उत्तराखंड में दलबदलू सियासी दलों को करेंगे मजबूत या देंगे नई टेंशन, जानिए क्या है मामला

भाजपा, कांग्रेस में टिकट से पहले आए नए दावेदार

देहरादून, 5 जनवरी। उत्तराखंड में एक बार फिर नए साल के आगाज के साथ ही दलबदल का खेल शुरू हो गया है। बीते ​दिनों में दर्जनों चेहरे पाला बदल चुके हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या जो चेहरे पाला बदल रहे हैं, वो पार्टी की ताकत बनेंगे या फिर नई टेंशन देने का काम करेंगी। ये बात तय है कि जो नए चेहरे टिकट बंटवारे से पहले पाला बदल रहे हैं, वो टिकट पाने के लिए ही नई जगह तलाश रहे हैं। ऐसे में ये तय है कि ये चेहरे आने वाले समय में सियासी दलों के बगावत का कारण बनेंगे।

Will strengthen or give new tension to the defected political parties in Uttarakhand, know what is the matte

भाजपा के दो नए चेहरे, पुराने बागी

सबसे पहले बात सत्ताधारी भाजपा की। भाजपा मिशन 60 प्लस में जुटी है। इसके लिए पार्टी टिकट बंटवारे में सोच समझकर कदम रख रही है। इसके साथ ही पर्यवेक्षकों से पैनल के लिए भी नाम मांग लिए हैं। एक सीट पर दर्जनों दावेदार हैं। इनमें से अधिकतर सीटों पर सिटिंग विधायक हैं। अब जो नए चेहरे शामिल हो रहे हैं, वो भी दावेदार माने जा रहे हैं। हाल ही में भाजपा में प्रतापनगर से राजेश्वर पैन्यूली और नैनीताल सीट से हेम आर्य की घर वापसी हुई। नैनीताल सीट पर बीजेपी से विधायक संजीव आर्य के कांग्रेस में शामिल होने के बाद कांग्रेस नेता हेम आर्य ने भाजपा को ज्वाइन किया। 2012 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव हार चुके आर्य 2017 में टिकट न मिलने पर कांग्रेस में चले गए थे। प्रतापनगर से 2012 और 2017 में निर्दलीय चुनाव लड़ चुके राजेश्वर पैन्यूली ने भी तब टिकट न मिलने पर बीजेपी को छोड़ दिया था। अब टिकट बंटवारे से पहले भाजपा में आए हैं तो कुछ आश्वासन मिलना तय है। ऐसे में ये दोनों दावेदार नैनीताल और प्रतापनगर सीट पर भाजपा के पुराने नेताओं की नींद उड़ा चुके हैं। जिस भी टिकट फाइनल होगा एक खेमा नाराज होना तय है। जो कि भाजपा के लिए आने वाले दिनों में मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।

उत्तरकाशी में कांग्रेस में कलह तय
अब बात सत्ता में वापसी को बेकरार नजर आ रही कांग्रेस की। कांग्रेस भाजपा के पुराने विधायकों और दूसरे चेहरों को बिना किसी रिस्क के बारे में सोचते हुए ज्वाइनिंग करा रही है। कांग्रेस को लगता है कि जितने नेता कांग्रेस का हाथ थामेंगे। उतना हाथ मजबूत होगा। लेकिन ये हाथ मजबूत करेंगे या फिर सिर दर्द करेंगे। ये आने वाला समय ही बताएगा। उत्तरकाशी जिले की पुरोला विधानसभा सीट से पूर्व भाजपा विधायक मालचंद और उत्तरकाशी के जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक विजल्वाण ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। मालचंद पुरोला से विधायक रहे हैं तो उनकी पुरोला से दावेदारी मानी जा रही है। जबकि दीपक बिजल्वाण यमुनोत्री सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं। सबसे पहले बात पुरोला की। पुरोला से कांग्रेस विधायक राजकुमार ने दो महीने पहले विधायक से इस्तीफा देकर बीजेपी ज्वाइन कर ली। इसके बाद मालचंद ने कांग्रेस से संपर्क साधना शुरु कर लिया। लेकिन इस बीच देहरादून में पूर्व सीएम हरीश रावत ने पुरोला से 2017 में निर्दलीय चुनाव लड़ चुके दुर्गेश लाल को कांग्रेस ज्वाइन कराई और अब पूर्व विधायक मालचंद को भी दिल्ली में कांग्रेस ज्वाइन कराई गई है। ऐसे में दोनों के बीच टिकट को लेकर महाभारत होना तय है। ऐसा ही कुछ हाल यमुनोत्री सीट का है। 2017 से पहले कांग्रेस के​ विधायक रहे केदार सिंह रावत ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा और 2017 में भाजपा के टिकट से विधायक बने। कांग्रेस ने यमुनोत्री से संजय डोभाल को चुनाव में उतारा, जो कि इस बार लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं। अब जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण का कांग्रेस में आना नए असंतोष को जन्म दे गया है। दीपक बिजल्वाण की कांग्रेस में ज्वाइनिंग का जिला स्तर कांग्रेस कमेटी ने भी विरोध किया है। जिसके बाद आने वाले दिनों में पुरोला और यमुनोत्री सीट पर कांग्रेस के अंदर कलह होना तय है।

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