11 हजार फीट की ऊंचाई पर दयारा बुग्याल में खेली गई दूध, मक्खन, मट्ठा की होली, तस्वीरों में देखें बटर फेस्टिवल

उत्तराखंड:उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल में मना बटर फेस्टिवल

देहरादून, 16 अगस्त। उत्तराखंड के उत्तरकाशी में दयारा बुग्याल समुद्रतल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर 28 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। दयारा बुग्याल में एक अनोखी होली का आयोजन होता है। जिसे बटर फेस्टिवल यानि अढूंडी उत्सव कहते हैं।

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    11 हजार फीट की ऊंचाई पर खेली गई दूध मट्ठा की होली
    प्रकृति का आभार प्रकट करने के लिए दूध, मक्खन, मट्ठा की होली

    प्रकृति का आभार प्रकट करने के लिए दूध, मक्खन, मट्ठा की होली

    प्रकृति का आभार प्रकट करने के लिए स्थानीय लोगों ने जमकर दूध, मक्खन, मट्ठा की होली खेली। जिसमें पारंपरिक वेशभूषा के साथ लोगों ने रासौ नृत्य भी किया।

    दयारा बुग्याल में पारंपरिक व ऐतिहासिक बटर फेस्टिवल यानि अढूंडी उत्सव का आयोजन

    दयारा बुग्याल में पारंपरिक व ऐतिहासिक बटर फेस्टिवल यानि अढूंडी उत्सव का आयोजन

    बुधवार को रैथल के ग्रामीणों ने दयारा बुग्याल में पारंपरिक व ऐतिहासिक बटर फेस्टिवल यानि अढूंडी उत्सव का आयोजन किया। दयारा बुग्याल में रैथल के ग्रामीणों सदियों से भाद्रप्रद महीने की संक्रांति को दूध मक्खन मट्ठा की होली का आयोजन करते आ रहे हैं। इस दौरान गंगोत्री के विधायक सुरेश चौहान समेत कई स्थानीय लोगों ने प्रकृति के आभार के लिए मनाए जाने वाले इस अनोखे कार्यक्रम में प्रतिभाग किया।

    रैथल गांव की दयारा पर्यटन उत्सव समिति व ग्राम पंचायत बीते कई वर्षों से आयोजित कर रही

    रैथल गांव की दयारा पर्यटन उत्सव समिति व ग्राम पंचायत बीते कई वर्षों से आयोजित कर रही

    प्रकृति का आभार जताने के लिए आयोजित किए जाने वाले इस दुनिया के अनोखे उत्सव को रैथल गांव की दयारा पर्यटन उत्सव समिति व ग्राम पंचायत बीते कई वर्षों से बड़े पैमाने पर दयारा बुग्याल में आयोजित कर रही है।

    मवेशियों के साथ अपनी छानियों में ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए पहुंच जाते

    मवेशियों के साथ अपनी छानियों में ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए पहुंच जाते

    रैथल के ग्रामीण गर्मियों की दस्तक के साथ ही अपने मवेशियों के साथ दयारा बुग्याल समेत गोई चिलापड़ा में बनी अपनी छानियों में ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए पहुंच जाते हैं। ऊंचे बुग्यालों में उगने वाली औषधीय गुणों से भरपूर घास व अनुकूल वातावरण का असर दुधारू पशुओं के दुग्ध उत्पादन पर भी पढ़ता है।

    ताजे मक्खन व छाछ से होली खेली जाती

    ताजे मक्खन व छाछ से होली खेली जाती

    ऐसे में उंचाई वाले इलाकों में सितंबर महीने से होने वाली सर्दियों की दस्तक से पहले ही ग्रामीण वापिस लौटने से पहले अपनी व अपने मवेशियों की रक्षा के लिए प्रकृति का आभार जताने के लिए इस अनूठे पर्व का आयोजन करते हैं। स्थानीय स्तर पर अढूंडी पर्व के नाम से जाना जाने वाले इस बटर फेस्टिवल में समुद्रतल से 11 हजार फीट की उंचाई पर ताजे मक्खन व छाछ से होली खेली जाती है।

    दयारा बुग्याल उत्तरकाशी जिले में स्थित

    दयारा बुग्याल उत्तरकाशी जिले में स्थित

    दयारा बुग्याल उत्तरकाशी जिले में स्थित है।चारों ओर बर्फ से ढके इस बुग्याल तक पहुंचने के लिए उत्तरकाशी गंगोत्री सड़क मार्ग पर स्थित भटवाड़ी तक गाड़ी से पहुंचना होता है। फिर बारसू गांव से दयारा बुग्याल तक पैदल चलना होता है। जो कि करीब 9 किलोमीटर है।

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