हरिद्वार और हरिद्वार ग्रामीण सीट पर भाजपा का मजबूत किला, मदन कौशिक और हरीश रावत की इमेज है दांव पर
हरिद्वार और हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट सबसे हॉट सीट
देहरादून, 9 फरवरी। उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है। यहां पवित्र नदी गंगा का उद्गम स्थल है। जिस वजह से हरिद्वार सभी का केन्द्र रहा है। हरिद्वार जिले में हरिद्वार और हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट सबसे हॉट सीट बनी हुई है। हरिद्वार सीट से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक 5वीं बार जीत के रिकॉर्ड के लिए मैदान में हैं। जबकि हरिद्वार ग्रामीण सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत इस बार 2017 के विधानसभा चुनाव में अपने पिता हरीश रावत की हार का बदला लेने के लिए मैदान में हैं। जिनके सामने कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद हैं। जो कि हैट्रिक मारने के लिए चुनावी मैदान में हैं।

हरिद्वार में मदन कौशिक और भाजपा का मजबूत किला
हरिद्वार विधानसभा सीट भाजपा का मजबूत किला है। जिसमें पिछले 20 सालों से भाजपा का कब्जा रहा है। जिसमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का ही दबदबा रहा है। मदन कौशिक यहां से लगातार चार चुनाव जीतते आ रहे हैं। इस बार भी 5वीं बार मदन कौशिक चुनाव मैदान में हैं। इस बार मदन कौशिक के सामने कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी मैदान में हैं। 2002 में हुए चुनाव में बीजेपी के मदन कौशिक के सामने कांग्रेस के पारस कुमार जैन थे। तब मदन कौशिक ने 2900 से अधिक मतों से जीत दर्ज की। 2007 में हुए दूसरे चुनाव में मदन कौशिक ने सपा के अंबरीश कुमार को 26 हजार से अधिक मतों से हराया। 2012 में मदन कौशिक ने सतपाल ब्रह्मचारी को 8 हजार से अधिक मतों से हराया। 2017 के चुनाव में मदन कौशिक ने कांग्रेस के ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी को 35 हजार से अधिक मतों के हराया। इस तरह मदन कौशिक का इस सीट पर रिकॉर्ड दबदबा रहा है।
- हरिद्वार विधानसभा सीट में 1,42,469 मतदाता
- 78,144 पुरुष और 64,348 महिला मतदाता हैं
- इस सीट पर सबसे ज्यादा 35 परसेंट ब्राह्मण मतदाता
- 20 परसेंट पंजाबी समुदाय
- ठाकुर 15 परसेंट
- वैश्य समुदाय की आबादी 10 परसेंट
- उत्तराखंड बनने से पहले का इतिहास-
- 1957, 1962,1969- कांग्रेस के शांति प्रपन्न शर्मा
- 1967 - निर्दलीय घनश्याम गिरी
- 1974 -सीपीआई
- 1977 -जनता पार्टी
- 1980, 1985- कांग्रेस
- 1989-जनता दल
- 1991, 1993-भाजपा
- 1996 - सपा के अंबरीश कुमार
हरिद्वार ग्रामीण भाजपा का किला और हार का बदला लेने की चुनौती
उत्तराखंड में हरिद्वार ग्रामीण सीट पर भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। इस सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के नेता हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत को कांग्रेस ने टिकट दिया है। जिनका सामना कैबिनेट मंत्री और इस सीट पर हैट्रिक लगाने की कोशिश में जुटे स्वामी यतीश्वरानंद से है। इस सीट पर 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में हरीश रावत को हार का मुंह देखना पड़ा था। ऐसे में इस बार बेटी पिता के हार का बदला लेने के लिए चुनाव मैदान में हैं। अनुपमा ने ही 2017 में हरिद्वार ग्रामीण सीट पर हरीश रावत के चुनाव अभियान की कमान अपने हाथ में संभाली हुई थी। इस लिहाज से अनुपमा रावत के लिए इस सीट पर चुनाव लड़ना ज्यादा मुश्किल नहीं माना जा रहा है। हरिद्वार ग्रामीण सीट पर भाजपा के स्वामी यतीश्वरानंद तीसरी बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। जिन्होंने 2017 में हरीश रावत को चुनाव में शिकस्त दी थी। हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा सीट 2012 में अस्तित्व में आई थी। इस सीट पर पहाड़ी और मुस्लिम वोटर का अच्छाखासा वोटबैंक है। इस सीट पर लगातार यतीश्वरानंद ही विधायक का चुनाव जीतते आए हैं। हरिद्वार ग्रामीण सीट से कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की बेटी और महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव अनुपमा रावत को प्रत्याशी बनाया है। अनुपमा रावत के सामने अपने पिता की हार का बदला लेने के साथ ही परिवारवाद को लेकर उठ रहे सवाल का जवाब देने की भी चुनौती है। अनुपमा रावत एक मात्र प्रत्याशी हैं जिन पर एक परिवार से दो टिकट देने का आरोप लगा है। खुद पिता हरीश रावत लालकुंआ और बेटी अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव लड़ रही हैं। ऐसे में अनुपमा रावत को ऐसे विरोधियों को जवाब देना होगा जो उनके टिकट के पीछे परिवारवाद को कारण बता रहे हैं।
हरिद्वार ग्रामीण सीट
मतदाताओं की संख्या-130757
पुरूष मतदाता- 69236
महिला- 61521
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