Kolkata Doctor Case: बंगाल में कैसे संगठित 'गैंग' की तरह काम कर रहा है स्वास्थ्य महकमा?
Kolkata Doctor Case news: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए रेप और हत्या को लेकर पश्चिम बंगाल का पूरा स्वास्थ्य महकमा सवालों के घेरे में है। आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल डॉक्टर संदीप घोष को लेकर जो एक से बढ़कर एक भयंकर खुलासे हो रहे हैं, उससे पता चल रहा है कि राज्य में स्वास्थ्य विभाग को कैसे लूट-खसोट का साधन बना लिया गया है।
बीते सोमवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पश्चिम बंगाल चैप्टर की इसी संदर्भ में एक वर्चुअल मीटिंग हुई। इस मीटिंग में प्रदेश के 15 सरकारी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपलों ने भाग लिया। इसमें मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपलों की ओर से कोलकाता के 'स्वास्थ्य भवन' में बैठे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को लेकर जो खुलासे किए गए हैं, वह हिला देने वाले हैं।

बंगाल में कौन चला रहा स्वास्थ्य विभाग?
इन प्रिंसिपलों की शिकायत है कि ऊपर से उनके हाथ बंधे हुए गए हैं। उन्हें धमकियां दी जाती हैं। रोजाना के प्रशासनिक काम में भी दखल दी जाती है। एक महिला प्रिंसिपल ने अपना दर्द जिस तरह से बयां किया, उससे हैरानी हो जाती है कि बंगाल में स्वास्थ्य विभाग को सरकार चला रही है या किसी पेशेवेर अपराधी गिरोह को इसका ठेका दे दिया गया है!
मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल को जूनियर डॉक्टर ने दी देख लेने की धमकी
उस महिला डॉक्टर ने वह कहानी बयां की है, जिसमें एक जूनियर डॉक्टर ने उन्हें धमका दिया। क्योंकि, वह पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल के पीनल और एथिकल कमेटी का सदस्य है। उन्होंने कहा, 'उसने मेरा नाम लेकर बुलाया, गालियां दीं और धमकी दी कि 'देखेंगे' कि कैसे मेरे बच्चे घर से बाहर निकलते हैं।'
हमें बिल्कुल ही न्याय की उम्मीद नहीं-आईएमए
आईएमए के वेस्ट बंगाल ऐक्शन कमेटी ने एक बयान में कहा है, 'अपने काम की जगह पर जब एक मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल सुरक्षित महसूस नहीं करती है तो हमें बिल्कुल ही न्याय की उम्मीद नहीं है। हमें इससे भी ज्यादा आश्चर्य इस बात पर हुआ कि प्रिंसिपल की ओर से घटना की जानकारी दिए जाने के बाद भी स्वास्थ्य भवन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह साफ है कि स्वास्थ्य विभाग सत्ता के भूखे, आंखें मूंदे अधिकारी चला रहे हैं, जिनकी एकमात्र चिंता उनकी अगली पोस्टिंग हो सकती है।'
सवाल उठता है कि उस जूनियर डॉक्टर के सिर पर किसका हाथ है, जिसने प्रिंसिपल से अभद्रता की, उन्हें उनके बच्चों को लेकर धमकी दी और फिर भी स्वास्थ्य भवन का कोई अधिकारी उसे छूने तक का हिम्मत नहीं कर पाया?
मेडिकल परीक्षा पर भी संगठित गिरोह का कब्जा!
इस मीटिंग से एक और बड़ा खुलासा यह भी हुआ कि बंगाल में लगता है कि मेडिकल छात्रों का पास और फेल होना भी पहले से तय होता है और शायद किसी में इसका विरोध करने की हिम्मत नहीं बची है।
मेडिकल परीक्षा बंगाल में बन गई खेल
जैसे कुछ प्रिंसिपलों ने आरोप लगाया है कि कुछ चुनिंदा मेडिकल छात्रों को परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र दे दिए गए और इसके लिए उन्हें परीक्षा के समय मोबाइल फोन और लैपटॉप इस्तेमाल करने की भी छूट दी गई, जिस दौरान कॉपी लिखने के लिए उन्होंने Chat GPT जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी इस्तेमाल किया।
मेडिकल परीक्षा की कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन की मांग
कोलकाता के उपनगरीय इलाके के एक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने तो यहां तक सुझाव दिया कि 2024 की परीक्षा की कम से कम 40% कॉपियां एक जैसी हैं, इसलिए इनका पुनर्मूल्यांकन किया जाए।
सबकुछ स्वास्थ्य भवन से होता है कंट्रोल!
आईएमए की ओर से कहा गया है, 'उत्तर बंगाल के एक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने जानकारी दी कि एक फैकल्टी ने परीक्षा शुरू होने से पहले ही छात्रों को प्रश्न पत्र दे दिए। उत्तर बंगाल के एक अन्य मेडिकल कॉलेज के टीचर को परीक्षा के दौरान निरीक्षक की ड्यूटी से हटा दिया गया। प्रिंसिपल पर एक टीचर को परीक्षक पद से हटाने का भारी दबाव था।'
'गैंग' तय करेगा कौन पास होगा और कौन फेल?
आईएमए का कहना है कि 'इतने बड़े पैमाने पर जो कुछ चल रहा है, यह तभी हो सकता है जब सिस्टम का बड़ा हिस्सा भ्रष्ट है और एक प्रभावी कार्टेल की तरह काम करता है।' उत्तर बंगाल लॉबी को लेकर यहां तक तथ्य सामने आए हैं कि यह 'उत्तर बंगाल लॉबी तय करता है कि कौन पास करेगा और कौन फेल।'












Click it and Unblock the Notifications