कोरोना काल में बने कोरोना योद्धा अब हो गए अनजान, जानें क्या है मामला
आउटसोर्सिंग से रखे गए कर्मियों की सेवा बहाली का मुद्दा
देहरादून, 26 अप्रैल। कोरोनाकाल में आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखे गए स्वास्थ्य कर्मियों की सेवा बहाली का मुद्दा गरमाता जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मियों को हटाने के बाद अब ये आंदोलन करने को मजबूर हैं। विपक्ष भी पूरी तरह से आंदोलनकारियों के समर्थन में आ चुका है। सोमवार को आंदोलनकारियों के सीएम आवास कूच के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ धक्का मुक्की के बाद विपक्ष सरकार पर जमकर हमलावर है।

आउटसोर्सिंग के माध्यम से नौकरी पर रखे गए और अब हटा दिए
कोरोना काल में आउटसोर्सिंग के माध्यम से नौकरी पर रखे गए और अब हटा दिए गए स्वास्थ्य कर्मियों ने सेवा बहाली की मांग की है। इसको लेकर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच किया। बाद में पुलिस प्रशासन ने कोरोना योद्धाओं को जबरन उठाने का प्रयास किया। जिसके बाद दोनों पक्षों में जमकर हाथापाई धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हो गई। जिसके बाद आंदोलनकारियों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कोरोनाकाल में दून मेडिकल कॉलेज में 462 कर्मचारियों को आउटसोर्स के जरिए रखा गया था। जो कि अब सेवा विस्तार न होने की वजह से हटा दिए गए हैं। वहीं कांग्रेस के नेताओं ने इसे कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगा रहे हैं।
क्या है प्रकरण
कोविडकाल में स्टाफ की कमी को देखते हुए सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ नर्स, फार्मेसिस्ट, लैब टेक्नीशियन, ओटी टेक्निीशियन, एक्सरे टेक्नीशियन, कंप्यूटर आपरेटर, वाहन चालक, वार्ड अटेंडेंट आदि को आउटसोर्स पर रखे जाने की व्यवस्था की थी। इसी कड़ी में दून मेडिकल कॉलेज में भी उपनल के माध्यम से 462 उपनल कर्मियों की नियुक्ति की गई थी। जिन्हें समय और आवश्यकतानुसार रखा गया था। लेकिन अब कर्मचारियों को हटाया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि जब कोविड में जिदंगी संकट में थी तो उन्हें रखा गया उनसे काम लिया गया लेकिन अब जरुरत खत्म होते ही उन्हें हटाया गया है।












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