Assembly Elections: विधानसभा चुनावों में कांग्रेस खो रही अपनी बढ़त, तीन राज्यों में बराबरी पर आई भाजपा
Assembly Elections: पांच विधानसभाओं के चुनाव की जब घोषणा हुई थी, तब ऐसा लग रहा था कि मिजोरम को छोड़कर बाकी चारों राज्यों में कांग्रेस का पलड़ा काफी भारी रहेगा| जैसे 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा को कर्नाटक और तीनों हिन्दी भाषी राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा था, ठीक वैसे ही इस बार होगा| चुनावी आकलन इस तरह के भी आ रहे थे कि तीनों हिन्दी भाषी राज्य तो कांग्रेस जीतेगी ही, तेलंगाना में भी कांग्रेस जीत सकती है|
हालांकि कुछ महीने पहले तक तेलंगाना में जो भाजपा सत्ताधारी भारत राष्ट्र समिति को कड़ा मुकाबला देती दिखाई दे रही थी, वह चुनाव आते आते मुकाबले से बाहर हो गई, क्योंकि उसने पिछड़ी जातियों के उभरते हुए नेता बंडी संजय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा कर तेलंगाना में बहुत कम प्रभाव रखने वाली रेड्डी जाति के किशन रेड्डी को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया| तेलंगाना में चर्चा तो यहां तक है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य की राजनीति को देखते हुए तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के लिए मैदान खाली करने का काम किया है|

बंडी संजय के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से हटते ही कांग्रेस मुख्य मुकाबले में आ गई और ओपिनियन पोल बता रहे हैं कि कड़े मुकाबले में केसीआर का पलड़ा भारी है| भारतीय जनता पार्टी की अगर तेलंगाना में बड़ी भूमिका की उम्मीद नहीं है, तो वह वहां कांग्रेस को हरवाने का काम करेगी, क्योंकि केसीआर भविष्य में संसद में बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस की तरह मोदी के लिए संकट के साथी बनेंगे|
राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी स्थितियों में काफी परिवर्तन आ गया है| ऐसा लगने लगा है कि कर्नाटक से बहने लगी कांग्रेस की हवा पांच राज्यों के चुनाव नतीजों में थम जाएगी, जिसके बूते कांग्रेस 2024 जीतने का सपना देख रही है| छत्तीसगढ़ में पहले चरण के चुनाव 7 नवंबर को हैं| पहले चरण के चुनावों से सिर्फ पांच दिन पहले महादेव एप का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ संबंध होने का खुलासा होने के बाद भाजपा और कांग्रेस में मुकाबला बहुत कड़ा हो गया है|

महादेव बेटिंग एप ऑनलाइन सट्टेबाजी का एप है, जिसके मेन प्रमोटर छत्तीसगढ़ के सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल हैं| ईडी ने अपनी प्रेस रिलीज में दावा किया कि महादेव एप प्रमोटर्स ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लगभग 508 करोड़ रुपये का भुगतान किया है| ईडी ने कहा कि 5.39 करोड़ रुपये के साथ गिरफ्तार किए गए असीम दास ने पूछताछ में मुख्यमंत्री को पैसा दिए जाने की बात कही है| एप चलाने वाले दुबई में जाकर बस चुके हैं, एप के भारत में वांछित मालिक शुभम सोनी ने दुबई से ऑन कैमरा दावा किया है कि उन्हें बघेल सरकार ने संरक्षण दिया था, जिसके बदले वह मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहाकार और बीबीसी के पूर्व पत्रकार विनोद वर्मा को दस लाख रूपए महीना पहुंचा रहे थे| विनोद वर्मा मुख्यमंत्री बघेल का करीबी रिश्तेदार है|
यह घोटाला खुलने के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों ने एक दूसरे पर हमले तेज कर दिए हैं| महादेव एप घोटाला खुलने से ठीक पहले हुए ओपिनियन पोल में कांग्रेस और भाजपा की कांटेदार टक्कर में कांग्रेस की थोड़ी बढ़त दिखाई गई थी| एप घोटाला खुलने के बाद स्थितियां भाजपा के अनुकूल होती जा रही हैं| भाजपा रेस में बराबरी पर आ गई है|
