उत्तराखंड को किस चीज से है वास्तविक खतरा? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया ये दावा
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की जनसांख्यिकीय पहचान को संरक्षित करने पर जोर दिया है। उन्होंने नागरिकों से राज्य आंदोलन के दौरान की तरह ही इसके लिए जज्बा बचाने का आग्रह किया। रामपुर तिराहा गोलीबारी की घटना की 30वीं वर्षगांठ पर उन्होंने इस बात पर ध्यान दिलाया कि 'उत्तराखंड में जनसांख्यिकीय परिवर्तन एक वास्तविक खतरा है' जिसका समाधान किया जाना चाहिए।
धामी ने सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून और व्यापक अतिक्रमण विरोधी अभियान जैसे उपायों की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसके तहत लगभग 5,000 एकड़ भूमि को पुनः प्राप्त किया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य उत्तराखंड के जनसांख्यिकीय संतुलन को बनाए रखना है। इसके अतिरिक्त, बाहरी लोगों को राज्य में असीमित भूमि खरीदने से रोकने के लिए अधिक कठोर भूमि कानून लागू करने की योजनाएं चल रही हैं।

मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा कांड में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उत्तराखंड के निर्माण में उनका बलिदान बहुत अहम है। धामी ने कहा, 'हम उनका कर्ज कभी नहीं चुका सकते। उनके बलिदान ने राज्य आंदोलन को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया। अब हमारी जिम्मेदारी उनके सपनों का उत्तराखंड विकसित करना और बनाना है। हम तब तक चैन से नहीं बैठेंगे, जब तक हम इसे हासिल नहीं कर लेते।'
रामपुर तिराहा घटना का ऐतिहासिक महत्व
2 अक्टूबर, 1994 को ऋषिकेश से दिल्ली जा रहे कार्यकर्ताओं पर पुलिस की ओर से हुई गोलीबारी में सात लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे। वे उत्तराखंड के लिए अलग राज्य की मांग कर रहे थे। रामपुर तिराहा पर हुई यह घटना उस आंदोलन में महत्वपूर्ण थी जिसके कारण अंततः साल 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग उत्तराखंड का गठन हुआ।
धामी ने उत्तराखंड की जनसांख्यिकी को सुरक्षित रखने के लिए सतर्कता की आवश्यकता पर बल दिया, जैसा कि राज्य संघर्ष के दौरान किया गया था। धामी ने कहा, 'यह हमारी प्रतिबद्धता है कि किसी भी कीमत पर इसकी जनसांख्यिकी को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। उत्तराखंड की मूल पहचान को बनाए रखना आवश्यक है।'
मुख्यमंत्री ने सम्मान के तौर पर रामपुर तिराहा के सभी शहीदों की प्रतिमाएं वहां स्थापित करने की योजना की घोषणा की। उन्होंने देहरादून में महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उनके चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी।
धामी ने कहा कि उत्तराखंड के बाहर के लोग भी देवभूमि की जनसांख्यिकीय स्थिरता की कामना करते हैं। भाजपा नेता ने इस उद्देश्य के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और यह सुनिश्चित किया कि कोई भी बाहरी राज्य के अद्वितीय सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय ताने-बाने को बाधित न करे।
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