जब 9 साल बाद सतपाल महाराज से मिले हरीश रावत, भाजपा नेताओं से बढ़ती नजदीकियों से चढ़ा उत्तराखंड में सियासी पारा

कांग्रेस छोड़ने के 9 साल बाद हुई हरदा और महाराज की मुलाकात

देहरादून, 4 अप्रैल। उत्तराखंड में कांग्रेस हार के बाद अब संगठन खड़ा करने को लेकर होमवर्क करने में जुटी है। लेकिन हरीश रावत चुनाव हारने के बाद फिर से सक्रिय नजर आ रहे हैं। वे लगातार प्रदेश के नेताओं से मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री से लेकर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज से तक हरीश रावत की मुलाकात हो चुकी है। सबसे ज्यादा चर्चा हरीश रावत की सतपाल महाराज से मुलाकात को लेकर है। जो कि महाराज की कांग्रेस छोड़ने के करीब 9 साल बाद हुई है। ऐसे में हरीश रावत की भाजपा नेताओं से बढ़ती नजदीकियों को लेकर प्रदेश में सियासी पारा चढ़ा हुआ है।

When Harish Rawat met Satpal Maharaj after 9 years, political mercury rose in Uttarakhand due to increasing proximity to BJP leaders

हार के बाद फिर से एक्टिव हुए हरदा
प्रदेश में कांग्रेस चुनाव अभियान की कमान संभालने वाले हरीश रावत को 2022 के चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। हरीश रावत अपना भी चुनाव हारे हैं। ऐसे में अब कांग्रेस के अंदर हरदा के नेतृत्व को लेकर भी लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। लेकिन जिस तरह से प्रदेश की सियासत में हरीश रावत अब भी सियासत का केन्द्र बने हुए हैं। उससे साफ है कि कांग्रेस ही नहीं विपक्ष भी हरीश रावत के कद को कम नहीं आंक रही है। इस बीच हरीश रावत की कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज से भी मुलाकात हुई है। जो कि पहले एक विवाह कार्यक्रम में मिले। इसके बाद हरीश रावत महाराज के घर भी होकर आए। हरीश रावत ने मुलाकात को लेकर कहा है इस मुलाकात के सियासी मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। वे अपनी बिमारी को लेकर महाराज से मिले थे। कोरोना के बाद उन्हें इन्फेक्शन को लेकर महाराज से कुछ इलाज की जानकारी मिली, जिसकी वजह से वे महाराज के घर पहुंचे थे। हरदा के बयान से ये बात तो साफ हो गई कि मुलाकात का मकसद क्या रहा। लेकिन 9 साल बाद हुई मुलाकात को लेकर सवाल उठना भी लाजिमी है। 2014 मेंं सतपाल महाराज भाजपा में शामिल हुए थे। तब से महाराज और हरीश रावत का आपसी कलह जगजाहिर है। जो कि दोनों के बीच की राजनीतिक अंर्तविरोध का भी कारण माना जाता है। महाराज का कांग्रेस छोड़ने की वजह भी हरीश रावत को ही माना जाता है। ऐसे में हरीश रावत का लंबे समय बाद महाराज के घर पहुंचना कई सवालों को जन्म दे गया।

सीएम से लेकर कई भाजपाई कर चुके हैं मुलाकात
महाराज से मुलाकात के पहले हरीश रावत से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उनके आवास पर मिलने पहुंचे थे। धामी से मिलने के बाद हरीश रावत ने उनके कुछ कार्यों की प्रशंसा भी की। इसको लेकर भी मीडिया हरीश रावत से सवाल कर चुकी है। जिस पर हरीश रावत ने अपने अंदाज में जबाव दिया कि वे घायल योद्धा हैं। महाभारत में भी घायल योद्धा से मिलने जाया करते थे। हरीश रावत और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मुलाकात को भी धामी का एक बड़ा सियासी कदम माना जा रहा है। जो कि उनके उपुचनाव से जुड़ा माना जा रहा है। धामी का कुमाऊं से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है। ऐसे में धामी की हरीश रावत से मुलाकात को भी काफी अहम माना गया है। इसके अलावा हरीश रावत से स्पीकर ऋतु खंडूरी, विधायक सरिता आर्य, शैलारानी रावत भी मुलाकात कर चुके हैं। भाजपा नेताओं से मुलाकात पर हरीश रावत ने इन्हें सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया है। हरदा ने कहा है कि उनसे मिलने कांग्रेस के नेता भी आ रहे हैं। ऐसे में इसके सियासी मायने निकाले जाने गलत है।

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