नरेंद्रनगर, घनसाली, प्रतापनगर और धनोल्टी हर विधानसभा सीट के अपने समीकरण, रिकॉर्ड पर रहेगी नजर

नरेंद्रनगर, घनसाली, प्रतापनगर और धनोल्टी सीट के समीकरण

देहरादून, 2 फरवरी। टिहरी जिले में नरेंद्रनगर, घनसाली, प्रतापनगर और धनोल्टी चारों सीटों का खास महत्व है। नरेंद्रनगर सीट पर सुबोध उनियाल चौथी बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाने की कोशिश में है तो घनसाली में निर्दलीय समीकरण बिगाड़ सकते हैं। प्रतापनगर सीट से जो जीता उसी की सरकार पक्की है जबकि धनोल्टी में हर बार नया चेहरा ही जीतकर आया है। ऐसे में इन चारों सीटों के समीकरण एक दूसरे से बिल्कुल अलग है।

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सुबोध रिकॉर्ड बनाने को मैदान में, ओमगोपाल हार का बदला
टिहरी जिले की नरेंद्रनगर सीट भी इस बार हॉट सीट बन गई है। उत्तराखंड सरकार में काबिना मंत्री और शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल इस बार के चुनाव में चौथी बार चुनाव जीतने के बाद इतिहास रचने की कोशिश में जुटे हैं। 2002, 2012 और 2017 में सुबोध उनियाल नरेंद्रनगर सीट से विधायक रहे। 2002 और 2012 में कांग्रेस जबकि 2017 में सुबोध उनियाल भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े, इस बार भी सुबोध उनियाल भाजपा से नरेंद्रनगर में चुनावी मैदान में है। जबकि 2007 में यूकेडी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने ओमगोपाल रावत इस बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। जो कि इस बार सुबोध उनियाल को पूरी टक्कर दे रहे हैं। जिस कारण इस सीट पर चुनाव रोमांचक हो गया है। स्वास्थ, ​शिक्षा और सड़क जैसे मुलभूत सु​विधाएं ही यहां के मुद्दे हैं।
निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं हार-जीत के समीकरण
घनसाली सुरक्षित विधानसभा सीट पर हर बार अलग-अलग समीकरण देखने को मिले हैं। हालांकि इस सीट पर निर्दलीय हमेशा से ही समीकरण बिगाड़ते हुए नजर आए हैं। घनसाली सीट पर 2002 में एनसीपी के बलवीर सिंह नेगी विधायक चुने गए। 2007 में बलवीर सिंह नेगी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने। 2012 में भाजपा के भीम लाल आर्य विधायक बने। इसके बाद 2017 में भाजपा से शक्ति लाल शाह विधायक बने। अब 2022 में कांग्रेस ने धनीलाल शाह को टिकट दिया है। ऐसे में पूर्व विधायक भीम लाल आर्य निर्दलीय होकर मैदान में है। भाजपा के नेता दर्शन लाल और सोहन लाल खंडेलवाल भी चुनाव मैदान में है। जबकि भाजपा ने पूर्व विधायक शक्तिलाल शाह को ही टिकट दिया है। इस तरह इस सीट पर निर्दलीय समीकरण बिगाड़ सकते हैं। घनसाली पर्यटन की दृष्टि से काफी सुंदर स्थल है। लेकिन सड़क, कनेक्टविटी और आपदा यहां की सबसे बड़ी समस्याएं हैं।
प्रतापनगर में जो जीता सरकार बनवाई
प्रतापनगर सीट पर कांग्रेस और भाजपा एक के बाद एक ही जीतकर आई है। साथ ही जिस पार्टी का विधायक चुना गया सरकार में वहीं पार्टी आई। ऐसे में क्या इस बार भी मिथक पर भी जनता सोचसमझकर वोट देगी। या फिर रिकॉर्ड टूटेगा। ये ​देखना दिलचस्प होगा। 2002 में कांग्रेस के फूल सिंह बिष्ट, 2007 में भाजपा के विजय सिंह गुड्डू और 2012 में कांग्रेस की विक्रम सिंह नेगी विधायक बने। लेकिन 2017 में फिर भाजपा के विजय सिंह गुड्डू चुनाव जीतकर विधायक बने। इस बार भाजपा के विधायक विजय सिंह और पूर्व विधायक विक्रम सिं​ह नेगी आमने सामने हैं। इस सीट पर केंद्रीय ओबीसी, स्वास्थ सुविधाएं, पंपिंग पेयजल, सड़क परिवहन जैसे मुद्दे चुनावी मुद्दे बने हुए हैं।
धनोल्टी में हर बार नए चेहरे को मौका
धनोल्टी सीट प्रदेश की सबसे खास सीट है। इस सीट पर जनता ने हमेशा नए चेहरे को मौका दिया है। 2002 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस के कौलदास विधायक बने वहीं वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के खजानदास ने जीत दर्ज की। वर्ष 2012 में भाजपा के महावीर रांगड़ विजयी रहे जबकि वर्ष 2017 में प्रीतम सिंह पंवार ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। इस बार धनोल्टी से भाजपा के टिकट पर प्रीतम सिंह पंवार, कांग्रेस के जोत सिंह बिष्ट और ​महावीर रांगड़ बतौर निर्दलीय चुनाव मैदान में है। जिससे मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। धनोल्टी पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश के मानचित्र में खास जगह बनाती है। ऐसे में धनोल्टी में बिजली, पानी, सड़क की मूलभूत समस्याओं पर हमेशा ​जनप्रतिनिधि फोकस रखते हैं।

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