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Annapoorani Film: राम के आहार पर 'अन्नपूर्णी' का प्रहार

Annapoorani Film: श्रीराम जन्मभूमि पर बन रहे भव्य राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से पहले भगवान राम का आहार चर्चा में आ गया है। यह चर्चा शुरु की एक फिल्म ने जिसका नाम 'अन्नपूर्णी: द गॉडेस ऑफ फूड' है।

Annapoorani Film

साउथ की हीरोइन नयनतारा की ये 75वीं फिल्म है और निर्देशक नीलेश कृष्णा की ये पहली फिल्म है। इसीलिए इस फिल्म पर दोनों का काफी कुछ दांव पर लगा था। संभवत: इसी फिल्म को देखकर महाराष्ट्र में एनसीपी के एक नेता जितेन्द्र आव्हाण ने भी दावा कर दिया कि राम तो मांसाहारी थे। हालांकि बाद में उन्होंने माफी मांग ली, लेकिन तीर तो कमान से निकल ही चुका था।

'अन्नपूर्णी' तमिल के साथ साथ हिंदी वर्जन में भी हाल ही में नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई है। थिएटर्स में यह एक दिसम्बर को ही रिलीज हो चुकी थी। फिल्म की हीरोइन नयनतारा हाल ही में शाहरुख खान की हीरोइन के तौर पर 'जवान' मूवी में नजर आई थीं। लोगों को इस फिल्म के नाम से ही परेशानी थी क्योंकि अन्नपूर्णा देवी के नाम पर इसका टाइटल है, जबकि कहानी है एक मंदिर में रसोइया की बेटी की। वह अच्छी शेफ बनना चाहती है, लेकिन उसे मांसाहारी खाना बनाने से परहेज है।

जैसा कि आमतौर पर बॉलीवुड फिल्मों में बहुत शातिर तरीके से किया जाता है वैसा ही इस फिल्म में भी किया गया है। फिल्म में हीरोइन का एक मुस्लिम बॉयफ्रेंड दिखाया गया है फरहान, जो उसे ना केवल श्रीराम बल्कि और भी कई देवताओं यहां तक कि साउथ के प्रसिद्ध देवता मुरुगन के बारे में भी बताता है कि वो मांस खाते थे। जबकि राम को लेकर कई विद्वानों ने शास्त्रों के सुबूतों के साथ ये दावा गलत ठहरा दिया है। स्वामी रामभद्राचार्य ने तो जितेन्द्र आव्हाण को खुली चुनौती दी कि मेरे साथ शास्त्रार्थ करें, मैं जवाब दूंगा।

उन्होंने वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड से एक श्लोक बताते हुए उसका अर्थ भी बताया जिसमें सीताजी से महाबली हनुमान कहते हैं कि रघुकुल का कोई भी व्यक्ति मांसाहारी नहीं है। उत्तरकांड में भी इसका प्रमाण है कि राम ने वनवास में नमक मिश्रित भोजन तक नहीं खाया था, केवल कंदमूल फल खाते थे, तभी रामलीला आयोजन के दौरान वनयात्रा के दौरान आम परिवारों में राम, लक्ष्मण, सीता के स्वरूप जब जाते हैं तो उन्हें बिना नमक के फल ही काटकर दिए जाते हैं।

अन्नपूर्णी फिल्म के सीन में हीरो हीरोइन से कहता है कि, "वाल्मीकि ने रामायण में कहा है कि जब वनवास में भूख लगी थी, तब राम, लक्ष्मण और सीता ने जानवर को मारकर, पकाकर खाया था। रामजी तो विष्णु के ही अवतार हैं ना"। इस सीन में एक श्लोक का हवाला दिया गया है, जो वाल्मीकि रामायण के प्रथम खंड के अयोध्या कांड के बावनवें सर्ग का आखिरी श्लोक है, जिसकी श्लोक संख्या है 102।

"तौ तत्र हत्वा चतुरो महामृगान्
वराहमृश्यं पृषतं महारुरुम्।
आदाय मेध्यं त्वरिंत बुभुक्षितौ
वासाय काले ययतुर्वनस्पतिम्।।"

सारा विवाद इसी श्लोक के अनुवाद से जुड़ा है, आईआईटी कानपुर की वेबसाइट पर इस श्लोक की तीसरी लाइन में 'मेध्यं' शब्द का अर्थ शुद्ध मांस (Pure Meet) दिया गया है, जबकि आयुर्वेद में इसे मेधा यानी बुद्धि बढ़ाने वाला पदार्थ या पौधा बताया गया है। गीता प्रेस की वाल्मीकि रामायण में इसका शब्दश: अर्थ ये दिया गया है, "''वहां उन दोनों भाइयों ने मृगया-विनोद के लिए वराह, ऋष्य, पृषत् और महारुरु, इन चार महामृगों पर बाणों का प्रहार किया। तत्पश्चात जब उन्हें भूख लगी, तब पवित्र कंद-मूल आदि लेकर सायंकाल के समय ठहरने के लिए (वे सीताजी के साथ) एक वृक्ष के नीचे चले गए।''

