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Dolphin Mitra UP: किसे मिलेगा डॉल्फिन मित्र बनने का मौका? वाराणसी-गाजीपुर में कितने लोगों की होगी नियुक्ति

Dolphin Mitra UP: गंगा की लहरों में छलांग लगाती डॉल्फिन धीरे-धीरे कम हो रही हैं। इन्हें बचाने के लिए उत्तर प्रदेश वन विभाग ने नया अभियान शुरू किया है। वाराणसी और गाजीपुर जिलों में जल्द ही ऐसे लोग नियुक्त किए जाएंगे जिन्हें 'डॉल्फिन मित्र' कहा जाएगा।

इस योजना के तहत नाविकों, मछुआरों और विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। कारण यह है कि ये लोग सीधे नदी से जुड़े रहते हैं और डॉल्फिन के व्यवहार को समझ सकते हैं। उनके सहयोग से संरक्षण कार्य अधिक प्रभावी माना जा रहा है।

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डॉल्फिन मित्र न केवल इन जीवों की निगरानी करेंगे बल्कि अवैध मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों की सूचना भी विभाग को देंगे। इसके बदले उन्हें निर्धारित मानदेय दिया जाएगा। विभाग मानता है कि स्थानीय भागीदारी से यह पहल ज्यादा सफल होगी।

राष्ट्रीय जलीय जीव और खास पहचान

भारत सरकार ने गंगा डॉल्फिन को 5 अक्टूबर 2022 को राष्ट्रीय जलीय जीव का दर्जा दिया था। इसके बाद हर साल 5 अक्टूबर को राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों में जागरूकता बढ़ाना और विलुप्तप्राय प्रजाति को बचाने का संदेश देना है।

गंगा डॉल्फिन को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने पहले ही विलुप्तप्राय सूची में रखा है। यही वजह है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारें इसके संरक्षण पर जोर दे रही हैं। अब डॉल्फिन मित्र रखे जाने के बाद इन्‍हें बचाने में काफी मदद मिलेगी।

2021 में केंद्र सरकार ने शुरू किया था प्रोजेक्ट

दरअसल, वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने "प्रोजेक्ट डॉल्फिन" शुरू किया था। इसका लक्ष्य गंगा और उसकी सहायक नदियों में पाई जाने वाली डॉल्फिन का संरक्षण करना है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत चल रही इस योजना को यूपी में और मजबूती मिल रही है।

भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत डॉल्फिन को संरक्षित जीव घोषित किया गया है। इसी कानून के तहत अब वाराणसी वृत्त से भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके बाद गाजीपुर और वाराणसी दोनों में डॉल्फिन मित्र नियुक्त करने का रास्ता साफ हुआ।

वाराणसी और गाजीपुर में रखे जायेंगे डॉल्फिन मित्र

योजना की शुरुआत में वाराणसी और गाजीपुर जिलों में दो-दो डॉल्फिन मित्र नियुक्त किए जाएंगे। ये लोग प्रतिदिन नदी किनारे जाकर डॉल्फिन की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और विभाग को जानकारी देंगे। भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।

सर्दियों में मछली पकड़ने वालों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे डॉल्फिन पर खतरा बढ़ता है। ऐसे समय में डॉल्फिन मित्र की भूमिका अहम होगी। वे स्थानीय स्तर पर चेतावनी देने और नियम पालन सुनिश्चित करने का काम करेंगे।

वन विभाग ने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भी इस योजना से जोड़ने का फैसला लिया है। इससे युवाओं को प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा और उन्हें जलजीव संरक्षण के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर भी। विभाग चाहता है कि नई पीढ़ी इस अभियान में सक्रिय भागीदार बने।

इच्छुक उम्मीदवार 29 अगस्त 2025 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित प्रारूप में संबंधित प्रभागीय वनाधिकारी के कार्यालय में जमा करना होगा। इसके अलावा, ई-मेल के जरिए भी आवेदन करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

वाराणसी क्षेत्र के आवेदक प्रभागीय वनाधिकारी, वाराणसी के कार्यालय को आवेदन भेज सकते हैं। वहीं गाजीपुर जिले के इच्छुक उम्मीदवार प्रभागीय निदेशक, गाजीपुर को ई-मेल कर सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी होगी।

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