पश्चिम बंगाल चुनाव:नंदीग्राम की गूंज से क्या बेचैन हो गई हैं ममता बनर्जी ?
पश्चिम बंगाल चुनाव:नंदीग्राम की गूंज से क्या बेचैन हो गई हैं ममता बनर्जी ?
कोलकाता। नंदीग्राम में पांच दिन गुजारने के बाद ममता बनर्जी ने शुक्रवार को उत्तर बंगाल में जम कर चुनाव प्रचार किया। तृणमूल खेमा में एक बेचैनी है। पोर-पोर से ताकत निचोड़ कर चुनाव में झोंक रही है। नंदीग्राम की गूंज अब पूरे पश्चिम बंगाल में सुनायी पड़ रही है। जनता के मन में कुछ चल रहा है। कोई भी जीत सकता है, कोई भी हार सकता है। ममता बनर्जी तब भवानीपुर से चुनाव लड़ती थीं तब शायद ही कभी पांच दिनों तक लगातार वहां जमी रहीं हों। लेकिन उन्हें सब कुछ छोड़ कर नंदीग्राम में डेरा जमाना पड़ा। कुछ तो है जो तृणमूल कांग्रेस के आत्मविश्वास को डंवाडोल कर रहा है। अब ममता बनर्जी को लगता है कि अगर कम मार्जिन से तृणमूल की सरकार बन भी गयी तो भाजपा इसे गिरा सकती है। यानी अब वह भी भाजपा की ताकत को सार्वजनिक मंच से स्वीकर कर रही हैं।

दिल की बात जुबां पर नहीं
नंदीग्राम में एक महिला वोटर ने कहा, लोग पूछ रहे हैं कौन जीतेगा ? दादा (शभेंदु अधिकारी) कि दीदी (ममता बनर्जी) ? अभी जो नंदीग्राम की हालत है उसको देख कर कोई अपने मन की बात नहीं कहेगा। अगर कोई पूछता है कि तुमने दादा को वोट दिया ? तो हां कहने के बदले मुंडी हिला देती हूं। अगर कोई पूछता है कि तुमने दीदी को वोट दिया तो फिर से मुंडी हिला देती हूं। ना बोल कर अभी कौन आफत मोल लेगा। जिसको वोट दिया है वो तो 2 तारीख को पता चल ही जाएगा। अधिकांश हिंदू वोटर इस सवाल को टाल जाते हैं कि उन्होंने किसे वोट दिया। लेकिन दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय के वोटरों ने खुल कर ममता बनर्जी का समर्थन किया। हिंदू वोटरों की इस सतर्कता ने तृणमूल कांग्रेस को परेशान कर दिया है। मन की बात मन में दबाने का मतलब है सच पर्दे के पीछे है। जब तृणमूल की सर्वशक्तिमान नेता की ऐसी हालत है तो औरों की स्थिति क्या होगी ? 60 सीटों पर चुनाव हो चुका है, 234 पर बाकी है। बाजी हाथ से फिसल न जाए इसलिए ममता बनर्जी ने शुक्रवार को अलीपुर दुआर के फालाकाट में बेहद आक्रामक भाषण दिया।

"बिहार-यूपी के गुंडे" वाले बयान से खलबली
ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कहा था कि बिहार-यूपी के गुंडे तृणमूल समर्थकों को वोट नहीं देने दे रहे थे। शुक्रवार को फालाकाटा में ममता बनर्जी ने फिर कहा कि बूथ के बाहर कुछ गुंडे हथियार के साथ जमा हो गये थे। वे सभी दूसरी भाषाओं में बात कर रहे थे। (मतलब वे गैरबंगाली थे) मैंने उन्हें रोकने के लिए ही बोयाल के बूथ पर धरना दिया था। ममता बनर्जी के इस बयान से पश्चिम बंगाल के हिंदी भाषियों में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। हिंदी-भोजपुरी बोलने वाले लोगों के मन में ममता बनर्जी को लेकर आशंका पैदा होने लगी है। अगर गुंडा कहे जाने से बिहार-यूपी के लोग भड़क गये तो कोलकाता, हुगली, हाबड़ा, 24 परगना जैसे जिलों में तृणमूल का खेल खराब हो सकता है। जैसे ही तृणमूल कांग्रेस को इस बात की भनक लगी वह डैमेज कंट्रोल में जुट गयी। अब राजद नेता तेजस्वी यादव दीदी के समर्थन में प्रचार के लिए पश्चिम बंगाल आने वाले हैं। वे 5 अप्रैल से तृणमूल के लिए प्रचार करने वाले हैं।

क्या धमकी दे रहीं हैं ममता बनर्जी ?
पश्चिम बंगाल में शासन ममता बनर्जी का है। इसके बावजूद वो भाजपा पर गुंडागर्दी का आरोप लगा रहीं है। अब तक देश के दूसरे हिस्सों में चुनाव के दौरान पारा मिलिट्री फोर्स की तैनाती निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी मानी जाती रही है। लेकिन ममता बनर्जी ने पारामिलिट्री फोर्स पर भी पक्षपात का आरोप लगा दिया है। भाजपा का कहना है, हार के डर ने ममता बनर्जी को आपे से बाहर कर दिया है। वे जनता को धमकी रहीं है कि जब सेंट्रल फोर्स चली जाएगी तो वे सबका हिसाब करेंगी। चुनाव खत्म होने के बाद एक-एक को देख लेंगी। वे अपने समर्थकों को उकसा भी रहीं हैं। शुक्रवार को उन्होंने अपने भाषण में कहा , मुझे अपनी पार्टी में कमजोर युवक-युवतियां नहीं चाहिए। मुझे ऐसे समर्थक चाहिए जो भाजपा की ताकत को मुंहतोड़ जवाब दे सकें। भाजपा के गुंडे अगर तांडव मचाएं तो तृणमूल के लोग घऱों से बाहर निकल कर उसका जवाब दें। मैं देखती हूं कि पारा मिलिट्री फोर्स कैसे किसी को गिरफ्तार करती है ? क्या ऐसे बयानों से कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं होगी ? क्या सच में ममता बनर्जी हताशा में ऐसी बातें कर रही हैं ?












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