Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Bengal Poll Violence पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चारों आरोपियों की जमानत रद्द की, लोकतंत्र पर बताया सीधा हमला

Bengal poll violence case: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद भड़की हिंसा के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने चार आरोपियों की ज़मानत रद्द करते हुए उन्हें दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

आरोप है कि इन चारों ने एक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थक के घर पर हमला कर उसकी पत्नी के साथ दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न का प्रयास किया था।

bengal-poll-violence

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने इस हमले को "लोकतंत्र की जड़ों पर गंभीर हमला" करार दिया और कहा कि ऐसे मामलों में लापरवाही या नरमी बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

CBI की अपील पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

यह फैसला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की उस अपील के बाद आया जिसमें उसने कलकत्ता उच्च न्यायालय के जनवरी और अप्रैल 2023 के फैसलों को चुनौती दी थी, जिनमें चारों आरोपियों को ज़मानत दी गई थी।

सीबीआई ने अदालत को बताया कि उसने 2022 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी थी, लेकिन आरोपी लगातार सहयोग नहीं कर रहे थे जिससे मुकदमे की प्रक्रिया अटक गई।

Bengal poll violence case: क्या था मामला?

शिकायतकर्ता ने खुद को भाजपा समर्थक बताया था और आरोप लगाया था कि चुनाव परिणामों के दिन चारों आरोपी जबरन उसके घर में घुसे, घर को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त किया, उसकी पत्नी को बाल पकड़कर खींचा, कपड़े फाड़ दिए और यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की।

महिला ने खुद को बचाने के लिए अपने ऊपर केरोसिन छिड़क कर आत्मदाह की कोशिश की, तब जाकर आरोपी भागे। आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में इस गंभीर मामले में एफआईआर तक दर्ज नहीं की।

Bengal poll violence case पर कोर्ट ने क्या कहा?

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने अपने फैसले में लिखा, "चुनाव परिणामों के दिन सिर्फ इसलिए हमला किया गया क्योंकि पीड़ित भाजपा का समर्थक था। यह घटना दिखाती है कि आरोपी विपक्षी पार्टी के समर्थकों को किसी भी कीमत पर डराना चाहते थे।"

पीठ ने कहा कि अगर आरोपी ज़मानत पर रहे तो निष्पक्ष और स्वतंत्र मुकदमे की संभावना नहीं है। कोर्ट ने कहा, "यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों पर किया गया हमला है।"

SC का सख्त निर्देश: दो हफ्ते में आत्मसमर्पण करें आरोपी

सुप्रीम कोर्ट ने सख्त आदेश देते हुए कहा कि आरोपी दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करें। अगर वे आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो ट्रायल कोर्ट जबरदस्ती गिरफ्तारी के आदेश जारी करे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर इस मामले की सुनवाई पर कोई रोक किसी उच्च न्यायालय या फोरम द्वारा लगाई गई है, तो उसे स्वतः निरस्त माना जाएगा।

कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता और सभी महत्वपूर्ण गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। ताकि वे बिना किसी डर के अदालत में पेश होकर गवाही दे सकें। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस मामले का ट्रायल 6 महीने के भीतर पूरा किया जाए। अदालत ने कहा कि ऐसे संवेदनशील और लोकतंत्र से जुड़े मामलों में तेजी से न्याय देना अनिवार्य है।

क्या है पोस्ट-पोल वायलेंस केस?

यह मामला मई 2021 के विधानसभा चुनावों के परिणाम के बाद भड़की हिंसा से जुड़ा है, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) भारी बहुमत से सत्ता में लौटी थी। भाजपा ने दावा किया कि उनके कई कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर हमले किए गए।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गंभीर आरोपों जैसे हत्या, बलात्कार, यौन उत्पीड़न - वाले मामलों की जांच के लिए CBI को निर्देश दिया था, जिसके तहत यह मामला दर्ज हुआ।

हालांकि TMC सरकार का कहना रहा है कि चुनाव परिणामों के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के अधीन थी, और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पद ग्रहण करने के बाद स्थिति पर जल्द ही नियंत्रण पा लिया था।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+