Uttarakhand Weather: अगले 3 दिनों में बढ़ेगा गर्मी का सितम! तापमान 4-6 डिग्री, 6 जून को बारिश का येलो अलर्ट
Uttarakhand Ka Mausam: उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से राज्य के कई इलाकों में बारिश और ठंडे मौसम की वजह से लोगों को गर्मी से राहत मिली हुई थी, लेकिन अब यह राहत ज्यादा दिनों तक रहने वाली नहीं है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले दो से तीन दिनों में राज्य के अधिकतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
मौसम विभाग का कहना है कि तापमान बढ़ने के साथ-साथ मौसम पूरी तरह साफ नहीं रहेगा। कई क्षेत्रों में नमी बनी रहने की संभावना है, जिससे उमस भी महसूस हो सकती है। ऐसे में लोगों को दिन के समय गर्मी और चिपचिपे मौसम दोनों का सामना करना पड़ सकता है।

IMD ने 6 जून के लिए येलो 'वॉच' अलर्ट भी जारी किया है। विभाग के अनुसार राज्य के पहाड़ी इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा आंधी-तूफान, बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है। मौसम में यह बदलाव स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों और किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी, वहीं दूसरी तरफ बारिश और तेज हवाओं का असर खेती-किसानी और यात्रा योजनाओं पर पड़ सकता है।
Uttarakhand Weather IMD Alert News Hindi: मौसम विभाग का विस्तृत पूर्वानुमान
IMD के अनुसार:
- अगले 2-3 दिन: अधिकतम तापमान में 4-6 डिग्री की बढ़ोतरी। इससे दिन की गर्मी महसूस होने लगेगी।
- 6 जून: पहाड़ी जिलों में कहीं-कहीं बिजली चमकने, तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान। मैदानी इलाकों में कुछ जगहों पर बहुत हल्की बारिश या आंधी की संभावना।
- देहरादून: आंशिक बादल छाए रहेंगे। कुछ इलाकों में हल्की बारिश या आंधी संभव। अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद।
पहले मौसम केंद्र ने अगले तीन दिनों में पहाड़ी और मैदानी दोनों इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी दी थी, लेकिन ताजा अपडेट में अलर्ट को येलो वॉच तक सीमित कर दिया गया है।
पिछले 24 घंटों का मौसम रिकॉर्ड
पिछले एक दिन में राज्य का मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहा। मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी कम और पहाड़ी क्षेत्रों में सामान्य से बहुत कम दर्ज किया गया। कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई:
- पौड़ी : 31.5 मिमी
- मोहकमपुर : 26 मिमी
- नैनीताल : 24.5 मिमी
बारिश के कारण कुछ इलाकों में नदियों-नालों में पानी बढ़ा, हालांकि बड़े स्तर पर कोई बाढ़ जैसी स्थिति नहीं बनी।
देहरादून में बारिश की घटना
5 जून को देहरादून में बारिश के दौरान एक दुखद घटना हुई। राजपुर रोड पर साईं मंदिर के पास पुरानी दीवार गिर गई। इसकी चपेट में आने वाली 85 वर्षीय महिला मनसा देवी को मलबे में दबे हुए निकाला गया।
आपदा नियंत्रण कक्ष को सूचना मिलते ही SDRF की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। टीम ने मलबा हटाकर महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया और आगे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। यह घटना पुरानी और कमजोर इमारतों वाले इलाकों में बारिश के दौरान होने वाले जोखिम की याद दिलाती है।
उत्तराखंड में मौसम परिवर्तन का बड़ा संदर्भ
उत्तराखंड हिमालयी राज्य है जहां मौसम बहुत तेजी से बदलता है। जून की शुरुआत में गर्मी बढ़ना सामान्य है, लेकिन इस बार तापमान में अचानक 4-6 डिग्री की बढ़ोतरी और उसके साथ बारिश-आंधी का कॉम्बिनेशन चिंता का विषय है।
संभावित प्रभाव:
- - पहाड़ी क्षेत्र: तेज हवाएं और बिजली गिरने से पेड़ उखड़ सकते हैं, बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। सड़कें फिसलन भरी हो जाएंगी।
- - मैदानी इलाके: बढ़ती गर्मी के साथ उमस बढ़ेगी, जिससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है।
- - कृषि: फसलें इस मौसम परिवर्तन से प्रभावित हो सकती हैं। गेहूं, फल और सब्जियों की कटाई वाले किसानों को सतर्क रहना चाहिए।
- - पर्यटन: चारधाम यात्रा, हिल स्टेशंस (मसूरी, नैनीताल, अल्मोड़ा) में पर्यटकों की भीड़ रहती है। आंधी-बारिश से यात्रा प्रभावित हो सकती है।
क्यों बदल रहा है मौसम?
वैश्विक जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में मौसम का पैटर्न अनियमित हो रहा है। IMD के वैज्ञानिकों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ, मानसून की प्रगति और स्थानीय भौगोलिक संरचना का मिश्रण ऐसे उतार-चढ़ाव पैदा करता है। इस साल प्री-मानसून गतिविधियां काफी सक्रिय रही हैं, जिससे बारिश के साथ तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
नागरिकों के लिए सलाह और सावधानियां
मौसम विभाग और SDRF ने लोगों से अपील की है:
- 1. पहाड़ी इलाकों में यात्रा करते समय मौसम अपडेट चेक करें।
- 2. पुरानी इमारतों, खड़ी दीवारों और पुराने पेड़ों से दूरी बनाकर रखें।
- 3. बिजली गिरने के समय खुले में न रहें, धातु के सामान से दूर रहें।
- 4. ड्राइविंग करते समय सावधानी बरतें, खासकर घुमावदार सड़कों पर।
- 5. पर्यटक मौसम पूर्वानुमान देखकर ही ट्रेकिंग या लंबी यात्रा की योजना बनाएं।
- 6. किसान खड़ी फसलों की सुरक्षा का इंतजाम करें।
राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन की तैयारियां
उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय में है। आपदा नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय है। यदि कहीं भारी बारिश या आंधी से नुकसान होता है तो तुरंत मदद पहुंचाई जाएगी।
पिछले वर्षों में राज्य में बादल फटने, भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। इसलिए छोटे-मोटे अलर्ट को भी गंभीरता से लेना चाहिए।
आगे क्या?
IMD लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। अगले कुछ दिनों में यदि कोई बड़ा विक्षोभ आया तो अलर्ट को ऑरेंज या रेड तक बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन सतर्कता जरूरी है।
उत्तराखंड में मौसम का यह उतार-चढ़ाव सामान्य है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के युग में इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। बढ़ता तापमान, अनियमित बारिश और आंधी-तूफान न सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित करते हैं बल्कि लंबे समय में पर्यावरण और अर्थव्यवस्था पर भी असर डालते हैं।
सभी नागरिकों से अनुरोध है कि IMD की आधिकारिक वेबसाइट, ऐप या स्थानीय मौसम केंद्र के अपडेट पर नजर रखें। सुरक्षा पहले - चाहे गर्मी हो या बारिश, सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।













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