 की जनगणना जाति आधारित करवानी चाहिए|
इसके बाद सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल लेकर नीतीश कुमार दिल्ली आए थे और प्रधानमंत्री को जाति आधारित जनगणना करवाने का ज्ञापन दिया था| इस प्रतिनिधिमंडल में भाजपा विधायक दल के नेता और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी भी शामिल थे| इसी के बाद केंद्र सरकार ने कहा था कि राज्य अपने स्तर पर जाति आधारित सर्वेक्षण करवा सकते हैं| जाति आधारित सर्वेक्षण का नोटिफिकेशन 6 जून 2022 को जारी हुआ था, जब नीतीश कुमार एनडीए सरकार के मुख्यमंत्री थे|
अब राहुल गांधी का जाति आधारित जनगणना का बयान विवाद का कारण बन गया है| नीतीश कुमार ने पलट कर जवाब दिया है कि कांग्रेस कभी भी जाति आधारित जनगणना के पक्ष में नहीं थी, अगर वह पक्ष में थी, तो वह बताए कि उसने अपने साठ साल के शासन में करवाई गई छह जनगणनाओं में से एक भी जाति आधारित जनगणना क्यों नहीं करवाई| 2011 में विपक्ष के दबाव में मनमोहन सिंह सरकार ने जाति आधारित जनगणना करवाई भी, तो उसके आंकड़े क्यों नहीं जारी किए|
इधर राहुल गांधी बिहार में विवाद खड़ा कर गए, उधर 31 जनवरी को जब उन्होंने पश्चिम बंगाल में दुबारा प्रवेश किया तो उनकी कार पर पथराव हो गया| लेकिन ममता बनर्जी ने जांच पड़ताल करने के बाद कहा कि राहुल गांधी की कार पर बंगाल में नहीं बल्कि सुबह जब वह बंगाल में प्रवेश कर रहे थे, तब कटिहार में पथराव हुआ था|
इस स्पष्टीकरण का मतलब यह नहीं था कि वह अपने रूख में बदलाव करते हुए राहुल गांधी का बंगाल में स्वागत कर रही हैं| उन्होंने कहा यह कुछ और नहीं बल्कि ड्रामा है| ममता बनर्जी ने पहले राहुल गांधी को 28 जनवरी को सिलीगुड़ी में जनसभा की इजाजत नहीं दी थी, 31 जनवरी को जब वह दुबारा बंगाल में पहुंचे तो मुस्लिम बहुल मुर्शीदाबाद और मालदा में भी उन्हें रैली करने की इजाजत नहीं दी|
हालांकि मालदा में उन्होंने जनसभा को संबोधित किया और कहा कि सत्ता में आए तो जाति आधारित जनगणना करवाएंगे| कांग्रेस बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाकों में ममता बनर्जी के वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है| इसलिए ममता बेहद खफा है|
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा कि जिन मल्लिकार्जुन खरगे को ममता बनर्जी ने मोदी के सामने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव रखा था, उन्हीं मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को ममता बनर्जी बंगाल में रैली करने की इजाजत नहीं दे रही है|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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