Kolkata Doctor Case: मुख्यमंत्री के घर में ही पड़ गई दरार! बुआ ममता से नाखुश हैं अभिषेक बनर्जी?
Kolkata Doctor Case news: टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी 13 साल से पश्चिम बंगाल की सत्ता में हैं। पहली बार उन्हें ऐसे संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें उन्हें अपने घर से भी पूरा समर्थन नहीं मिल पा रहा है। शुरू में लग रहा था कि महिला ट्रेनी डॉक्टर से रेप और हत्या के मामले में उनमें और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की सोच में समानता है।
लेकिन, आज तृणमूल के शीर्ष नेतृत्व के बीच सबकुछ ठीक है, ऐसा लग नहीं रहा है। टीएमसी महासचिव और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी पार्टी में बुआ ममता के बाद नंबर दो स्थान पर हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की घटना को संभालने में ममता बनर्जी सरकार पर जो उंगलियां उठ रही हैं, उसको लेकर अब लग रहा है कि बुआ-भतीजे में मतभेद उभर आया है।

कोलकाता कांड में अभिषेक बनर्जी ने बनाई सीएम से दूरी!
ट्रेनी डॉक्टर से मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में रेप के बाद हत्या के मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार प्रदर्शनकारी डॉक्टरों, देश भर की आम जनता, विपक्ष, कलकत्ता हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के निशाने पर है। लेकिन, इस घटना के शुरुआती दिनों में आरोपियों के खिलाफ 'एनकाउंटर' की आवाज उठाने वाले अभिषेक बनर्जी पूरे सीन से अब गायब लग रहे हैं।
सीएम के साथ प्रदर्शन में नहीं पहुंचे अभिषेक बनर्जी
मुख्यमंत्री और उनके सांसद भतीजे में दूरियां आने की अटकलें तब से शुरू हुईं, जब ममता बनर्जी की अगुवाई में घटना के विरोध में एक 'दिलचस्प' प्रदर्शन किया गया, जिसकी काफी आलोचना हो चुकी है। आलोचना की वजह ये है कि ममता मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ बंगाल की स्वास्थ्य और गृहमंत्री भी हैं। फिर इस घटना में अपनी सरकार की नाकामी सामने के बाद भी किसके विरोध में सड़कों पर उतरीं।
टीएमसी नेताओं की ओर से ही मिल रहे हैं बुआ-भतीजे में मतभेद के संकेत!
अभिषेक बनर्जी की उस मार्च में गैर-मौजूदगी ने कई तरह के सवाल खड़े किए हैं। डायमंड हार्बर के टीएमसी नेताओं ने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किए हैं, जिससे मतभेद की अटकलों को और हवा मिल रही है।
मतलब, घटना को लेकर जिस तरह से टीएमसी सरकार चौतरफा घिर चुकी है, उसको लेकर एक टीएमसी नेता ने लिखा है, 'समय की मांग है कि जनरल (अभिषेक बनर्जी) रास्ता दिखाएं।' अभिषेक के नजदीकी सूत्रों का दावा है कि वह आरजी कर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को दूसरे मेडिकल कॉलेज में नियुक्ति और उस अस्पताल पर भीड़ के हमले को जिस तरह हैंडल किया गया, उसपर स्पष्ट तौर पर अपनी नाखुशी जताना चाहते हैं।
इससे पहले टीएमसी के कई वरिष्ठ नेता इस मामले में अपनी ही सरकार के रवैए पर सवाल उठा चुके हैं और इसके चलते उन्हें ममता की नाराजगी भी भुगतनी पड़ी है। कुछ पार्टी नेता तो खुलकर पार्टी सुप्रीमो के हर ऐक्शन का समर्थन करते दिखना चाहते हैं और वह विरोधियों की उंगलियां तोड़ने की बातें कहने से लेकर आंदोलनकारी डॉक्टरों तक को धमकाने तक में लगे हैं।
9 अगस्त को जब ट्रेनी डॉक्टर का शव मिलने के बाद डॉक्टरों का विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ था, तब अभिषेक और ममता का स्टैंड एक ही तरह का दिख रहा था। जहां ममता ने आरोपी को फांसी की सजा मांगी थी, वहीं अभिषेक ने कहा था, 'ये बलात्कारी समाज में रहने लायक नहीं हैं, इनका या तो एनकाउंटर होना चाहिए या फिर फांसी दी जानी चाहिए।'
इन दो वजहों से ममता से नाराज हैं अभिषेक?
