Uttarakhand news: हरक और काऊ के बीच पक रही चुनावी साल में खिचड़ी, बीजेपी की बढ़ रही टेंशन

विधायक उमेश शर्मा काऊ के प्रकरण को लेकर उत्‍तराखंड में गमाई सियासत

देहरादून, 8 सितंबर। उत्तराखंड में 2017 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी का दामन थामने वाले विधायकों का तेवर 2022 विधानसभा चुनाव से पहले गरम हो गए हैं। रायपुर के विधायक उमेश शर्मा काऊ के दिल्ली में हाईकमान से मिलने के बाद भी उत्तराखंड में बीजेपी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उमेश शर्मा काऊ के समर्थन में बीजेपी विधायक और कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत भी आ गए हैं। हरक सिं ह का कहना है कि जो भी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे, सभी विधायक एक साथ हैं। हरक सिंह ने उमेश शर्मा काऊ के समर्थन में खड़े होने की बात की है।

Uttarakhand News: Khichdi is brewing between Harak and Kau in the election year, BJPs increasing tension

उमेश शर्मा काऊ के तेवर तल्ख
बीते 4 सितंबर को देहरादून के रायपुर विधानसभा में एक कार्यक्रम में स्थानीय विधायक उमेश शर्मा काऊ ने अपने ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को खरी खोटी सुनाई थी। विधायक का कैबिनेट मंत्री के सामने कार्यकर्ताओं के साथ झगड़ा और विवाद हो गया। जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो गया। जिसकी पार्टी संगठन ने जांच करने का निर्णय लिया। लेकिन इससे पहले उमेश शर्मा काऊ दिल्ली पहुंच गए। और राष्ट्रीय नेतृत्व से लेकर हाईकमान से भी मिलकर अपना पक्ष रखा। उमेश शर्मा काऊ ने देहरादून आकर एक बार फिर अपनी पीड़ा को सार्वजनिक करते हुए बीते 5 साल में बीजेपी के अंदर हो रहे विरोध होने की शिकायत की। इसके बाद अपने साथी हरक सिंह रावत से भी मुलाकात की। सूत्रों की मानें तो उमेश शर्मा काऊ ने हरक सिंह से मिलकर पार्टी के अंदर हो रहे विरोध को लेकर नाराजगी दर्ज कराई है। उमेश शर्मा काऊ ने खुलकर अपने तरीके से खुद के संगठन से मिलकर आगे की रणनीति बनाने की बात की है। इसके बाद बीजेपी में बगावत के सुर एक बार फिर नजर आने लगे हैं। उमेश शर्मा काऊ के प्रकरण में हरक सिंह के आ जाने के बाद राजनीति फिर से गर्मा गई है।

2016 में कांग्रेस से की थी बगावत
मई 2016 में कांग्रेस के विधायकों ने हरीश रावत सरकार के खिलाफ बगावत कर बीजेपी ज्वाइन की थी। इसमें सतपाल महाराज, यशपाल आर्य, हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल, रेखा आर्य और उमेश शर्मा काऊ शामिल हुए थे। जो कि 2017 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़कर दोबारा जीते। इसके बाद उमेश शर्मा काऊ को छोड़कर सभी को मंत्री बनाया गया। उमेश शर्मा काऊ बीते कुछ समय से अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। उमेश शर्मा काऊ का आरोप है कि उनके क्षेत्र में कार्यकर्ताओं ने उनके और पार्टी के पोस्टर फाड़े हैं। मामले ने तूल पकड़ा तो हरक सिंह रावत उमेश शर्मा काऊ के पक्ष में खड़े हो गए। हरक सिंह भी लंबे समय से पार्टी के कुछ निर्णय से खुश नहीं है। ऐसे में दोनों विधायकों को लेकर राजनैतिक गलियारों में भी कई चर्चाएं हैं। इधर कांग्रेस भी अपने पुराने बागियों को लेकर नजर बनाए हुए है। कांग्रेस की और से कई बार बागियों को वापस लेने के लिए मंथन भी हो चुका है। कांग्रेस का दावा है कि उनके संपर्क में बीजेपी के कुछ विधायक समेत दर्जन भर दायित्वधारी संपर्क में है।

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