मोदी की जमीन वाराणसी में क्यों खिसकी? किसान की जूते से पिटाई से जुड़ी इस ग्राउंड रिपोर्ट से समझिए

लोकसभा चुनाव 2024 के परिणाम ने बीजेपी में अंतर्कलह मचा दिया है। वहीं, तमाम राजनैतिक एक्सपर्ट, मीडिया एक्सपर्ट और विपक्षी नेता बीजेपी की इस खिसकी जमीन की कई बड़ी वजह बता रहे हैं। निश्चित तौर पर जिस तरह का परिणाम लोकसभा चुनाव में यूपी में आया है, उसका हर जगह पर सिर्फ कोई एक सा कारण नहीं है।

कुछ कारण कॉमन हैं, लेकिन अलग-अलग सीटों पर स्थानीय कारण भी इससे जुड़ गए और कहीं बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा, तो कहीं जीत-हार का अंतर बेहद कम हो गया। यही हाल पीएम मोदी की संसदीय सीट का भी हुआ, जब उनकी जीत का अंतर 4 लाख से घटकर डेढ़ लाख के आसपास रह गया।

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ऐसे में लोकसभा चुनाव 2024 का परिणाम काफी चौकाने वाला रहा। वन इंडिया की टीम बीजेपी की इसी खिसकती जमीन की जमीनी हकीकत जानने निकली, तो जो कुछ सामने आया, वह इस खबर में सिलसिलेवार आगे पेश कर रहे हैं।

दरअसल, इसमें कोई दोराय नहीं है कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी या यों कहें काशी में विकास के भरपूर प्रयास किए गए, जिसमें काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से लेकर तमाम हाईवे, एयरपोर्ट का नया अवतार, पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिशें शामिल हैं। दूर से देखने सब कुछ भला चंगा लग रहा था लेकिन जब यूपी में कई जगह बीजेपी के गिरते ग्राफ के साथ वाराणसी में पीएम मोदी की जीत में वोटों का ग्राफ गिरा तो कारणों की छानबीन होने लगी।

हमें जानकारी मिली कि पिंडरा इलाके में बनने वाले काशी द्वार हाईटेक सिटी के विरोध की एक बड़ी भूमिका है। जरा सोचिए, लोकसभा चुनाव से एक महीने पहले एक घटना हो जिसके बारे में आरोप है कि किसानों को जूते से पीटा गया। वजह कि ये किसान काशी द्वार योजना के लिए अपनी जमीन नहीं देना चाहते हैं। इन्हीं जूते से पीटने के निशान और पुलिस व प्रशासनिक अफसरों के जुल्मों की कहानी लेकर 10 गांव के किसानों ने बीजेपी विरोध की ऐसी रणनीति बनाई कि पीएम मोदी के 5 लाख की बढ़त से जीतने के दावे को जमीन पर ला दिया। नतीजा, पीएम मोदी की जीत सिर्फ डेढ़ लाख वोटों के आस-पास खिसक कर रह गई।

किस तरह हुआ था काशी हाईटेक सिटी योजना का विरोध
दरअसल, पिंडरा तहसील क्षेत्र में एयरपोर्ट के समीप के 10 गांवों की जमीन अधिग्रहित कर काशी द्वार योजना के तहत हाईटेक सिटी बनाने की योजना है। योजना की चर्चा कई माह से चल रही थी लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले जब अधिकारियों ने इसमें रुचि दिखाई तो विरोध में किसान भी सामने आ गए।

किसानों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कभी पिंडरा तहसील, कभी वाराणसी जिला मुख्यालय तो कभी गांवों में किसानों ने जुलूस निकालकर इस योजना का विरोध किया। इस योजना के अलावा, दूसरी टाउनशिप योजनाएं (जिनका जिक्र इस सीरीज की आगे की खबरों में होगा) हैं, वहां भी किसान एकजुट होने लगे।

लोकसभा चुनाव 2024 की अधिसूचना जारी हो जाने के बाद पिंडरा तहसील मुख्यालय पर किसान धरना प्रदर्शन कर रहे थे। 24 घंटे किसानों का धरना प्रदर्शन चल रहा था। विरोध लंबा चला और बाद में दिन में काफी किसान जुटते थे लेकिन रात में एक-दो किसान ही वहां रहते थे।

किसानों में संतोष पटेल नामक एक किसान भी शामिल था। संतोष ही एक ऐसा नाम है जिसके चलते तीन लोकसभा सीटों का समीकरण बदल गया। अप्रैल माह में रात में धरना स्थल पर बैठे संतोष को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। मतदान नजदीक था और मामला तूल पकड़ लिया।

क्या है जूते से मारने वाली बात?
किसानों के नेता संतोष पटेल वन इंडिया रिपोर्टर प्रवीन कुमार यादव से बात करते हुए बताते हैं कि उस रात पुलिस ने उन्हें धरना स्थल से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार करने के बाद रात भर उन्हें थाने के लॉकअप में रखा गया। इस बात की जानकारी किसानों को नहीं थी।

संतोष ने कहा कि सुबह होने पर एक व्यक्ति के माध्यम से थाने से ही उन्होंने अपनी कमेटी के किसान को फोन करके जानकारी दी। जानकारी मिलने के बाद किसान धरना स्थल पर पहुंचे तो सारा सामान, मोटरसाइकिल, टेंट सब कुछ गायब था। फिर काफी संख्या में किसान थाने पहुंचे।

