मध्य प्रदेश के बाद क्या उत्तराखंड का नंबर, कब होगा धामी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार, क्या कहते हैं समीकरण
मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार ने मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया है। अब उत्तराखंड की धामी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी अटकलें चल रही हैंं।
प्रदेश में मंत्रिमंडल की चार सीटें खाली हैं। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि इसी महिनें धामी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है। 10 जुलाई को मंगलौर व बदरीनाथ में उपचुनाव है।

13 को परिणाम आने के बाद किसी भी दिन धामी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। इसके लिए कई नामों की चर्चा तेज हैं।
लोकसभा चुनाव में पांचों सीटों जीतने के बाद सीएम धामी पर एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार का दबाव बना हुआ है। माना जा रहा है कि बीते दिनों दिल्ली दौरे पर गए सीएम धामी ने केंद्रीय नेताओं से भी इस विषय पर चर्चा हो चुकी है। अब उपचुनाव के चलते मामला ठंडा पड़ा हुआ है। लेकिन उपचुनाव के परिणाम सामने आने के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार होना तय माना जा रहा है।
जिसके लिए कई दावेदार बताए जा रहे हैं। सीएम के सामने सबसे बड़ी चुनौती जातिय, क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की चुनौती है। इसके साथ ही कई ऐसे जिलें हैं जो कि अब भी मंत्रिमंडल में जगह पाने से वंचित हैं। जबकि कुछ जिलों को अधिक प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। वर्तमान में धामी सरकार में 8 कैबिनेट मंत्री हैं।
सीएम धामी चंपावत से प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। जिनमें सतपाल महाराज, धन सिंह पौड़ी से, प्रेमचंद्र अग्रवाल, गणेश जोशी देहरादून, सुबोध उनियाल टिहरी, सौरभ बहुगुणा उधम सिंह नगर, रेखा आर्य अल्मोड़ा जिले से आती हैं। विधानसभा स्पीकर ऋतु खंडूरी भूषण भी पौड़ी जिले से आती हैं। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट चमोली जिले से आते हैं, वे राज्यसभा के सांसद भी बनाए गए हैं। केंद्र की मोदी सरकार में अजय टम्टा जो अल्मोड़ा से सांसद हैं, राज्य मंत्री बनाए गए हैं।
ऐसे में हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल जिलों से किसी तरह का प्रतिनिधित्व नहीं है। जो कि आने वाले समय में धामी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। ऐसे में सीएम धामी को इन जिलों में से किसी को कैबिनेट में एडजस्ट करने का दबाव है।












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