यानी उन्होंने चार जानवरों का शिकार तो किया, लेकिन जब उन्हें भूख लगी तो वो कंद मूल लेकर विश्राम के लिए पेड़ के नीचे चले गए। ऐसे में अगर स्वामी रामभद्राचार्य वाले श्लोकों का भी सहारा लिया जाए तो एकदम विपरीतात्मक अर्थ निकलते हैं। इसका साफ मतलब ये होता है कि दोनों बातें सही होने का अर्थ है कि रामायण का जो संस्करण तब सहेजा गया था, उसमें छेड़छाड़ थी।

यूं भी कई विद्वान ये मानते हैं कि उत्तर रामायण जिसमें सीता की अग्निपरीक्षा का उल्लेख है, वो रामायण में बाद में जोड़ा गया है। उसके पीछे वो तमाम तर्कों के साथ साथ एक मजबूत तर्क ये देते हैं कि हर सनातनी ग्रंथ, आरती आदि के अंत में श्रुतिफल (सुनने का फल) दिया जाता है, जैसे हनुमान चालीसा में है कि ''जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होए सिद्ध साखी गौरा सा''। लेकिन रामायण में ये श्रुति फल युद्ध कांड के आखिर में ही हो गया है, ऐसे में उत्तर कांड के सही होने पर उनको शंका है। ऋग्वेद में भी पहला और दशम अध्याय बाद में जोड़ा गया बताया जाता है।

ऋग्वेद के एक शब्द 'गोहन' को लेकर वामपंथी इतिहासकारों ने ये साबित करने की कोशिश की कि गोहन यानी गाय का हत्यारा, और ये शब्द अतिथियों के लिए लिखा गया था। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि अतिथि के आने पर गाय काटकर गाय का मांस खिलाया जाता था। जबकि कोई भी सनातनी इस पर यकीन नहीं कर सकता, एक भी साक्ष्य नहीं है, बस कुतर्क हैं।

अन्नपूर्णी मूवी यहीं पर नहीं रुकती। इस फिल्म का मुस्लिम किरदार अपनी हिन्दू गर्लफ्रेन्ड को ये भी कहता है कि बिरयानी बनाने से पहले बुरका पहनकर नमाज अदा करो तो बिरयानी और स्वादिष्ट बनती है और हीरोइन ऐसा भी करती है। जबकि ये भी इतिहासकार साबित कर चुके हैं कि ये दावा कि मुगल बिरयानी भारत में लेकर आए, एकदम गलत है क्योंकि मुगल जिस इलाके से आए, वहां चावल होता ही नहीं है।

ऐसे में बिरयानी पर इस्लाम की मोहर लगाना, मांसाहारी भोजन को प्रचारित करना फिर भी शायद आपत्तिजनक ना हो लेकिन भगवान राम के बारे में अर्नगल प्रलाप की क्या जरूरत थी। जाहिर है ये सब सोच समझकर विवाद फैलाने के लिए ही किया गया। जितेन्द्र आव्हाण को चुनावों में राम लहर की आशंका है तो अन्नपूर्णी फिल्म के निर्माता विवादों के जरिए अपनी फिल्म को सुपरहिट बनाकर पैसा कमाना चाहते हैं, उस पर एजेंडे को भी कामयाबी मिलेगी।

लेकिन ऐसी हरकतों के साइड इफैक्ट्स भी हो जाते हैं, अब खबर है कि जबलपुर और मुंबई में फिल्म के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है, ना केवल नयनतारा के खिलाफ बल्कि नेटफ्लिक्स की कंटेंट हैड मोनिका शेरगिल के खिलाफ भी। तभी नेटफ्लिक्स अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए हैं। फौरन फिल्म को नेटफ्लिक्स के प्लेटफॉर्म से डिलीट कर दिया गया है। इस फिल्म के प्रोड्यूसर जी स्टूडियोज ने भी माफी मांग ली है और वादा किया है कि आपत्तिजनक दृश्य हटाकर ही उसे दोबारा नेटफ्लिक्स पर जारी किया जाएगा।Rajinikanth

(इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. लेख में प्रस्तुत किसी भी विचार एवं जानकारी के प्रति Oneindia उत्तरदायी नहीं है।)

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