मध्यप्रदेश में 17 नवंबर को वोट पड़ेंगे| वहां कभी अर्जुन सिंह की तूती बोलती थी| अर्जुन सिंह के तीन चेले थे दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और अजीत जोगी| बाद ये तीनों भी मुख्यमंत्री बने, दिग्विजय सिंह 1993 से 2003 तक दस साल के लिए मध्यप्रदेश में, अजीत जोगी मध्यप्रदेश बंटवारे के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बने| बाद में कांग्रेस से अलग हो कर जनता कांग्रेस बनाई| जोगी की जनता कांग्रेस की वजह से कांग्रेस 15 साल तक छत्तीसगढ़ की सत्ता से बाहर रही, उनके देहांत के बाद उनका बेटा अमित जोगी उस पार्टी को चला रहा है और इस समय भी चुनाव में कांग्रेस के सामने ताल ठोक रहा है|
अर्जुन सिंह के तीसरे चेले कमलनाथ 2018 में एक साल के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने, लेकिन वह एक साल ही मुख्यमंत्री रह पाए क्योंकि ग्वालियर राजघराने के वारिस ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बगावत करके उनकी सरकार गिरा दी| कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनवाने में कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अहम भूमिका थी| दिग्विजय सिंह राघोगढ़ के राजा बलभद्र सिंह के बेटे हैं, जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर राज घराने के वारिस हैं| ग्वालियर और राघोगढ़ राजघरानों में पुरानी दुश्मनी के चलते दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया| अब वही दिग्विजय सिंह कमलनाथ के रास्ते का काँटा बन रहे हैं|
अगर सोनिया और राहुल उन्हें मुख्यमंत्री बनवाने को तैयार होते तो दिग्विजय सिंह चुनाव जीतने के लिए जान की बाजी लगा देते| जब चुनाव शुरू हुआ था, तो लगता था कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस जीत रही है| लेकिन टिकटों की मारामारी में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ की खुली भिडंत हो गई| दोनों खेमे एक दूसरे के कपड़े फाड़ रहे हैं| बल्कि कमलनाथ ने तो कांग्रेस वर्करों को खुल्लम खुल्ला कह दिया कि दिग्विजय सिंह के कपड़े फाड़ो, वही टिकटों में गड़बड़झाला करवा रहे हैं|
कांग्रेस में यह पुराना इतिहास भी रहा है| डी.पी. मिश्रा ने श्यामा चरण शुक्ला को सीएम बनवाया था| बाद में डी.पी.मिश्रा ने ही उनके पाँव खींचे और मुख्यमंत्री पद से हटवा दिया| अब वही काम दिग्विजय सिंह कमलनाथ के साथ कर रहे हैं| कांग्रेस की इस आपसी सिर फुटौवल ने भाजपा का रास्ता आसान कर दिया है|
रही सही कसर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पूरी कर रहे हैं, जिन्हें समझौते में छह सीटें न देकर कांग्रेस ने उन्हें अपना दुश्मन बना लिया है| उन्होंने बड़ी तादाद में अपने उम्मीदवार खड़े करके कांग्रेस के खिलाफ धुंआधार प्रचार शुरू कर दिया है| वह कांग्रेस को चालू और धोखेबाज पार्टी बता रहे हैं, जबकि कमलनाथ सरकार उनके एक विधायक के समर्थन से ही बनी थी|
भाजपा ने मध्यप्रदेश में दो केन्द्रीय मंत्रियों सहित सात सांसदों को टिकट देकर मुख्यमंत्री के संबंध में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी| मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद कहने लगे थे कि वह मुख्यमंत्री रहेंगे या नहीं, कह नहीं सकते| अगर कांग्रेस पार्टी होती तो शिवराज सिंह चौहान औपचारिकता के लिए ही चुनाव प्रचार करते, लेकिन वह इतना धुंआधार प्रचार कर रहे हैं कि सत्ता आने पर मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदार बन गए हैं| एक ताज़ा ओपिनियन पोल में कांग्रेस पिछड़ती हुई दिख रही है|
