Teachers Day: समाज में ज्ञान का उजाला फैला रहे ये शिक्षक, पैसा नहीं पेशे की वजह से बने गुरू
हर शिक्षक नवाचार से कुछ नया प्रयोग करने में जुटे
देहरादून, 5 सितंबर। आज शिक्षक दिवस है। शिक्षक के कई रूप हैं। जो समाज में अपने ज्ञान से उजाला फैलाने का काम कर रहे हैं। सरकारी स्कूल के शिक्षक से लेकर निजी स्कूल के टीचर हर कोई अपने स्तर से नवाचार कर कुछ नया करने में जुटे हैं। इतना ही नहीं समाज के दूसरे क्षेत्र में काम कर एक शिक्षक की भूमिका में भी कई लोग है। जो कि अपने कुछ अलग कार्याें और विचारों से दूसरों के प्रेरणा बने हुए हैं। एक नजर ऐसे ही कुछ शिक्षकों पर-

MNC की जॉब ठुकराई,इंग्लिश के टीचर
आशीष चावला मूल रूप से देहरादून के रहने वाले हैं। जो कि 2006 से बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रहे हैं। आशीष ने दिल्ली यूनिवर्सिटी श्री राम कॉलेज से पढ़ाई की इसके बाद उनकी दिल्ली में रिसर्च की प्रसिद्ध कंपनी में प्लेसमेंट हो गया था, लेकिन कुछ कारणवश वे देहरादून आ गए और तब से वे दून में रहकर कोचिंग सेंटर चला रहे हैं। आशीष इंग्लिश के टीचर है। जिनसे हजारों स्टूडेंट्स प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग लेते हैं। आशीष बताते हैं कि जो युवा तैयारी करते हैं, उनको वे एक सीख जरूर देते हैं कि हम कई बार अपना पेशा चुनते हैं लेकिन कई बार पेशा हमें चुनता है। यानि कि हम किस सेक्टर के लिए बने हैं, कई बार सेक्टर हमें अपने हिसाब से प्रेरित करता है। जिसमें हम अपना 100 परसेंट देते हैं।

8 साल दून के नामचीन स्कूल में टीचर, अब सरकारी स्कूल में बनी मिसाल
अरूनिमा शर्मा एक रायपुर के सरकारी स्कूल में शिक्षिका है। लेकिन वे 8 साल देहरादून के ब्राइटलेंड नामचीन स्कूल में टीचर रह चुकी है। जब उन्होंने सरकारी सेवा में बतौर टीचर ज्वाइन किया तो उन्हें समाज में कई लोगों ने ये बात कही कि प्राइवेट की नामचीन स्कूल की जॉब छोड़कर एक सरकारी टीचर की नौकरी करने जा रही हो तो उन्होंने इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। उनकी तैनाती शहर से दूर इंटीरियर स्कूल में हुई। जहां उन्होंने गरीबी को नजदीकी से देखा। इसके बाद जहां जहां वे रही उन्होंने समाज की कई बुराईयों को पास से देखा। इस बीच जब उनका दून सिटी में तबादला हुआ तो उन्होंने देखा कि गरीब, बस्ती के बच्चे किस तरह नशा और कूड़ा बिनकर अपना जीवन काट रहे हैं। ऐसे में उन्होंने स्कूल से लड़कर 100 से ज्यादा बच्चों को एडमिशन दिलाया। जिस वजह से बाल संरक्षण आयोग ने उन्हें बेस्ट टीचर का अवॉर्ड भी दिया है।

बैंक में प्रतिष्ठित नौकरी, आज भी पढ़ाने का जुनून
मूल रूप से टिहरी के रहने वाले 45 वर्षीय संजय बडोनी आज कॉपरेटिव बैंक में सीनियर मैनेजर हैं। लेकिन बैंक में प्रतिष्ठित नौकरी करने के बाद भी संजय से शिक्षा के क्षेत्र को नहीं छोड़ा है। इसके पीछे संजय बड़ोनी की मेहनत और सालों की तपस्या हैै। संजय ने 15 साल तक देहरादून में बच्चों को कोचिंग और पढ़ाई कराई है। जिस वजह से वे आज बैंकिग सेक्टर में होने के बाद भी शिक्षा क्षेत्र से किसी न किसी तरह से जुड़े हैं। उन्होंने अपना एक यूट्यूब चैनल भी बना रखा है। जिसके जरिए आज भी वे प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों को तैयारी करवाते हैं। संजय ने लाइफ में शुरूआत में पैसे कमाने के लिए बहुत सारे काम किए। ऐसे में वे हर किसी काम से कुछ न कुछ सीखते गए और आज दूसरों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

गंगा में पीएचडी, सरकारी स्कूल में नवाचार से कुछ नया प्रयोग करने में जुटे
सीमान्त क्षेत्र उत्तरकाशी के शम्भू नौटियाल जीआईसी भंकोली में सहायक अध्यापक विज्ञान के रूप में कार्यरत हैं। शंभू ने गंगा में पीएचडी की हुई है। 4 साल तक ग्राम्य विकास विभाग में काम करने के बाद शिक्षा विभाग में कुछ नए प्रयोग करने और बच्चों के साथ नवाचार के उद्देश्य से एक शिक्षक की नौकरी को चुना। जो शिक्षा के साथ-साथ गंगा स्वच्छता अभियान, पर्यावरण के क्षेत्र में लगातार जुड़े हैं। खास बात ये है कि शंभू नौटियाल अपने स्किल से कुछ न कुछ नवाचार करते रहते हैं। इसमें वे स्कूल के बच्चों को अपने साथ लेकर उन्हें कुछ नया सिखाते रहते हैं। मुख्यालय से अत्यंत दुर्गम इलाके में स्कूल होने के कारण बच्चों को सिखने में कई तरह की परेशानी होती है, लेकिन शंभू नौटियाल अपने स्तर से उस कमी को हमेशा दूर करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने स्कूल स्तर पर विज्ञान मेले की पहल की है। जिसमें वे बच्चों को साइंस से जुड़े हर नवाचार का ज्ञान देते हैं। खास बात ये है कि शंभू नौटियाल रोज पढ़ाई के सब्जेक्ट को पढ़ाने के लिए कुछ नए प्रयोग करते हैं। जिसमें सब्जेक्ट का भौतिक रूप से ज्ञान दिया जा सके।

मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी होने के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र को चुना
देहरादून के प्रतिष्ठित दून इंटरनेशनल स्कूल के प्रधानाचार्य दिनेश बड़त्वाल 1990 से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं। मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छी नौकरी होने के बावजूद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र को चुना। इसके बाद उन्होंने बीएड किया और लगातार शिक्षा में योगदान दे रहे हैं। दिनेश बड़त्वाल जितना शिक्षा के क्षेत्र में जुड़े हैं, उतना ही सामाजिक क्षेत्र में भी योगदान देते आ रहे हैं। इसके लिए वे हमेशा तत्पर रहते हैं। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए वे हमेशा से ही कुछ नया प्रयोग करते आ रहे हैं। जिस वजह से आज एक स्कूल को वे इस तरह बुलंदियों तक पहुंचा पाए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में कई अवॉर्ड मिल चुके हैं।












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