Kolkata Doctor case: प्रिंसिपल को दोबारा मौका देकर घिरीं ममता? TMC समर्थित डॉक्टर यूनियनों में भी मतभेद

Kolkata RG Kar Medical College News Today: कोलकाता में अस्पताल के सेमीनार हॉल में महिला डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की जघन्य वारदात की वजह से पहली बार ममता बनर्जी की सरकार अपने ही समर्थकों के बीच भी घिरती नजर आ रही है।

कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में गुरुवार की रात 31 वर्षीय महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ जिस बर्बरता को अंजाम दिया गया, उससे पूरा देश विचलित है। अब इस मुद्दे पर बंगाल में सत्ताधारी टीएमसी समर्थित डॉक्टरों के बीच भी गहरे मतभेद उभर आए हैं।

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ट्रेनी डॉक्टर से बर्बरता पर बंट गया टीएमसी-समर्थक डॉक्टरों का खेमा
टीएमसी-समर्थित डॉक्टरों के एक गुट का माना है कि इस घटना के बाद आरोपी को सजा दिलाने की दिशा में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से प्रभावी कदम उठाए गए हैं। लेकिन, इसके ठीक उलट पार्टी समर्थित डॉक्टरों का अलग गुट भी है, जो आरजी कार मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल डॉक्टर संदीप घोष के दूसरे कॉलेज में ट्रांसफर पर सवाल उठा रहा है और इसे पक्षपाती कदम बता रहा है।

डॉक्टर संदीप घोष पर मेहरबानी को लेकर घिर रही है ममता सरकार
टीएमसी-समर्थित डॉक्टरों के एक गुट का कहना है, 'डॉ घोष को सरकारी सेवा से इस्तीफा देने के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेज में फिर से क्यों बहाल किया गया? डॉ घोष ने न सिर्फ आरजी कर मेडिकल कॉलेज को कमतर करने की कोशिश की है, बल्कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी नाकाम रहे हैं। उन्हें बर्खास्त किया जाना चाहिए।'

ट्रेनी डॉक्टर से रेप और हत्या के केस की जांच को लेकर भी उठा रहे हैं सवाल
टीएमसी समर्थित डॉक्टरों के इस गुट का कहना है कि जांच में देरी नहीं होनी चाहिए थी। अभी तक कोई खास प्रगति नहीं हुई थी। कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले से बहुत बड़ी राहत मिली है। हैरानी तो यह है कि कुछ टीएमसी-समर्थित डॉक्टरों का भी आरोप है कि सिविक वॉलेंटियर (गिरफ्तार आरोप) को असली अपराधियों से ध्यान भटकाने के लिए बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

एक वरिष्ठ डॉक्टर की टिप्पणी है, 'प्राथमिक पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट यह संकेत देता है कि इतनी क्रूरता बिना कई अपराधियों के साजिश में शामिल हुए बिना असंभव है। क्या यह गिरफ्तारी सिर्फ सतही प्रक्रिया नहीं है?'

आरोपी के तृणमूल के करीबी होने का भी किया जा रहा है दावा
लेकिन, टीएमसी समर्थित डॉक्टरों का एक ऐसा गुट भी है, जिसे लगता है कि अगर मुख्यमंत्री ने इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया होता तो जांच में और देरी होती। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने तो यहां तक दावा किया है कि आरोपी के तृणमूल के करीबी होने के बाद भी घटना के अगले दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया।

उन्होंने कहा, 'अगर टीएमसी तथ्यों को छिपाना चाहती तो आरोपी को गिरफ्तार नहीं करना चाहती, क्योंकि वह टीएमसी-समर्थित पुलिस वेलफेयर कमेटी से करीबी तौर पर जुड़ा हुआ है।'

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