'पोल्स्टर्स इंडिया' के ओपिनियन पोल के हिसाब से महिला वोटरों के बीच भाजपा कांग्रेस से 20 प्रतिशत आगे है, इसी तरह ओबीसी और जनजातीय समाज के बीच भी भाजपा आगे दिख रही है| इसकी वजह है शिवराज सिंह चौहान का ओबीसी होना और कमलनाथ का बनिया होना| इस ओपिनियन पोल के मुताबिक़ कांग्रेस पर भाजपा की बढ़त 5 प्रतिशत है| इतनी बढ़त रहने पर भाजपा की सीटें कांग्रेस से 25-30 तक ज्यादा हो सकती हैं|
राजस्थान में भी स्थितियां पूरी तरह बदली हुई दिखाई दे रही हैं| भाजपा में मसला वसुंधरा राजे बनाम आलाकमान बना हुआ था| भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान में असमंजस की स्थिति को खत्म करना शुरू कर दिया है| भाजपा ने मुख्यमंत्री पद के तीन सांसद दावेदारों को विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया है| केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल के अलावा लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं|
चुनाव शुरू हुए थे तो गजेन्द्र सिंह और अर्जुन मेघवाल इस तरह व्यवहार कर रहे थे, जैसे भाजपा के मुख्यमंत्री पद के दावेदार वहीं हैं| हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि चुनाव जीतने के बाद भाजपा आलाकमान अपनी मर्जी का मुख्यमंत्री बनाने के लिए उपचुनाव का सहारा भी ले सकता है| लेकिन इन तीनों दावेदारों में से कोई भी ओबीसी नहीं है| भाजपा आलाकमान अगर वसुंधरा राजे की जगह किसी अन्य को मुख्यमंत्री बनाना भी चाहेगा, तो उसकी चॉइस किसी ओबीसी को मुख्यमंत्री बनाने की होगी|
अब यह भी साफ़ हो गया है कि भाजपा ने जातिगत वोट बैंक को साधने और उनके आसपास की सीटों पर भी उनके प्रभाव का फायदा लेने के लिए सांसदों को मैदान में उतारा है| भाजपा का फोकस ओबीसी वोटों पर है, जो राजस्थान में प्रभावशाली राजपूत और जाटों से ज्यादा महत्व रखते हैं| वसुंधरा राजे ने अपनी स्थिति यह कह कर साफ़ कर दी है कि वह रिटायर होने को तैयार हैं, लेकिन साथ ही यह भी कह दिया है कि वह राजस्थान छोड़ कर नहीं जाएँगी| यानी वह मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी से खुद को बाहर नहीं मानती हैं| लगता है कि भाजपा ने किसी को भी मुख्यमंत्री का उम्मीदवार नहीं बनाने, लेकिन वसुंधरा राजे को फिर से महत्व देकर सही रणनीति अपनाई है|
भाजपा ने क़ानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बनाकर कांग्रेस को घेर लिया है| इन दोनों ही मुद्दों पर सचिन पायलट अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में सिमट कर रह गए हैं और चुनाव जिताने की सारी जिम्मेदारी अशोक गहलोत पर आ गई है| प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डोटासरा और अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत पर ईडी के शिकंजे ने कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया है| ताज़ा ओपिनियन पोल में भी भाजपा की आसान जीत की भविष्यवाणी की गई है| सी वोटर का ताज़ा ओपिनियन पोल कहता है कि राजस्थान विधानसभा की 200 विधानसभा सीटों में भाजपा को 114 से लेकर 124 सीटें मिलने का अनुमान है| वहीं कांग्रेस को इस सर्वे के अनुसार 67 से लेकर 77 सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है|
(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)












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