सूत्रों का कहना है कि बुआ-भतीजे में मतभेद तब दिखाई पड़ने लगे, जब आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष को इस्तीफे के बावजूद कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल बना दिया गया। पहले भी यह रिपोर्ट आ चुकी है कि इस फैसले को लेकर टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व में काफी मतेभद था।
उसके बाद प्रदर्शनकारी डॉक्टरों पर जिस तरह से 14-15 अगस्त की रात हिंसक भीड़ ने हमला किया और अस्पताल में कथित तौर पर सबूत मिटाने की कोशिशें की गईं; पुलिस उसे रोकने में नाकाम रही, अभिषेक को यह बात भी हजम नहीं हुई। उन्हें लगा कि यह दोनों बातें नहीं होनी चाहिए थी और इन्हें टाला जा सकता था।
अभिषेक ने तो एक्स पर पोस्ट लिखकर दावा किया था कि उन्होंने कोलकाता के पुलिस कमिश्नर से कहा है, 'यह सुनिश्चित करें कि हिंसा के लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति की पहचान हो....उसकी जवाबदेही तय हो और 24 घंटे के अंदर उसपर कानूनी कार्रवाई हो, चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल से ताल्लुक रखता हो।'
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई चाहते थे अभिषेक?
अभिषेक बनर्जी के एक करीबी टीएमसी नेता ने कहा है, 'उनकी राय है कि अस्पताल प्रशासन के प्रमुख और संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो। यह साफ है कि इन लोगों ने अपनी ड्यूटी नहीं निभाई। यही वजह है कि उन्होंने सरकार और प्रशासन से खुद को दूर कर लिया है।'
टीएमसी औपचारिक तौर पर मतभेद की अटकलों को कर रही है खारिज
वैसे आधिकारिक तौर पर टीएमसी मतभेद की बातों को नकार रही है। सोमवार को पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, 'पार्टी ममता बनर्जी और महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में एकजुट है.....हालांकि बहुत सारी अफवाहें फैलायी जा रही हैं।' वहीं एक वरिष्ठ टीएमसी नेता ने अभिषेक बनर्जी को लेकर कहा, 'इन बातों के बारे में हम कुछ नहीं कह सकते, इन सबका निपटारा सिर्फ पार्टी सुप्रीमो ही कर सकती हैं।'
ममता की तरफदारी में कुछ टीएमसी नेता दे रहे हैं भड़कीले बयान
हालांकि, एक सोशल मीडिया पोस्ट पर कुणाल घोष ने लिखा, 'इस सबको रोकने के लिए हमारी नेता ममता बनर्जी लड़ाई की अगुवाई कर रही हैं। हम चाहते हैं कि हमारे जनरल अभिषेक भी हमारी तरफ रहें।' वहीं पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी और अरूप चक्रबर्ती के साथ-साथ उद्यन गुहा जैसे विधायक ममता की तरफदारी के लिए हालात के विपरीत काफी भड़कीले बयान देने से भी परहेज नहीं कर रहे।
मसलन, कल्याण बनर्जी ने बंगाल के मौजूदा हालात की बांग्लादेश से तुलना कर कहा है कि 'कुछ लोग सोचते हैं कि बांग्लादेश की तरह गाना गाकर और स्पैनिश गिटार बजाकर वे ममता बनर्जी सरकार को गिरा देंगे। लेकिन, हमारी नेता ममता बनर्जी ने पुलिस को फायरिंग (आरजी कर हमला) की अनुमति नहीं दी।'
वहीं उद्यन गुहा ने कहा, 'जो लोग सीएम ममता बनर्जी पर उंगली उठा रहे हैं, उन्हें पहचानकर उनकी उंगलियां तोड़ने की जरूरत है।..'
वहीं चक्रबर्ती ने तो प्रदर्शनकारियों को यह कहकर धमकाया है कि 'अगर डॉक्टर मरीजों का इलाज करने की जगह प्रदर्शन के नाम पर ब्वॉयफ्रेंड के साथ घूमेंगी या घर चली जाएंगी और मरीज मर जाता है, तब जनता बेकाबू हो जाएगी। अगर अस्पतालों का घेराव होता है, उन्हें हमारे पास बचने के लिए नहीं आना चाहिए।'












Click it and Unblock the Notifications