संतोष कहते हैं कि उन्हें भी इस बात का भरोसा नहीं था कि अचानक सभी किसान एकजुट हो जाएंगे। संतोष ने बताया कि भारी संख्या में किसान थाने पर पहुंचने लगे इस दौरान पुलिस उन्हें वहां से दूसरे थाने पर ले गई।

संतोष ने बताया कि इस दौरान पुलिस अधिकारी उन्हें धरना समाप्त करने की धमकी देने के साथ ही उनकी जमकर पिटाई की। लाठी-डंडे के साथ ही पुलिसकर्मियों ने संतोष को जूते से पीटा और शाम को न्यायालय भेजा गया जहां से संतोष को जेल जाना पड़ा।

किसान अपनों से मिलकर खूब रोया, सबने खाई कसम
पिटाई के बाद जेल से छूटकर संतोष गांव में पहुंचा तो वह ग्रामीणों का हीरो बन चुका था। संतोष के शरीर पर चोट के निशान देखकर किसानों का खून खौल उठा। उसके बाद अलग-अलग गांव में लोग संतोष को लेकर पहुंचे और फिर पंचायत जुटी।

यहां एक बात और बता दूं कि वाराणसी जिले में पिंडरा, सेवापुरी और रोहनिया विधानसभा पटेल बहुल हैं। पिंडरा विधानसभा मछलीशहर लोकसभा के अंतर्गत आता है जबकि रोहनिया और सेवापुरी दोनों वाराणसी में हैं। संतोष ने बताया कि उसी दिन किसानों ने सामूहिक रूप से कसम खाई कि भाजपा को वोट नहीं देंगे और लोगों से भी अपील करेंगे।

किसान जहां जाता, चोट दिखाता और कसम दिलाता
उसके बाद मछलीशहर लोकसभा के अलावा चंदौली लोकसभा और वाराणसी लोकसभा क्षेत्र में भी संतोष पटेल के अलावा पिंडरा के अन्य किसानों ने अपने रिश्तेदारों और किसान भाइयों से भाजपा के खिलाफ वोट करने का अनुरोध करना शुरू कर दिया।

संतोष ने आगे कहा कि किसानों की टीम के साथ गांव-गांव घूम कर वह लोगों को अपना दुखड़ा सुनाते। उनके शरीर पर लगे चोट के निशान सरकार और पुलिस की बर्बरता की गवाही देते। यह सब जिसने भी देखा, सरकार के खिलाफ उसका खून खौल उठा। उसके बाद उन किसानों को कसम दिलाकर संतोष वापस लौट जाते थे।

संतोष पटेल ने कहा कि किसानों के विरोध का ही कारण रहा कि मछलीशहर लोकसभा सीट से बीपी सरोज और चंदौली लोकसभा सीट से दो बार सांसद रहे वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. महेंद्र पांडेय को चुनाव हारना पड़ा। संतोष ने वाराणसी में भी प्रचार किया था और दावा किया कि इसी का असर रहा कि वाराणसी में जीत-हार का अंतर मामूली रहा।

पिंडरा बीजेपी विधायक जब तक समीकरण समझे, तब तक देर हो गई थी
चुनाव परिणाम आने के बाद मछलीशहर लोकसभा सीट में बीपी सरोज समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी प्रिया सरोज से चुनाव हार गए। जानकार बताते हैं कि परिणाम के बाद पिंडरा विधायक डॉक्टर अवधेश सिंह को इस बात का एहसास हो गया। यही कारण था कि उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर काशी द्वार योजना को स्थगित करने की मांग करने का ऐलान किया। लेकिन किसान अभी भी खुश नहीं हैं। वे योजना स्थगित नहीं, निरस्त करने की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल, आगे की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर संतोष ने कहा कि हम लोग इतनी बड़ी लड़ाई लड़ चुके हैं। आगे भी हम लड़ाई लड़ते रहेंगे। संतोष पटेल ने कहा कि विधायक डॉक्टर अवधेश सिंह भले ही योजना को स्थगित करने की बात कह रहे हैं, लेकिन जब तक योजना को निरस्त नहीं किया जाता, तब तक किसान शांत नहीं बैठेंगे।

संतोष ने यह भी कहा कि यदि इस योजना को निरस्त नहीं किया गया, तो इसका खामियाजा आगामी चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी को भुगतना पड़ेगा। संतोष के साथ ही अन्य किसानों का भी यही कहना है कि लड़ाई जारी रहेगी।

नोट: हम इस खबर के जरिये यह दावा नहीं करते हैं कि सिर्फ इसी एक कारण से वाराणसी और मछलीशहर लोकसभा में बीजेपी की जमीन खिसकी, क्योंकि इसी तरह की कई और जमीनी हकीकत भी हैं जिनकी वजह से बीजेपी को नुकसान हुआ। उन्हीं में से इस खबर की कहानी भी एक महत्वपूर्ण वजह है। इस तरह और जमीनी हकीकत जानने को वन इंडिया की टीम जुटी हुई है। जल्द ही और भी कहानियां सामने आएंगी।

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