Smart Farming UP: एकीकृत खेती से बढ़ेगी किसानों की आय, मछली पालन और धान की फसल एक साथ करने से होगी मोटी कमाई
Smart Farming UP: उत्तर प्रदेश की धान की खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को प्रमुख सचिव (कृषि) अनुराग यादव ने वाराणसी स्थित अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान केंद्र दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र का दौरा किया।
इस मौके पर उनके साथ विश्व बैंक के प्रतिनिधिमंडल और कई वरिष्ठ वैज्ञानिक भी मौजूद थे। दौरे का उद्देश्य प्रदेश में धान की सीधी बुआई यानी डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक को तेजी से अपनाने की रणनीति पर चर्चा करना था।

यह दौरा उत्तर प्रदेश सरकार, विश्व बैंक और IRRI के बीच चल रही साझेदारी का अहम हिस्सा था, जिसका उद्देश्य राज्य में जलवायु-स्मार्ट और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना है। अधिकारियों और विशेषज्ञों के बीच हुई बातचीत में DSR तकनीक को जमीन पर उतारने के लिए जरूरी संसाधनों, प्रशिक्षण और रणनीतियों पर विचार-विमर्श हुआ।
दो दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत वाराणसी के पनियारा गांव में क्षेत्रीय भ्रमण से हुई, जहां खेतों में मल्टी-क्रॉप प्लांटर और लेजर लैंड लेवलिंग तकनीक का लाइव प्रदर्शन किया गया। इसके माध्यम से यह दिखाया गया कि किस प्रकार ये तकनीकें खेती को अधिक कुशल, सटीक और कम पानी की आवश्यकता वाली बना सकती हैं।
किसानों की आमदनी बढ़ाने की दिशा में मजबूत कदम
इस मौके पर प्रमुख सचिव अनुराग यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में "यूपी-एग्रीस परियोजना" की शुरुआत की है, जो किसानों को जलवायु-अनुकूल खेती की दिशा में मार्गदर्शन और समर्थन प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राज्य की कृषि व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती है।
उन्होंने बताया कि IRRI की तकनीकी विशेषज्ञता और सहयोग से DSR तकनीक को पूरे राज्य में सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है। इससे किसानों को न केवल उत्पादन में वृद्धि मिलेगी, बल्कि जल और श्रम की भी बचत होगी।
वार्ता में विश्व बैंक के प्रतिनिधियों में विनायक घटाते, शांतनु कुमार और अजीत राधाकृष्णन ने भाग लिया। IRRI-SARC के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह और UPDASP के अधिकारी प्रो. वी.पी. सिंह और सुनील कुमार भी चर्चा में शामिल हुए।
बैठक में कृषि नीति निर्माण, बीज आपूर्ति प्रणाली, किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और पब्लिक-प्राइवेट साझेदारी को मजबूती देने जैसे अहम मुद्दों पर भी मंथन किया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि यदि इन सभी पहलुओं को सही दिशा में आगे बढ़ाया जाए तो प्रदेश में खेती की तस्वीर बदल सकती है।
खेतों में दिखाई गई आधुनिक तकनीक
दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने DSR और लेजर लैंड लेवलिंग तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव किया। किसान इन तकनीकों की मदद से सटीक भूमि समतलीकरण कर सकते हैं और मशीनों के जरिए धान की सीधी बुआई कर सकते हैं, जिससे श्रम और सिंचाई पर आने वाला खर्च घटता है।
इसके अलावा, टीम ने बनकट गांव में मछली पालन के साथ की जा रही एकीकृत खेती का भी निरीक्षण किया। यहां यह देखा गया कि धान आधारित कृषि प्रणालियों में किस प्रकार आजीविका के विविध मॉडल जोड़े जा सकते हैं जिससे किसानों की आय में इजाफा हो सके।
रणनीतिक संवाद से बनी आगे की कार्य योजना
वाराणसी के कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित अंतिम सत्र में पूर्वांचल में DSR को अपनाने में आने वाली चुनौतियों और संभावनाओं पर रणनीतिक चर्चा की गई। इसमें विशेषज्ञों ने तकनीक को स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढालने पर जोर दिया।
विश्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारी विनायक घटाते ने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल तकनीक लाना नहीं, बल्कि किसानों की जरूरतों को समझकर उनके लिए व्यावहारिक और प्रभावशाली समाधान देना है। DSR तकनीक संसाधन-कुशल, पर्यावरण-अनुकूल और किसानों के लिए लाभकारी है।
IRRI-SARC की ओर से बताया गया कि संस्था शोध, तकनीकी सहायता और किसानों के प्रशिक्षण में सहयोग देकर उत्तर प्रदेश में जलवायु-स्मार्ट खेती को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इससे न केवल धान उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि जल संसाधनों का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।












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