राज्यसभा की एक पक्की सीट से उत्तर बंगाल में चुनावी गणित सेट करना चाहती है बीजेपी?
बीजेपी ने बुधवार को पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की एकमात्र सीट के लिए अनंत राय महाराज की उम्मीदवारी तय की है। बंगाल विधासभा में भाजपा विधायकों की संख्या बल को देखते हुए पार्टी की यह सीट पक्की है और इसके साथ राज्य से ऊपरी सदन में चुनाव के माध्यम से पहली बार पार्टी का खाता खुलने जा रहा है।
अनंत राय महाराज ग्रेटर कूच बिहार पीपुल्स एसोसिएशन के एक गुट के प्रमुख हैं। यह संगठन उत्तर बंगाल के इलाके में अलग कूच बिहार राज्य की मांग कर रहा है। माना जाता है कि अनंत राय का राजबंशी या कोच-राजबंशी समाज पर काफी पकड़ है और उनके संगठन को करीब 18 लाख लोगों का समर्थन है।

उत्तर बंगाल का बहुत बड़ा वोट बैंक हैं राजबंशी
उत्तर बंगाल में चुनावी राजनीति के लिए राजबंशी वोट बैंक बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है। इलाके में इनका 30 फीसदी वोट माना जाता है। बंगाल में राजबंशी समाज अनुसूचित जाति की श्रेणी में हैं और अगर लोकसभा चुनावों की बात करें तो यह उत्तर बंगाल के सात से आठ क्षेत्रों में चुनावों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
अनंत राय महाराज पार्टी लीडरशिप की पसंद
महाराज को राज्यसभा में भेजने का फैसला सीधे बीजेपी की टॉप लीडरशिप का है। क्योंकि, एक दिन पहले ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के जूनियर गृह राज्यमंत्री निसिथ प्रमाणिक ने कूच बिहार के बोरोगिला में उनके घर जाकर उनकी उम्मीदवारी पर चर्चा की थी। प्रमाणिक कूच बिहार से ही भाजपा के सांसद हैं। जब अनंत राय ने हामी भर दी तो अगले दिन उनके नाम का ऐलान किया गया।
मेरी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है- अनंत राय
बुधवार को उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, 'मैं खुश हूं कि मेरे नाम पर विचार किया गया। लेकिन, इसके साथ ही जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। अब मैं कूच बिहार के लोगों के मुद्दे को सामने ला पाऊंगा।'
उत्तर बंगाल विधानसभा-लोकसभा चुनावों में भाजपा को भारी बढ़त
पश्चिम बंगाल पंचायत चुनावों में तो तृणमूल के मुकाबले भाजपा दूर-दूर तक नजर नहीं आई है। लेकिन, 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उत्तर बंगाल में टीएमसी से काफी बेहतर प्रदर्शन करके दिखाया था। अनंत तब भी भाजपा के साथ थे और पार्टी इलाके की 54 में से 30 सीटें जीत गई थी।
2019 में उत्तर बंगाल की 7 सीटें जीती थी बीजेपी
बंगाल में राजबंशियों की आबादी 33 लाख से ज्यादा बताई जाती है। ये प्रमुख रूप से कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, मालदा और मुर्शिदाबाद इलाकों में फैले हुए हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में राजबंशी समाज ने भाजपा का समर्थन किया था और पार्टी उत्तर बंगाल की 7 सीटें जीत गई थी।
2019 से भाजपा की ओर मुड़े राजबंशी
परंपरागत तौर पर अधिकांश राजबंशी लेफ्ट फ्रंट के समर्थक माने जाते थे। 34 साल तक वामपंथी सरकार बनाने में उनका खास योगदान रहा। 2011 में जब ममता बनर्जी सत्ता में आईं तो राजबंशी तृणमूल के साथ हो लिए। लेकिन, 2019 के लोकसभा चुनाव में इन्होंने ममता का मूड खराब कर दिया और अपने क्षेत्र में बीजेपी को भारी बढ़त दिला दी।
इसके बाद टीएमसी और बीजेपी में इस समुदाय को अपने साथ जोड़े रखने की होड़ लग गई। विधानसभा चुनावों से पहले सीएम बनर्जी ने तीन नई पुलिस बटालियन बनाने की घोषणा की, जिसमें कूच बिहार की 'नारायणी बटालियन' भी शामिल है। राजबंशी लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। फिर केंद्र सरकार ने इसी समाज के एक रिटायर टीचर धर्मा नारायण बर्मा को पद्मश्री से नवाजा।












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